बृहस्पति-चंद्रमा की युति: धन, संपत्ति और पारिवारिक सुख
बृहस्पति + चंद्र (बड़ का पेड़, न्याय विभाग)
दोनों ग्रहों का प्रभाव अच्छा होगा. जब दोनों ग्रहों को उनका शत्रु ग्रह (दुश्मन ग्रह) देखेगा, तो वह शत्रु ग्रह खुद ही खत्म हो सकता है. अगर पितृ ऋण (पूर्वजों का कर्ज) या मातृ ऋण (मां का कर्ज) है, तो माता-पिता का सुख कम ही मिलता है. संतान (बच्चे) और पत्नी का सुख भी थोड़ा कम ही हो सकता है (जैसा आप करेंगे, वैसा ही भरेंगे).
उपाय:
- अगर किसी वजह से दोनों ग्रहों का प्रभाव खराब हो रहा है, तो शुद्ध चांदी का खाली बर्तन अपने घर के कोने में दबाएं.
- बड़ का पेड़ किसी धार्मिक जगह पर लगाएं.
- किसी भी काम में सफलता के लिए, तांबे की गागर (बर्तन) में 4 किलो चना दाल और 4 किलो चावल डालकर, तांबे के ढक्कन को टांके (सोल्डर) से बंद करके पानी में बहा दें. लेकिन इस समय शनि 10वें भाव में न हो.
अगर ऐसे समय में बुध, शुक्र, राहु 2, 5, 9, 12वें भाव में हों, तो आपका भाग्य पिता के समान हो सकता है.
अगर 4वें भाव में राहु, केतु, शनि हों, तो जो माता पर गुजरा, वही पुत्री (बेटी) पर भी गुजर सकता है. आपको बड़ के पेड़ के समान सबको लाभ पहुंच सकता है. आप 24 वर्ष तक बिना रुकावट (बाधा) के शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं. बुढ़ापा आराम से गुजर सकता है और बीसवां वर्ष तीर्थ यात्रा में बीत सकता है.
जब दोनों ग्रह बुध से पहले के भावों में हों, तो बहुत अच्छा फल मिल सकता है.
जब दोनों ग्रह 7 से 12वें भाव तक हों और सूर्य, बुध 1 से 6वें भाव तक कहीं भी हों, तो सूर्य, बुध, मंगल से जुड़ी चीजें, उनसे संबंधित काम-धंधे और रिश्तेदार (पिता, बहन, बुआ, भाई, दोस्त) आदि पूरी सहायता कर सकते हैं.
जब उल्टा हो, यानी बृहस्पति + चंद्र 1 से 6वें भाव में हों और मित्र ग्रह 7 से 12वें भाव में हों, तो दोनों ग्रह अपना-अपना शुभ फल दे सकते हैं, लेकिन मित्र ग्रहों की सहायता की शर्त नहीं हो सकती.
पहला भाव (खाना नंबर 1) - दूसरे भाव का फल साथ मिल सकता है.
दूसरा भाव (खाना नंबर 2) - दोनों का प्रभाव बहुत अच्छा हो सकता है. आप हजारों-लाखों के मालिक हो सकते हैं, मां का पूरा सुख मिल सकता है, खेती की जमीन और पुश्तैनी (पुरानी) जायदाद (संपत्ति) में बढ़ोतरी हो सकती है.
तीसरा भाव (खाना नंबर 3) - आप खुशहाल और भाग्यवान हो सकते हैं, खुद लाभ कमा सकते हैं और भाइयों को भी लाभ दे सकते हैं.
चौथा भाव (खाना नंबर 4) - जन्म से ही धन का स्रोत (ज़रिया) निकल सकता है. चंद्र और बृहस्पति से जुड़ी चीजों और रिश्तेदारों (दादी, माता, पिता, बाबा) के सहयोग से धन में बढ़ोतरी हो सकती है.
