मंगल बद: कारण, लक्षण और उपाय
लाल किताब सीखें - मंगल बद
मंगल बद एक ऐसी आग है जो आपको जला सकती है.
'बद' का मतलब होता है खराब.
मंगल एक ऊर्जा (शक्ति) है. अगर यह संतुलित (बैलेंस) नहीं रहती तो यह खराब असर डालती है.
मंगल नेक को हनुमान जी जैसा माना जाता है, और मंगल बद को शमशान के शिव (अघोरी साधु) जैसा कहा जाता है.
मंगल बद परमाणु बम की गलत ऊर्जा है.
मंगल हमारी खुशियों, तरक्की, शुभ कामों, खून के रिश्तों और अपनों के सपोर्ट से जुड़ा है. यही मंगल वो आग है जो हमारे चूल्हे में जलती है. यह आग न तो कम होनी चाहिए और न ही ज्यादा, नहीं तो खाना खराब हो जाएगा. मंगल की ऊर्जा संतुलित होनी चाहिए. अगर आपका भाई होते हुए भी एक-दूसरे के खिलाफ हो, तो उस भाई का कोई फायदा नहीं होता. यह मंगल बद हर खुशी में गम ला सकता है, और आपकी जिंदगी को तहस-नहस (खराब) कर सकता है.
जब भी मंगल बद आता है, तो राहु के कारण सब कुछ राख हो सकता है.
- सूर्य + शनि = मंगल बद (झगड़ा)
- बुध + केतु = मंगल बद (दिमाग या इंद्रियों से जुड़ी परेशानी)
- मंगल + केतु = मंगल बद (लावा, ज्वालामुखी का लावा)
- बुध + मंगल = मंगल बद (सेहत खराब)
मांगलिक और मंगल बद में फर्क होता है. मांगलिक सिर्फ शादी के लिए देखा जाता है, लेकिन मंगल बद पूरी जिंदगी के लिए देखा जाता है.
मंगल के घर (पहले, तीसरे, आठवें भाव)
- मंगल चौथे भाव में नीच का होता है, जिससे मंगल बद बनता है.
- मंगल तीसरे, छठे, आठवें भाव में हो तो मंगल बद बनता है (जिससे सेहत, संतान, रिश्तेदार बर्बाद हो सकते हैं). अगर तीसरे भाव में आया तो आपकी बहन को परेशानी देगा या बहन से परेशानी मिल सकती है. अगर छठे भाव में आया तो आपके पुत्र या बहन को परेशानी देगा या पुत्र या बहन से परेशानी मिल सकती है. अगर आठवें भाव में आया तो आपके भाई को परेशान करेगा या भाई से परेशानी मिल सकती है.
- बुध पहले, तीसरे, आठवें भाव में हो तो मंगल बद बनता है (जिससे व्यापार, याददाश्त, बोलने की शक्ति, नसों की परेशानी, रिश्तेदारी में दिक्कत हो सकती है).
- केतु पहले, तीसरे, आठवें भाव में हो तो मंगल बद बनता है (जिससे कमर, पैर, नाकामी, डर, गुप्त रोग, गुप्त चिंताओं से आप परेशान रह सकते हैं).
जब नौवें भाव में शुक्र आता है, तब केतु नीच हो जाता है और यह मंगल बद होता है (राहु स्वभाव जैसा).
गुरु + शुक्र = केतु नीच (यह केतु राहु को भी खराब कर सकता है).
जिस दिन सगाई होगी, उस दिन से शमशान की राख जैसी बड़ी आंधी उड़नी शुरू हो सकती है, मतलब शुभ काम पर दिक्कतें आनी शुरू हो सकती हैं. बड़े-बुजुर्गों को कष्ट हो सकता है या उनकी मौत भी हो सकती है. यह सारी चीजें सक्रिय (एक्टिव) हो सकती हैं. सगाई होने के बाद यह इंसान बहुत बेचैन होना शुरू हो सकता है. सगाई टूट भी सकती है. शादी के समय पर सोना चोरी हो सकता है, शादी के समय पर जनरेटर खराब हो सकता है, लाइट जा सकती है. शादी के समय बारात का एक्सीडेंट हो सकता है. शादी के समय पर तूफान आ सकता है और पूरा मंडप खराब हो सकता है. इसके सक्रिय होने की निशानियां:
- आपके घर के अगल-बगल में नीम का पेड़ या भट्टी या कोयला जलाने वाला काम होता होगा.
