विवाह का योग और समय: लाल किताब से वैवाहिक जीवन के रहस्य
विवाह का योग (शादी का समय)
वर्षफल (सालाना कुंडली) के अनुसार, जब बुध और शुक्र दोनों ग्रह 1, 2, 10, 11, 12 नंबर के घरों में बैठे हों और उन्हें शनि की मदद 1 या 10 नंबर के घर से मिल रही हो, तब विवाह का योग बन सकता है.
जब बुध और शुक्र 7वें घर में बैठे हों और इन दोनों के दुश्मन ग्रह 5वें या 11वें घर में न बैठे हों. फिर जब बुध और शुक्र दोबारा 7वें घर में आते हैं, तब विवाह का योग बन सकता है.
अगर बुध और शुक्र खराब हो रहे हों (कमजोर पड़ रहे हों) और उनके साथ कोई दूसरा ग्रह बैठा हो, जब उन्हें शनि की मदद मिले, तब विवाह का योग बन सकता है.
अगर शुक्र जन्म कुंडली में 4वें घर में अकेला या दूसरे ग्रहों के साथ बैठा हो, और वर्षफल में 2रे या 7वें घर में उसके दुश्मन ग्रह न हों, तो उस साल विवाह हो सकता है. विवाह की तारीख आगे भी बढ़ सकती है.
जब 2रा घर खाली हो, और कुंडली के वर्षफल में जब बृहस्पति और शुक्र 1, 2, 7वें घर में आते हैं, तो वह साल विवाह का हो सकता है.
जब बुध और शुक्र 2रे या 7वें घर में आते हैं, भले ही उन्हें शनि की मदद न मिल रही हो, तो वह साल विवाह का हो सकता है.
विशेष (खास बात): अगर किसी लड़की की कुंडली में बृहस्पति 4वें घर में आता है, तो वह विवाह करवाता है. यदि जन्म कुंडली में 4वें घर में बृहस्पति हो, तो उसका विवाह 16 साल की उम्र के आस-पास हो सकता है.
यदि तब बृहस्पति के साथ सूर्य या मंगल का साथ हो, तो उस लड़की का ससुर नहीं हो सकता है (यानी ससुर जीवित नहीं हो सकते).
दिए गए विवाह के सालों में राहु 2रे या 7वें घर में न हो, तो यह अच्छा होगा.
यदि तब बृहस्पति 7वें घर में हो, तो संतान पैदा करने योग्य (बच्चे पैदा करने में सक्षम) स्त्री नहीं मिल सकती है.
वर्षफल के अनुसार, जब बृहस्पति 1, 3, 7वें घर में आते हैं, तो वे विवाह का योग बनाते हैं. इसी तरह, जब शुक्र 1 या 7वें घर में आता है, तो विवाह का योग बन सकता है.
मंदा योग (खराब समय) पॉइंट
- अगर चंद्रमा 1ले घर में हो, तो 24वें या 27वें साल में विवाह अच्छा फल देने वाला नहीं हो सकता है.
- अगर शुक्र 1, 6, 8, 9वें घर में हो, तो 25वें साल में विवाह अच्छा फल देने वाला नहीं हो सकता है.
- अगर राहु 7वें घर में हो, तो 21वें साल में विवाह अच्छा फल देने वाला नहीं हो सकता है.
सूर्य और शुक्र - जब सूर्य शुक्र के लिए जहरीला (नुकसानदायक) हो, तो सूर्य की 22वें साल की उम्र में भी विवाह ठीक नहीं होता है, या यूं कहें कि 22-25 साल की उम्र में विवाह ठीक नहीं होता है.
शनि 6वें घर में होने पर - अगर शुक्र 2रे या 12वें घर में हो, तो 18वां या 19वां साल विवाह के लिए अशुभ (बुरा) माना गया है.
विवाह के लिए शुभ समय (अच्छा समय) पॉइंट
- जिस साल शुक्र 1, 2, 10, 11, 12वें घर में हो और बुध 7, 8, 4, 5, 6वें घर में न हो, वह समय विवाह के लिए अच्छा हो सकता है.
- अगर शुक्र और बुध इकट्ठे (एक साथ) 1, 2, 10, 11, 12वें घर में हों और शनि 1, 2, 7, 10, 12वें घर में हो, तो वह समय विवाह के लिए बहुत अच्छा माना गया है.
- अगर शुक्र 1, 2, 10, 11, 12वें घर में, शनि 5 या 9, 6 या 10, 2 या 6, 3 या 7, 4वें घर में हो, और बुध 7, 8, 4, 5, 6वें घर में न हो, तो विवाह के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है.
