कुंडली से खोजें

दशम भाव · 49

ग्रह और भाव चुनकर खोजें →

लाल किताब के अनुसार शरीर के अंग और भाव: विस्तृत जानकारी

लाल किताब ज्योतिष में हर भाव शरीर के किसी न किसी अंग से जुड़ा है। जानिए कौन सा भाव शरीर के किस हिस्से को दर्शाता है।

शनि सभी भावों में: अपना मकान कब बनेगा?

लाल किताब के अनुसार शनि ग्रह का आपके अपने मकान बनाने पर क्या असर होता है? जानिए शनि की विभिन्न भावों में स्थिति और मकान निर्माण से जुड़े शुभ-अशुभ फल।

लाल किताब के अनुसार: कुछ खास परिस्थितियों में मंदिर जाना और दान करना मना है

लाल किताब के अनुसार कुछ ग्रहों की स्थिति में मंदिर जाना या कुछ खास चीज़ों का दान करना आपके लिए बुरा हो सकता है। जानें कब बचें।

ग्रहों के प्रभाव को मनचाहे घरों में पहुंचाने का तरीका

लाल किताब के अनुसार, किसी भी ग्रह के प्रभाव को अपनी पसंद के घर में पहुंचाने के लिए उससे संबंधित चीज़ों को खास जगहों पर रखें।

शुक्र दसवें भाव में: संपत्ति, व्यापार और संतान चिंता

शुक्र का दसवें भाव में होना आपको संपत्ति, व्यापार में लाभ और न्यायप्रिय बनाता है, लेकिन संतान और स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं दे सकता है।

बुध दसवें भाव में: लेखक, संपादक और धन लाभ

जानें बुध के दसवें भाव में होने से व्यक्ति लेखक, संपादक कैसे बनता है और समुद्री यात्राओं से लाभ कैसे कमाता है। साथ ही, पिता के स्वास्थ्य और धन हानि से जुड़े बुरे प्रभावों से कैसे बचें।

मंगल दसवें भाव में: धन, तरक्की और सामाजिक सहयोग

मंगल का दसवें भाव में होना परिवार में धन और तरक्की लाता है। यह आपको सेना में उच्च पद और सामाजिक मामलों में सहयोग दे सकता है।

केतु दसवें भाव में: धन, व्यापार और संतान

दसवें भाव में केतु आपको बहुत अमीर बना सकता है, लेकिन व्यापार में 45 से 48 साल की उम्र में नुकसान हो सकता है। संतान संबंधी चिंताएं भी संभव हैं।

शुक्र-शनि दसवें भाव में: जवानी में भोग, बुढ़ापे में शांति

दसवें भाव में शुक्र और शनि की युति जवानी में भोग-विलास और गलत आदतों की ओर धकेल सकती है, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ जीवन में शांति और संतुलन लाती है।

शुक्र-राहु दसवें भाव में: आराम, पैसा और दुर्घटना का खतरा

दसवें भाव में शुक्र और राहु की युति आपको आराम, पैसा और लंबी उम्र दे सकती है, लेकिन दुर्घटना और स्वास्थ्य समस्याओं का भी खतरा रहता है।

शुक्र-केतु दसवें भाव में: संपत्ति, व्यापार और स्वास्थ्य

शुक्र और केतु का दसवें भाव में होना विवाह के बाद तरक्की, व्यापार में लाभ और संपत्ति का संकेत देता है, लेकिन बच्चों और स्वास्थ्य को लेकर चुनौतियाँ भी हो सकती हैं।