पांचवां भाव (खाना नंबर 5) - दोनों में से सूर्य का प्रभाव यहां ज़्यादा हो सकता है. अच्छा फल मिल सकता है, तैयार माल के व्यापार (बिजनेस) में लाभ मिल सकता है. जब आप कलम के धनी (लेखक) हों, तो दूसरों का भी भला कर सकते हैं.
छठा भाव (खाना नंबर 6) - जैसा प्रभाव बुध और केतु का होगा, वैसा ही इन दोनों का भी हो सकता है.
उपाय:
- अस्पताल, श्मशान या कब्रिस्तान में कुआं या प्याऊ (पानी पिलाने का स्थान) लगवाना अच्छा प्रभाव दे सकता है.
सातवां भाव (खाना नंबर 7) - यहां दोनों का प्रभाव बेकार होता है. जब पहले भाव में इनका शत्रु ग्रह आए, तो माता-पिता दोनों को कष्ट (तकलीफ) हो सकती है. दलाली या व्यापार में लाभ हो सकता है.
आठवां भाव (खाना नंबर 8) - धन-संपत्ति चाहे कितनी भी हो, लेकिन भाई-बंधु (रिश्तेदार) दुश्मन बन सकते हैं. यदि एक भाई सहायक (मददगार) हो, तो दूसरा भाई दुश्मन हो सकता है.
नवां भाव (खाना नंबर 9) - पानी की बजाय दूध से पले पेड़ जैसा फल मिल सकता है, पैतृक (पुरखों का) सुख मिल सकता है. जब कभी वर्षफल (सालाना फल) के अनुसार ये दोनों 9वें भाव में आएं, उस वर्ष दबा या छिपा हुआ (गुप्त) धन मिल सकता है और हर तरह की रौनक (खुशहाली) बढ़ सकती है.
चंद्र से संबंधित चीजें (मां, दादी) हर तरह से सहायता कर सकती हैं. 20 वर्ष की तीर्थ यात्रा का फल उत्तम (बहुत अच्छा) हो सकता है.
दसवां भाव (खाना नंबर 10) - आप बहुत घमंडी और स्वार्थी (मतलबी), कम सोचने वाले, मूर्ख, बीमारियों के कारण खून की कमी वाले और उखड़े दिल वाले हो सकते हैं.
उपाय:
- नदी या दरिया (नदी) में तांबे का पैसा डालते रहना सहायता दे सकता है.
ग्यारहवां भाव (खाना नंबर 11) - दूसरों के लिए यहां ये दोनों ग्रह अच्छे हैं, लेकिन आपके लिए तीसरे भाव के ग्रह ही सहायक हो सकते हैं. यदि तीसरा भाव खाली हो, तो 11वें भाव के ग्रह बृहस्पति + चंद्र सोए हुए हो सकते हैं. 5वें भाव के ग्रह अपना कोई प्रभाव 11वें भाव में नहीं दे सकते.
उपाय:
- ऐसी स्थिति में बुध से लाभ प्राप्त किया जा सकता है, यानी कन्याओं (लड़कियों) का पूजन या देवी पूजा करनी ज़रूरी है. नदी में पैसा डालते रहें.
बारहवां भाव (खाना नंबर 12) - कन्या (बेटी) के जन्म के समय या कन्या के विवाह (शादी) के समय धन-संपत्ति की हालत खराब हो सकती है. पुत्र (बेटे) के जन्म से हालात अच्छे हो सकते हैं. हालांकि, आप राजा जैसे हो सकते हैं, लेकिन राजा जनक की तरह त्यागी (त्याग करने वाले).
खराब हालात (बृहस्पति 6, 7, 10, 11; चंद्र 6, 8, 10, 11, 12)
जब दोनों बुध के बाद के भावों में बैठे हों, तो बुध का प्रभाव खराब ही हो सकता है.
दोनों खराब भावों में बैठे हों, तो चाहे आप कितने भी मेहनती क्यों न हों, भाग्य की बदकिस्मती (बदनसीबी) से रोते ही रह सकते हैं.