- जिस व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा 11वें घर में हो, उसे रात के दो बजे के बाद से चार बजे तक (केतु के समय में) कन्यादान का संकल्प (वादा) नहीं करना चाहिए. यदि वह ऐसा करेगा, तो वह खुद और उसकी बेटी दोनों दुखी रह सकते हैं.
- यही स्थिति उस युवक दूल्हे की भी होगी, जिसके चंद्रमा 11वें घर में है. यदि वह भी उस (केतु के समय) में अपने हाथ पर कन्यादान का संकल्प लेगा, तो वह खुद भी दुखी रहेगा, ससुर भी, और कन्या भी दुखी रह सकती है.
- शनि 7वें घर वाले व्यक्ति का विवाह यदि उसकी 22 साल की उम्र से पहले न हो, तो उसकी आंखें खराब हो सकती हैं.
- अगर बृहस्पति 1, 7वें घर में खाली हो, तो 16 साल की उम्र में या बचपन में विवाह बहुत अच्छा फल दे सकता है.
द्विभार्या योग (दो विवाह का योग) पॉइंट
- जब शुक्र नीच (कमजोर स्थिति) में हो और सूर्य शनि को देख रहा हो, तो यह योग बन सकता है.
- जब बुध 5वें या 8वें घर में हो, पापी ग्रह (बुरे ग्रह) 7वें घर में हों, और शुक्र 4वें घर में हो, तो यह योग बन सकता है.
- जब बृहस्पति 10वें घर में हो और सूर्य 5वें घर में हो, तब द्विभार्या योग बन सकता है.
- जब शुक्र के दाएं-बाएं पापी ग्रह हों, या जहां शुक्र बैठा हो, उससे चौथे या आठवें घर में मंगल, सूर्य, शनि इनमें से कोई भी ग्रह अकेले या इकट्ठे बैठे हों, तो स्त्री की मृत्यु पानी से हो सकती है.
- उपाय: काली रंग की बछड़े वाली दूध देने वाली गाय का दान करने से बचाव हो सकता है.
- जब दुश्मन ग्रह शुक्र को नुकसान पहुंचा रहे हों, तो स्त्रियों की संख्या अधिक हो सकती है. अगर सूर्य, बुध और राहु तीनों इकट्ठे हों, तो एक से अधिक विवाह हो सकते हैं, फिर भी गृहस्थ जीवन का सुख कम मिलेगा.
- अगर बुध 8वें घर में हो, तो स्त्रियों की संख्या अधिक हो सकती है, और सभी जीवित रह सकती हैं.
- जितनी बार वर्षफल में सूर्य और शनि का टकराव हो, व्यक्ति के उतने विवाह होने की संभावना हो सकती है. अगर सूर्य 6वें घर में और शनि 12वें घर में हो, तो पत्नियां मरती जा सकती हैं.
विशेष (खास बात): अगर बुध और शुक्र बाद के घरों में (7 से 12) हों और मंगल खराब (नीच) पहले के घरों में (1 से 6) हो, तो पति-पत्नी अलग-अलग हो सकते हैं. यदि वे कभी इकट्ठे भी हो जाएं, तो पत्नी पति के काम नहीं आ सकती है. उसकी सुंदरता बदचलनी (खराब चाल-चलन) का कारण बन सकती है. अच्छे चाल-चलन की हालत में, संतान या बीमारी के कारण खर्चा और परेशानी बढ़ सकती है. ऐसी स्थिति में, पत्नी को 12 साल तक बच्चा पैदा नहीं हो सकता है. इसके विपरीत, यदि बुध और शुक्र पहले के घरों में और मंगल नीच बाद के घरों में हो, तो शुक्र पर बुरे प्रभाव का कारण पुरुष हो सकता है.
यदि बुध और शुक्र अलग-अलग घरों में हों और उनका संबंध नीच मंगल से हो जाए, तो स्वाभाविक रूप से खराबी हो सकती है.
सूर्य और बुध का संबंध स्त्री के रंग और स्वभाव को दिखाता है. जन्म कुंडली में यदि सूर्य पहले के घरों (1-6) में और बुध बाद के घरों (7-12) में अपना संबंध बना रहे हों, तो स्त्री का रंग और स्वभाव अच्छा हो सकता है. शर्त यह है कि शनि का प्रभाव साथ न मिल रहा हो. दूसरा, इसके विपरीत, यदि बुध पहले और सूर्य बाद के घरों में हो, तो स्त्री का स्वभाव और रंग सामान्य सा ही हो सकता है.
