लाल किताब के सभी भावों का फल: सामान्य प्रभाव और उपाय
खाना (भाव) नंबर एक - पहला घर
यदि सातवां घर खाली हो, तो आपकी किस्मत 24 साल की उम्र में या शादी के बाद चमकती है.
अगर 24 साल की उम्र के बाद भी शत्रु ग्रह (दुश्मन ग्रह) किसी और घर में बैठे हुए लग्न के स्वामी ग्रह (मुख्य ग्रह) को टक्कर मार रहे हों, तो जब तक लग्न के स्वामी ग्रह का बचाव नहीं होता, तब तक आपकी किस्मत नहीं चमकेगी.
अगर दूसरे घर में पहले घर के ग्रह का शत्रु ग्रह बैठा हो, तो आपको गरीबी मिल सकती है. लेकिन अपनी अवधि (समय) पूरी होने पर वह शत्रुता (दुश्मनी) छोड़ देता है.
पहले घर में दो या दो से ज़्यादा ग्रह हों, तो उन्हें स्त्री ग्रह कहते हैं.
इसके उलट, अगर सातवें घर में दो या दो से ज़्यादा स्त्री ग्रह हों, तो उन्हें नर ग्रह कहते हैं.
सूर्य, शनि, बुध, मंगल - ये चारों ग्रह अगर कहीं भी एक साथ बैठे हों, तो उनका फल पहले घर जैसा ही होता है.
खाना (भाव) नंबर 2 - दूसरा घर
छठे, आठवें और बारहवें घर का असर इस घर में मिलता है.
इस घर में बैठा ग्रह भाग्य का ग्रह कहलाता है, क्योंकि यह धन का स्थान है. धन इंसान की पहली ज़रूरत है.
हालांकि, यह घर बृहस्पति का पक्का घर है. यहां बैठा शुक्र, बृहस्पति का दुश्मन होते हुए भी, बुरा असर नहीं देता. ऐसा इसलिए है क्योंकि यह राशि घर (वृष) शुक्र की अपनी राशि है.
अक्सर इस घर में नीच (कमज़ोर) ग्रहों का असर नीच नहीं होता. चंद्रमा यहां उच्च (ताकतवर) माना गया है.
इस घर में बैठे ग्रह का असर ज़्यादातर बुढ़ापे में होता है.
अगर आठवां घर खाली हो, तो इस घर का असर ठीक रहता है.
अगर दसवां घर खाली हो, तो वह कुंडली सोये हुए ग्रहों की कुंडली होती है.
अगर इस घर में बृहस्पति या केतु के शत्रु ग्रह हों, या आपके माथे पर सात से ज़्यादा लकीरें हों, तो आप डाकू हो सकते हैं.
खाना (भाव) नंबर 3 - तीसरा घर
इस घर के ग्रह आठवें घर के ग्रहों के बुरे असर से बचाने वाले होते हैं. भले ही वे ग्यारहवें घर में बैठे नीच ग्रहों के कारण खुद नीच या कमज़ोर क्यों न हो रहे हों.
खाना (भाव) नंबर 4 - चौथा घर
इस घर के ग्रह रात को जागते हैं या बुढ़ापे में मदद करते हैं.
यहां बैठा अकेला ग्रह, भले ही वह चंद्रमा का शत्रु ग्रह हो (क्योंकि यह चंद्रमा का पक्का घर है), बुरा फल नहीं देता. लेकिन उसका असर उस घर पर पड़ता है जहां शनि बैठा होता है.
बृहस्पति, सूर्य, चंद्रमा कहीं भी एक साथ बैठे हों, उनका असर इसी घर में पड़ता है.
बृहस्पति और सूर्य का असर वैसा ही होगा जैसा चंद्रमा का होगा.
खाना (भाव) नंबर 5 - पांचवां घर
उम्र, संतान (बच्चे), स्वास्थ्य (सेहत) और भविष्य इस घर से देखे जाते हैं.
जब तीसरा, चौथा और नौवां घर नीच (कमज़ोर) हो रहे हों, तो उनका बुरा असर इस घर पर पड़ता है.
सूर्य या बृहस्पति अगर दसवें घर में बैठे हों, तो वे इस घर के दुश्मन हो जाते हैं. भले ही पांचवें घर में उनका कोई दोस्त ही क्यों न बैठा हो. क्योंकि यह इन दोनों का पक्का घर है.
सूर्य जिस स्थिति (हालत) में होगा, वैसा ही फल इस घर का होगा.