- धोबी बैठता होगा.
- ढाबा या होटल घर के पास होगा.
- इन्वर्टर की बैटरी बनाने वाली फैक्ट्री घर के पास होगी.
नौवें भाव में जब शुक्र का उपाय: चांदी के चकोर (चौकोर) टुकड़े नीम के पेड़ के तने में या जड़ में दबाएं. आप 9 टुकड़े 9 दिनों तक या 9 टुकड़े 43 दिनों तक या 1 टुकड़ा 43 दिनों तक कर सकते हैं. दरअसल, मंगल बद राहु की वजह से भड़क (तेज हो) जाता है और मंगल बद का उपाय राहु को शांत करने से होता है.
सावधानी (प्रीकॉशन): 25, 26 और 27 की उम्र में शादी नहीं करनी चाहिए.
जब बारहवें भाव में चंद्रमा आता है, तब मंगल बद कहलाता है. इससे तेजाबी पानी, बारिश के ओले, रात की सुनामी या गीला बिस्तर जैसी परेशानियां हो सकती हैं.
बारहवें भाव में जब चंद्रमा का उपाय: ओलों को एक कांच की बरनी (जार) में चार चौकोर टुकड़ों के साथ कसकर (टाइट) बंद करके या तो घर की छत पर या कमरे की ऊंची जगह पर रख दें. अगर ओले नहीं मिले तो बारिश के पानी को आइस-क्यूब जमाने वाली ट्रे में जमा दें और उससे चार चौकोर टुकड़ों को कसकर बंद करके या तो घर की छत पर या कमरे की ऊंची जगह पर रख दें. सावधानी: पढ़ाई की चीजें दान न करें. मुफ्त में किसी की पढ़ाई का इंतजाम नहीं करना चाहिए. मुफ्त में किसी को पढ़ाना नहीं चाहिए. मुफ्त में किसी को सलाह नहीं देनी चाहिए. रात के समय या शाम के बाद भजन-कीर्तन, सत्संग नहीं करना या सुनना चाहिए. शाम के बाद या रात को पूजा नहीं करनी चाहिए.
मंगल बद सूर्य के प्रकाश से नष्ट (खत्म) हो जाता है. मंगल + सूर्य = राजा और सेनापति. यह तब होता है जब सूर्य शुभ हो या कमजोर न हो. अगर सूर्य अकेले छठे, सातवें, दसवें या बारहवें भाव में हो तो मंगल बद सक्रिय होता है, और अगर सूर्य और चंद्रमा तीसरे भाव में हों तो मंगल बद सक्रिय नहीं होता. अगर सूर्य और बुध एक साथ कुंडली के किसी भी भाव में हों तो मंगल बद काबू (कंट्रोलेबल) में रहता है, और अगर सूर्य और बुध एक साथ तीसरे भाव में हों तो मंगल बद पूरी तरह से काबू में रहता है. अगर सूर्य किसी भी पुरुष ग्रह के साथ हो तो भी मंगल बद काबू हो जाता है. अगर मंगल बद किसी भी घर में बन रहा है, लेकिन उससे पांचवें घर में सूर्य बैठा है या सूर्य और बुध एक साथ बैठे हों तो मंगल बद नहीं बनेगा, क्योंकि पांचवां घर सहायता (सपोर्ट) का होता है. अगर सूर्य + बुध कहीं भी एक साथ हों और आपने उसको सक्रिय (एक्टिव) किया हो, तो मंगल बद अपना काम दिखाएगा यानी सक्रिय हो जाएगा. जैसे कि आप साउथ फेसिंग घर में रह रहे हों या घर में कोयला रखे हों.
जिसके मंगल बद होता है, उसकी आंखों का काला डेला (पुतली) ऊपर की तरफ होता है, यानी उसकी काली पुतली के नीचे सफेद आंख सामान्य आंख से ज्यादा दिखती है.
मंगल बद वाले इंसान के सिर के बाल सारे सीधे होते हैं, लेकिन यहां पर पफ बनता है या कह सकते हैं कि माथे के ऊपर वाले बाल घुंघराले हो जाते हैं.
जिसकी V-शेप वाली शक्ल होती है, वह इंसान मंगल बद वाला होता है.
जिसकी U-शेप वाली शक्ल होती है, वह इंसान मंगल नेक वाला होता है.