बृहस्पति, चंद्र जब 1-7, 4-10 दृष्टि से आमने-सामने हों, तो जब भी घर में शनि, शुक्र और बुध की चीजें लाई जाएं, उदाहरण के लिए मकान बना लिया जाए, मशीनरी खरीद ली जाए, विवाह हो जाए, बुध का सामान जैसे रोगन (पेंट), हरे पर्दे, साजो-सामान घर में लाया जाए, तो माता-पिता पर मृत्यु का साया मंडराता रह सकता है. पहले के भावों और बाद के भावों के ग्रहों के रिश्तेदार भी कष्ट में हो सकते हैं.
उपाय:
- इन दोनों का प्रभाव ठीक करने के लिए केतु की चीजों (तिल, इमली) को जमीन में दबाएं या केतु का दो रंगा पत्थर होलदारी चांदी में मढ़कर (जड़कर) धारण करें (पहनें).
- लहसुनिया (केतु का रत्न) सोने में धारण करें.
जब शनि खराब हो, तो आप नास्तिक (भगवान को न मानने वाले) और बर्बाद हो सकते हैं.
दूसरा भाव (खाना नंबर 2) - दोनों ग्रह और उन पर राहु व बुध का असर पड़ रहा हो (जब दोनों दूसरे भाव में और बुध छठे भाव में हो, तो नज़र कमजोर हो सकती है, बुढ़ापे में हालत खराब हो सकती है (कम से कम 9 वर्ष तक), तो हर तरफ से निराशा और खराबियां मिल सकती हैं. यदि आप साली (पत्नी की बहन) का साथ करें, तो बिलकुल ही बर्बाद हो सकते हैं.
तीसरा भाव (खाना नंबर 3) - जब दोनों ग्रहों से बुध का संबंध हो जाए, तो तीनों का असर बेकार हो सकता है. बुध (पुत्री, साली, बहन) या बुध की चीजें (हरे पर्दे, कपड़े, तोता, बकरी) खराब फल दे सकती हैं.
छठा भाव (खाना नंबर 6) - दोनों के इस भाव में होने पर, यदि आप नल या कुआं खुदवा लें, तो आप और जो उस कुएं से लाभ उठाता है, दोनों बर्बाद हो सकते हैं.
सातवां भाव (खाना नंबर 7) - बचपन कष्ट में बीत सकता है, 6, 12, 24 वर्ष की आयु में माता-पिता दोनों दुखी हो सकते हैं. विवाह के बाद और कन्या के जन्म से धन-संपत्ति आनी शुरू हो सकती है.
आठवां भाव (खाना नंबर 8) - माता के घर (नानकों) से शनि की और मंगल की चीजें न लाएं. यदि आप लाएंगे (मुफ्त में), तो बर्बाद हो सकते हैं.
नवां भाव (खाना नंबर 9) - यदि आप लड़की का धन खाएं या दान पर गुजारा करें, तो चंद्र और बृहस्पति दोनों बर्बाद हो सकते हैं.
दसवां भाव (खाना नंबर 10) - बेशक माता-पिता के पास सोने-चांदी की ईंटें क्यों न हों, वर्षफल में दोबारा यहां आने पर सब कुछ बर्बाद हो सकता है.
ग्यारहवां भाव (खाना नंबर 11) - बुध, शुक्र, राहु तीसरे भाव में हों, तो दोनों ग्रह बर्बाद हो सकते हैं. बृहस्पति की आयु 16 वर्ष और चंद्र की 12 (24) वर्ष हो सकती है. तीसरे भाव के ग्रह की अपेक्षा आपके माता-पिता दुखी हो सकते हैं.
उपाय:
- बुध (लड़की, बहन, बुआ, मौसी), शुक्र (गाय, स्त्री या धन), राहु (नाना, नानी) को पालना और भंगी (सफाईकर्मी) को दान देना सहायक हो सकता है.
बारहवां भाव (खाना नंबर 12) - शुक्र (आपकी शादी) और बुध (कन्या का जन्म) का साथ होने पर धन-संपत्ति बर्बाद हो सकती है.