अगर इस घर में बृहस्पति या सूर्य के मित्र ग्रह (दोस्त ग्रह) बैठे हों, तो आपको मामा का पूरा सुख मिलता है. इसके उलट, अगर सूर्य के शत्रु ग्रह बैठे हों, तो आग का डर बना रहता है.
खाना (भाव) नंबर 6 - छठा घर
बुध, शुक्र, केतु जिस स्थिति में होंगे, वैसा ही असर इस घर का होगा.
मंगल, शनि राशि फल के होंगे. इनको उपाय (टोटके) से ठीक किया जा सकता है.
राहु यहां उच्च (ताकतवर) है, लेकिन केतु नीच (कमज़ोर) है. केतु (संतान पक्ष) और केतु की अन्य चीज़ों का असर मंदा (खराब) ही होगा.
- पुरुष का चेहरा अगर लंबा हो, तो श्रेष्ठ (अच्छा); अगर चौड़ा हो, तो स्वार्थी हो सकता है.
- स्त्री का चेहरा अगर लंबा हो, तो निकम्मा (बेकार); अगर चौड़ा हो, तो श्रेष्ठ (अच्छा) हो सकता है.
शुक्र का फल यहां खराब होता है.
खाना (भाव) नंबर 7 - सातवां घर
जवानी, यौवन (जवानी), साथ लाया धन इस घर से देखा जाता है. इस सातवें घर का फैसला मंगल से होता है.
अगर शुक्र और बुध एक साथ हों, तो शनि का असर भी श्रेष्ठ (अच्छा) होता है. धन और संपत्ति की कोई कमी नहीं रहती. मिट्टी से भी सोना बन सकता है. आपकी कुंडली में शुक्र जैसा होगा, वैसा ही इस घर का असर होगा, क्योंकि इस घर का स्वामी ग्रह शुक्र है और बुध जैसा होगा, शुक्र वैसा फल देगा.
अगर पहले घर में कोई ग्रह न हो, तो यह घर सोया हुआ कहलाएगा. इसलिए, आपको उसके मित्र ग्रह (दोस्त ग्रह) की चीज़ें अपने गले में डालनी चाहिए.
वर्ष फल (सालाना राशिफल) के अनुसार, जब आठवें घर का ग्रह दूसरे घर में आ जाए, तो वह साल आपके भाग्योदय (किस्मत चमकने) का साल होता है.
खाना (भाव) नंबर 8 - आठवां घर
यह घर मौत का घर है, लेकिन जब कभी नर ग्रह (सूर्य, मंगल, बृहस्पति) अकेले या एक साथ इस घर में आ जाते हैं, तब यह घर मौत का घर नहीं रहता.
इस घर में राहु और केतु के शत्रु ग्रहों का बल (ताकत) बढ़ जाता है. आप जादू-मंत्र, जिन्न-भूत के बारे में सोचना शुरू कर सकते हैं.
शनि भी बुरा करता है. यह आपके पूर्वजों की मृत्यु और आपको चोट लगा सकता है.
अगर शुक्र और बुध हों, तो उनसे संबंधित (जुड़ी हुई) चीज़ों का असर मंदा (खराब) होगा.
विशेष: चंद्रमा जैसा होगा, वैसा ही हाल इस घर का होता है.
खाना (भाव) नंबर 9 - नौवां घर
इस घर के ग्रह भाग्य के बुनियादी (मुख्य) ग्रह होते हैं. इस घर में तीसरे और पांचवें घर के ग्रहों का असर भी आ मिलता है. संतान उत्पत्ति (बच्चे पैदा होने) के बाद पांचवें घर का असर इस घर में अपने आप आ जाता है. तब पिता और पुत्र का मिला-जुला भाग्य 70-72 साल की उम्र तक फलता-फूलता है. इसी तरह, तीसरे घर का असर भाई की उत्पत्ति (भाई के जन्म) के बाद इस घर में आ मिलता है.
विशेष: इस घर का असर बृहस्पति की स्थिति (हालत) के अनुसार होगा.
आपकी 35 साल की उम्र के बाद, तीसरे और पांचवें घर का असर नौवें घर में आ जाता है.
अगर तीसरा और पांचवां घर खाली हो, तो आपके भाग्य की बुनियाद (नींव) केवल नौवां घर ही होगा. अगर नौवां घर भी खाली हो, तो बुनियाद ग्यारहवें घर के ग्रह होंगे.
वर्षफल (सालाना राशिफल) के अनुसार, जब पहले घरों के ग्रहों का पहला चक्र शुरू होगा, उस साल से नौवें घर का असर शुरू होगा - उदाहरण के लिए, बृहस्पति का 16 साल से 32 साल तक, सूर्य का 22 साल से 44 साल तक, आदि.