गौमुखी शेप का घर (यानी जिसकी सामने वाली एंट्री की दीवार छोटी होती है और पीछे वाली दीवार बड़ी होती है) मंगल नेक होता है. और अगर सामने वाली एंट्री गेट की दीवार पीछे वाली दीवार की तुलना में बड़ी होती है तो यह घर मंगल बद घर होता है.
T-पॉइंट वाला घर भी मंगल बद होता है. बंद गली वाले घर भी मंगल बद होते हैं. तीन तरफ से घर जो बंद होते हैं, वे भी मंगल बद होते हैं. और जो घर तीन तरफ से खुले होते हैं, वे भी मंगल बद होते हैं.
मंगल बद के उपाय: अपनी कुंडली के हिसाब से तीन धातु की अंगूठी, चांदी का कड़ा, चांदी का चौकोर टुकड़ा पहनें.
चौकोर शेप मंगल नेक होता है और त्रिकोण (ट्रायंगल) शेप मंगल बद होता है. चौकोर मंगल नेक है और चांदी चंद्रमा है.
रेवड़ियां बांटें या चाशनी गिराएं, कुत्तों को मीठी रोटी दें, मृगछाल (हिरण की खाल) अपने पास रखें.
मंगल बद = राहु का बिगड़ना.
राहु चंद्रमा से शांत होता है. राहु तीसरे भाव में उच्च का होता है और छठे भाव में बेहतर होता है. राहु मंगल से डरता है.
शरीर का बाजू वाला हिस्सा यानी तीसरा भाव या कलाई वाला हिस्सा जहां आप कड़ा पहनते हैं, और आप जब भी चांदी का कड़ा पहनते हैं तब मंगल बद काबू होता है.
सूर्य + बुध = मंगल नेक (चंद्रमा स्वभाव) होता है, और बुध जब भी सूर्य के साथ होता है तब वह चंद्रमा को नष्ट नहीं करता. चांदी, सोना और तांबा मिलाकर मंगल बद को दूर करता है, यह उपाय पुरुषों के लिए होता है. और औरतों के लिए चांदी की लाल और नीले रंग की चूड़ियां कलाई पर पहनने से मंगल बद को काबू किया जाता है. या कांच की लाल चूड़ियां सुहागिनों को पहनने से भी मंगल बद को काबू किया जाता है.
पाप / पुरुष / पापी ग्रह जब भी इकट्ठा होते हैं, जैसे शनि + राहु या शनि + सूर्य या गुरु + शनि, तो मंगल की मदद ली जाती है. अगर मंगल कुंडली के पहले, तीसरे, आठवें भाव में बैठा हुआ है, तब बुध की मदद ली जाती है.
ऐसे ही स्त्री ग्रह / सौम्य ग्रह / शुभ ग्रह इकट्ठा हों, जैसे शुक्र + चंद्रमा या चंद्रमा + बुध या शुक्र + बुध या गुरु + बुध या गुरु + शुक्र, तो बुध का उपाय किया जाता है, पर अगर बुध तीसरे, छठे, सातवें भाव में हो तो मंगल की मदद ली जाएगी.
जब भी दो पापी ग्रह या पाप ग्रह इकट्ठा होते हैं, जैसे शनि + राहु या मंगल + शनि या सूर्य + शनि, तब इसका उपाय मंगल का होता है.
अगर दो पापी ग्रह जैसे सूर्य + शनि बैठे हों और मंगल अपने पक्के (पहले, तीसरे या आठवें) घर में बैठा हो, तो इस मामले में मंगल के उपाय की जगह बुध का उपाय करना पड़ता है. और अगर इस मामले में बुध भी अपने पक्के घर पर हो (तीसरे, छठे या सातवें भाव में), तो तब आपस वाले ग्रहों के ही उपाय किए जाएंगे.
यदि दो स्त्री ग्रह आपस में इकट्ठा होते हैं, जैसे चंद्रमा + बुध या चंद्रमा + शुक्र, तो बुध के उपाय से उसको शांत किया जाएगा.
जब स्त्री ग्रह जैसे चंद्रमा + शुक्र इकट्ठा हों और बुध अपने पक्के घर पर हो (तीसरे, छठे या सातवें भाव में), तो मंगल का उपाय किया जाता है. और अगर इस मामले में मंगल भी अपने पक्के घर पर हो (पहले, तीसरे या आठवें भाव में), तो तब आपस वाले ग्रहों के ही उपाय किए जाएंगे.