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केतु · 115

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बृहस्पति-सूर्य, शुक्र-मंगल और अन्य ग्रहों के योग: धन, नौकरी और संबंध

लाल किताब के अनुसार विभिन्न ग्रहों के योग से धन, नौकरी, परिवार और रिश्तों पर क्या प्रभाव पड़ते हैं, जानिए इस लेख में।

सूर्य-शनि-शुक्र-केतु-चंद्रमा की युति: पत्नी, संतान और मां को कष्ट

यदि सूर्य के साथ शनि, शुक्र, केतु और चंद्रमा एक साथ हों तो पत्नी, संतान और मां को समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

बृहस्पति-शुक्र-सूर्य-मंगल की युति: मूक-बहरापन योग और उपाय

कुंडली में बृहस्पति, शुक्र, सूर्य और मंगल की कुछ खास स्थितियों से बोलने-सुनने में दिक्कत हो सकती है। जानें इसके उपाय।

दो ग्रहों के मिलने से होने वाले रोग: स्वास्थ्य समस्याएं और उपाय

लाल किताब के अनुसार, दो ग्रहों की युति से होने वाले विभिन्न रोगों और उनके ज्योतिषीय उपायों के बारे में जानें।

केतु ग्यारहवें भाव में: भविष्य की अच्छी समझ और सम्मान

ग्यारहवें भाव में केतु आपको भविष्य की अच्छी समझ और सरकारी महकमों में सम्मान दिला सकता है। आपको लंबी यात्रा से लाभ और देर से संतान प्राप्ति हो सकती है।

केतु दसवें भाव में: धन, व्यापार और संतान

दसवें भाव में केतु आपको बहुत अमीर बना सकता है, लेकिन व्यापार में 45 से 48 साल की उम्र में नुकसान हो सकता है। संतान संबंधी चिंताएं भी संभव हैं।

केतु नौवें भाव में: तरक्की और विदेश यात्रा

केतु का नौवें भाव में होना आपको तरक्की दिलाता है और विदेश यात्राओं का योग बनाता है। यह आपके पिता के प्रति आज्ञाकारी होने का भी संकेत है।

केतु आठवें भाव में: विवाह, संतान और स्वास्थ्य

लाल किताब के अनुसार, आठवें भाव में केतु के अच्छे और बुरे प्रभावों को जानें, साथ ही विवाह, संतान और स्वास्थ्य पर इसके असर और उपाय भी समझें।

केतु दूसरे भाव में: धन, यात्रा और पिता को कष्ट

केतु का दूसरे भाव में होना आपको कमीशन एजेंट या सरकारी अधिकारी बना सकता है, साथ ही लंबी यात्राएं भी करवा सकता है। हालांकि, पिता को कष्ट और नौकरी में बदलाव भी संभव है।

केतु पहले भाव में: तरक्की, संतान और यात्राएं

केतु के पहले भाव में होने से जीवन में तरक्की, सौभाग्यशाली संतान और लंबी यात्राओं के योग बन सकते हैं। जानें इसके शुभ-अशुभ प्रभाव और लाल किताब के उपाय।