संक्षेप में (संक्षेप में कहें तो), नौवें घर के ग्रहों का चक्र जब अपनी अवधि (समय) के अनुसार शुरू होगा, तभी से वे अपना असर देना शुरू कर देंगे (शनि को छोड़कर). जो ग्रह यहां स्थित है, वह 60 साल की उम्र तक श्रेष्ठ (अच्छा) फल देता है. बृहस्पति और सूर्य का असर यहां बहुत अच्छा होता है. चंद्रमा और मंगल का असर भी यहां बहुत अच्छा होता है. शनि का असर भी श्रेष्ठ (अच्छा) होता है. केतु का भी श्रेष्ठ (अच्छा) होता है. राहु का ज़्यादा खराब नहीं होता. लेकिन सबसे ज़्यादा नीच (खराब) असर शुक्र और बुध का होता है.
उपाय: मंगलबद का उपाय (टोटका) ज़रूरी है. इस घर के ग्रहों का उपाय मकान के फर्श के रंग के माध्यम से भी हो सकता है.
खाना (भाव) नंबर 10 - दसवां घर
अगर यह घर नीच ग्रहों के कारण निकम्मा (कमज़ोर) हो रहा हो, तो वह कुंडली अंधे ग्रहों की कुंडली होगी. दूसरे अन्य घरों में शनि सहित, चाहे अन्य ग्रह कितने भी उच्च (ताकतवर) क्यों न पड़े हों, वे अंधों की तरह ही अपना फल देते हैं. शनि दसवें घर में इसका वर्णन किया गया है. पिता को विरासत, घर, संपत्ति, आध्यात्मिक शक्ति (धार्मिक शक्ति), चतुराई (होशियारी), लोहे, लकड़ी, पत्थर का काम इसी घर से देखते हैं. बुध, केतु, राहु यहां शक्की हालत (संदिग्ध स्थिति) के ग्रह होंगे.
अगर यह घर खाली हो, तो कुंडली सोये हुए ग्रहों की होगी. अगर दो आपस में दुश्मन ग्रह बैठे हों, तो कुंडली के सारे ग्रह बेकार हो जाते हैं, इसलिए एक को यहां से हटाना चाहिए. चंद्रमा इस घर का निर्णायक (फैसला करने वाला) होता है.
खाना (भाव) नंबर 11 - ग्यारहवां घर
अगर तीसरा घर मंदा (कमज़ोर) हो, तो बुध, बृहस्पति, चंद्रमा इस घर में पहले 35 साल के चक्र में अच्छे नहीं होते. इस घर में जो भी ग्रह होगा, उसका स्वभाव शनि जैसा ही होगा.
आय के स्रोत (पैसे कमाने का ज़रिया) का यहीं से पता चलता है. तीसरे, पांचवें, नौवें, ग्यारहवें घर में राहु/केतु, शनि के साथ हों, तो असर 11 गुना अच्छा या बुरा होता है.
अगर तीसरा घर खाली हो, तो यह घर सोया रहता है. तब तीसरे घर में इस घर के ग्रह के मित्र ग्रह (दोस्त ग्रह) को स्थापित (रखना) करें. मंगल को उच्च (ताकतवर) रखें, क्योंकि धन संबंधी (पैसे से जुड़ा) फैसला मंगल ने करना है.
मंदी हालत में (खराब स्थिति में) -
ग्यारहवें घर के ग्रहों के सहायक मित्रों (मददगार दोस्तों) का उपाय (टोटका) मदद करेगा, यह शर्त है कि पहले घर में वर्षफल (सालाना राशिफल) के अनुसार पापी ग्रह न आए हों.
अगर पहले घर में पापी ग्रह हों, तो नौवें घर में आए ग्रहों की चीज़ों से उपाय (टोटके) से मदद ली जा सकती है.
अगर नौवां घर खाली हो, तो बृहस्पति के उपाय (टोटके) से मदद ली जानी चाहिए.
खाना (भाव) नंबर 12 - बारहवां घर
जब भी आठवें घर का असर दूसरे घर में होगा, तब शनि का असर साथ माना जाएगा. इस घर के असर के बारे में एक लेखक ने कहा है,
“खुद इंसान की पेश न जावे; हुक्म विधाता होता है. सुख दौलत और सांस आखिरी; उम्र का फैसला होता है.”
आपकी कुंडली में शनि, बृहस्पति, राहु जैसे भी होंगे, वैसा ही असर इस घर का होगा. यह राहु और बृहस्पति का पक्का घर है.