संतान सुख और जन्म: लाल किताब के नियम
संतान का सुख
आपको संतान का सुख नीचे बताई गई स्थितियों में मिल सकता है.
चंद्रमा की कुंडली का संतान से कोई संबंध नहीं होता है. अगर साल की कुंडली (वर्षफल) में चंद्रमा खराब (नष्ट) है, तो संतान को भी परेशानी हो सकती है.
बुध और केतु में से जो भी ग्रह मजबूत (उच्च) होगा, उसी के आधार पर संतान लड़का या लड़की होगी.
लड़की पैदा होने का भेद बताना गलत है, क्योंकि इससे उस बच्चे की जान को खतरा हो सकता है. या यह भी हो सकता है कि बताने वाले का अनुमान गलत हो.
खास बात: जब मंगल या शुक्र, या केतु या बुध में से कोई भी ग्रह पहले घर (खाना 1) में आए और शनि भी उसके साथ आ जाए. या चंद्रमा या कोई पुरुष ग्रह (नर ग्रह) पहले या पांचवें घर (खाना 1, 5) में आए. या अकेला केतु ग्यारहवें घर (खाना नंबर 11) में आए. या मंगल का समय चल रहा हो और बीच के ग्रहों (मध्य ग्रह) के हिसाब से दूसरे घर (खाना 2) में मंगल, शुक्र, केतु और बुध के सहायक ग्रहों की स्थिति अच्छी हो, तो बेटा पैदा होता है.
संबंधित ग्रहों और मजबूत (उच्च फल वाले) ग्रहों के प्रभाव का समय और कमजोर (नीच) ग्रहों का प्रभाव देखना जरूरी है. मतलब, यह देखें कि साल की कुंडली (वर्षफल) में केतु खुद कहां है और कैसा है. अच्छा केतु बेटा देगा और अच्छा बुध बेटी देगा.
संतान का जन्म
- अगर शुक्र, मंगल, बुध, केतु पहले घर (नंबर 1) में हों और शनि भी साथ हो.
- पहले और पांचवें घर (नंबर 1, 5) में पुरुष ग्रह (नर ग्रह) हों, दूसरे घर (नंबर 2) में चंद्रमा हो, या मंगल हो, और केतु ग्यारहवें घर (नंबर 11) में हो.
- बुध (बेटी) या केतु (बेटा) - उनमें से जो भी अच्छी स्थिति में होगा, वैसी ही संतान होगी.
- अगर केतु मजबूत (कायम) है, तो बेटा होगा. अगर राहु मजबूत (कायम) है, तो बेटी होगी.
- अगर चंद्रमा छठे घर (नंबर 6) में है, तो बेटियां ज्यादा होंगी. और अगर केतु चौथे घर (नंबर 4) में है, तो बेटे होंगे.
खास बात: साल की कुंडली (वर्षफल) के अनुसार अगर चंद्रमा खराब (नष्ट) है, तो संतान को भी परेशानी हो सकती है. इसलिए, जन्म के दिन से 43 दिन पहले ही स्त्री के सिरहाने मूली रखकर सुबह मंदिर या किसी धार्मिक जगह पर देते रहें.
- अगर सूर्य, चंद्रमा, बृहस्पति और शनि पांचवें घर (नंबर 5) में हों, तो बेटा होगा. अगर पांचवां घर (नंबर 5) कमजोर (नीच) ग्रहों से खराब नहीं हो रहा है, तो बेटा पैदा होता है, नहीं तो रुकावटें (विघ्न) आती हैं.
- दूसरे घर (नंबर 2) में मंगल, शुक्र, केतु और बुध के सहायक ग्रह आने पर भी बेटे का जन्म होता है.
- अगर शुक्र के मित्र ग्रह (शनि, केतु और बुध) अच्छी स्थिति में हों, या तीसरे, पांचवें, ग्यारहवें घर (3, 5, 11) में हों, तो बेटा होगा.
- अगर बुध के मित्र ग्रह (सूर्य, शुक्र और राहु) ठीक स्थिति में हों, या तीसरे, पांचवें, ग्यारहवें घर (3, 5, 11) में हों, तो बेटियां होंगी.
- अगर केतु बारहवें घर (नंबर 12) में हो और पुरुष ग्रह (नर ग्रह) बृहस्पति, मंगल और सूर्य हर तरह से अच्छी स्थिति में हों, तो कई बेटे पैदा होंगे.
- अगर शनि पांचवें घर (नंबर 5) में हो, तो 48 साल की उम्र तक अपनी कमाई से घर बनाने पर संतान को परेशानी हो सकती है. लेकिन अगर कोई भी पुरुष ग्रह (नर ग्रह) जैसे बृहस्पति, मंगल और सूर्य अच्छी स्थिति में हों, तो संतान को परेशानी नहीं होती है.
गर्भपात
- मंगल और बुध (राहु के स्वभाव वाले) कमजोर (नीच) घरों में होने के कारण संतान को पेट में ही खत्म (नष्ट) कर देते हैं.
- राहु पांचवें घर (5) में भी गर्भपात करवा सकता है, अगर वह दुश्मन (शत्रु) ग्रहों से कमजोर (नीच) हो रहा हो.
- अगर चंद्रमा और केतु पांचवें घर (नंबर 5) में हों, तो बेटा होगा. अगर राहु पहले घर (नंबर 1) में हो, तो बेटियां होंगी, बशर्ते शनि कमजोर (नीच) या छठे घर (नंबर 6) में न हो.
- अगर राहु नौवें घर (नंबर 9) में हो, तो 42 साल की उम्र तक केवल एक बेटा मजबूत (कायम) रहेगा, ज्यादा से ज्यादा दो.
- अगर राहु पांचवें घर (5) में हो, चंद्रमा और सूर्य साथ हों, या चौथे या छठे घर (नंबर 4 या 6) में हों, और शनि सातवें घर (नंबर 7) में हो, तो बेटा जरूर होगा.
नपुंसक पुरुष और स्त्री का योग