जब सूर्य और बुध इकट्ठे सूर्य के प्रभाव में हों, और शनि का प्रभाव या दुश्मन ग्रहों का साथ न मिल रहा हो, तो परिणाम ठीक ही हुआ करते हैं. लेकिन यदि शनि का प्रभाव साथ हो जाए, तो स्त्री के स्वभाव में शनि की चंचलता (चंचलपन) आ सकती है.
अगर सूर्य और बुध 7वें घर में हों, तो स्त्री हर तरह से सूर्य के समान धनी (अमीर) परिवार से हो सकती है. यह जरूरी है कि शुक्र अच्छा हो, नहीं तो परिणाम उल्टे हो सकते हैं, यानी स्त्री घर से हो सकती है और स्वभाव में कठोर हो सकती है, लेकिन गृहस्थ जीवन ठीक ही हो सकता है.
ग्रहों का आपसी संबंध
- बुध और शुक्र का विवाह के दिन से ही बृहस्पति से संबंध जुड़ जाए, तो यह व्यक्ति के मान-सम्मान और भाग्य को चमका सकता है.
- सूर्य से संबंध - सामान्य हालात, कामकाज, नौकरी आदि (22 साल की उम्र).
- चंद्रमा से संबंध - धन, आयु (उम्र), शक्ति (24 साल की उम्र).
- मंगल से संबंध - संतान उत्पत्ति (बच्चे पैदा होना) (28 साल की उम्र).
- शनि से संबंध - संपत्ति, मकान आदि (36 साल की उम्र).
- राहु से संबंध - दुख, गरीबी, दुश्मन (42 साल की उम्र).
- केतु से संबंध - फलना-फूलना (तरक्की), प्रसन्नता (खुशी).
विवाह के बाद जीवन पॉइंट
- अगर शुक्र मजबूत (कायम) हो और मित्र ग्रहों की मदद मिले, तो स्त्री की उम्र लंबी हो सकती है.
- अगर बुध मजबूत हो और मित्र ग्रहों की मदद मिले, तो पुरुष की उम्र लंबी हो सकती है.
- अगर दोनों मजबूत हों, तो पुरुष और स्त्री दोनों की उम्र लंबी हो सकती है.
- अगर बुध और शनि साथी हों या बृहस्पति अकेला 10वें घर में हो, तो पुरुष दुखी हो सकता है.
- अगर शुक्र के दुश्मन 7वें घर में हों, या चंद्रमा और शनि या बुध और चंद्रमा इकट्ठे हों, या बुध मजबूत हो लेकिन शुक्र नीच हो, तो स्त्री दुखी हो सकती है.
- विशेष (खास बात): जब बुध और शुक्र का चंद्रमा या मंगल से साथ हो जाए, तो तलाक (जुदाई) हो सकती है.
- अगर बृहस्पति 10वें घर में हो, तो नाक छोटी हो सकती है.
- अगर बुध और शनि इकट्ठे हों, तो जुबान कड़वी (कठोर बोलने वाला), आंखें भूरी हो सकती हैं.
- अगर सूर्य और चंद्रमा हों, तो दो से अधिक विवाह हो सकते हैं, फिर भी गृहस्थ जीवन का सुख नहीं मिल सकता है, आंखें काली हो सकती हैं.
- अगर शनि और चंद्रमा हों, तो स्त्री को पुरुष का सुख कम मिल सकता है.
- अगर सूर्य 7वें घर में हो, तो पुरुष को स्त्री का सुख कम मिल सकता है, पराई स्त्री से संबंध हो सकता है.
- अगर शनि और राहु 12वें घर में हों, तो पुरुष को स्त्री का सुख कम मिल सकता है.
- अगर बुध या केतु शनि को देखें, तो स्त्री गरीब घर से हो सकती है.
- यदि शनि बृहस्पति को देखे, तो स्त्री सुख पूरा मिल सकता है.
- जब व्यक्ति की कुंडली में बृहस्पति, सूर्य और मंगल 4वें घर में होंगे, तो वह खूब धन कमा सकते हैं.
- विशेष (खास बात): यदि सूर्य या केतु बुध को देखें, तो स्त्री के पांव का नाखून वाला हिस्सा धरती पर न लगे (यानी ऊपर उठा रहे), तो वह स्त्री पति को खाने वाली (पतिभक्षिणी) हो सकती है.