बृहस्पति-सूर्य की युति: शाही धन और संतान का सुख
दो ग्रह (एक साथ)
जब दो ग्रह एक ही घर में हों, या
- वे एक-दूसरे को 1-7, 4-10, या 5-9 के हिसाब से देखते हों (दृष्टि),
- या वे 8-2, 8-12, 2-12, 6-12 घरों में बैठे हों और एक-दूसरे से मिल रहे हों।
बृहस्पति + सूर्य (शाही धन-दौलत)
बृहस्पति को आपका पिता और सूर्य को आपका बेटा माना गया है। इसका मतलब है कि आपके भाग्य से आपके पिता और आपकी संतान (बच्चे) को भी फायदा हो सकता है। बृहस्पति और सूर्य मिलकर चंद्रमा बनाते हैं। चंद्रमा (मोती + चांदी) का मतलब है कि आपका भाग्य मोती जैसा चमकदार हो सकता है। अगर ये दोनों ग्रह मिलकर किसी ऊँचे घर में बैठे हों, तो वे किस्मत की लिखी हुई बात को भी बदल सकते हैं।
खास बात: लेकिन अगर इनके साथ बुध भी आ जाए, तो ये दोनों ग्रह (बृहस्पति और सूर्य) कैदी (बँधे हुए) हो सकते हैं।
अगर शुक्र इन दोनों ग्रहों के बाद के घरों में हो, तो संतान (बच्चे) बढ़ सकती है और आपको सरकारी कामों में सम्मान (इज़्ज़त) मिल सकता है।
जब घर के हिसाब से सूर्य का असर अच्छा हो रहा हो, तो आपका स्वास्थ्य (सेहत) अच्छा रह सकता है, भविष्य बेहतर हो सकता है, और आपको इन दोनों ग्रहों से जुड़ी चीज़ों के कारोबार (व्यापार) से और रिश्तेदारों से धन (पैसा) मिल सकता है।
जब दोनों ग्रह चंद्रमा को देखते हों, तो धन-संपत्ति अपने आप आ सकती है, सरकारी कामों में मान-सम्मान मिल सकता है, और दूसरों के साथ मिलकर काम करने पर आपका भाग्य खुल सकता है।
दोनों ग्रह पहले घर में हों तो:
- आप राजा की तरह दूसरों से कर (टैक्स) वसूल कर सकते हैं।
- आपकी उम्र लंबी हो सकती है, लेकिन मृत्यु अचानक हो सकती है।
- आपको दुनिया के सभी आराम मिल सकते हैं (भले ही आप मिट्टी के माधो (सीधे-सादे) ही क्यों न हों)।
- आप हाथ के काम में कारीगर (हुनरमंद) हो सकते हैं।
दूसरे घर में हों तो:
- आपका घर सुंदर हो सकता है।
- आपका जीवन शानदार हो सकता है।
- आप बेधड़क (निडर) पर निर्दयी (कठोर) हो सकते हैं।
तीसरे घर में हों तो:
- अगर आप लालची न हों, तो आपको खूब धन-संपत्ति मिल सकती है।
जब दोनों ग्रह चौथे घर में हों तो:
- आपको शनि से जुड़ी चीज़ों के कारोबार से या शनि से जुड़े रिश्तेदारों से धन मिल सकता है।
- आप अच्छे जीवन के मालिक हो सकते हैं।
पांचवें घर में हों और चंद्रमा चौथे घर में हो तो:
- बेटे के जन्म के बाद आप और भी ज़्यादा भाग्यवान (किस्मत वाले) हो सकते हैं।
- आपको परमार्थ (दूसरों की भलाई) से धन मिल सकता है।
जब दोनों ग्रह 6, 7, 10, 11 घरों में हों तो:
- इन दोनों ग्रहों का अच्छा या बुरा असर (अलग-अलग ग्रहों का और दोनों का एक साथ) बुढ़ापे में, यानी जवानी बीत जाने के बाद हो सकता है।
जब दोनों आठवें घर में हों तो:
- आपका भाग्य जाग सकता है।
- आपकी मृत्यु से बचाव हो सकता है।
जब दोनों ग्रह 9, 12 घरों में हों तो:
- इन दोनों ग्रहों का प्रभाव आपके कुल (परिवार) की उन्नति (तरक्की) और हर तरह की बढ़ोतरी दे सकता है, यानी घर में संपत्ति और परिवार बढ़ता ही रह सकता है।
खराब हालात (जब बृहस्पति 6, 7, 10, 11 में हो और सूर्य 6, 7, 10 में हो)
जब शुक्र इन घरों से पहले के घरों में हो तो:
- दोनों ग्रहों का असर मंदा (खराब) हो सकता है।
- आपको धन-संपत्ति की कमी और अपमान (बेइज्ज़ती) का डर बना रह सकता है।
जब दोनों पर शनि की दृष्टि (नज़र) हो, या दोनों चौथे घर में हों, या शनि दसवें घर में हो तो:
- दोनों का फल सोया हुआ (बेअसर) हो सकता है।
- केतु की महादशा (7 साल तक) में संतान (बच्चों) के ननिहाल (नाना-नानी का घर) का हाल खराब ही हो सकता है।
- सरकारी पक्ष (सरकार से संबंध) कमजोर रह सकता है।
- अगर शनि शुभ हो, तो कुछ अच्छा हो सकता है, वरना बुरा असर कर सकता है।
जब दोनों ऐसे घरों में हों जहाँ सूर्य का असर मंदा (खराब) हो:
- आप भाग्य के मारे हुए (बदकिस्मत) हो सकते हैं।
- हर काम में कष्ट (परेशानी) और असफलता (नाकामी) मिल सकती है।
- आपका जीवन दुखों से भरा हो सकता है।
यदि दोनों तीसरे घर में हों तो:
- आपको लालच छोड़ना पड़ सकता है।
- अगर आप लालची होंगे, तो लाखों की संपत्ति के मालिक होते हुए भी बर्बाद हो सकते हैं और अपने कुल (परिवार) को भी बर्बाद कर सकते हैं।
उपाय (समाधान):
- बेटे के पैदा होने पर या पिता-पुत्र के एक साथ रहने पर खराब हालत ठीक हो सकती है।
- मुफ्त का माल लेना दोनों के अच्छे असर को नीचा (खराब) कर सकता है।
- बाप-बेटे के अलग हो जाने की हालत में बेटा अपने बाप की इस्तेमाल की हुई पुरानी चारपाई (पलंग) इस्तेमाल करता रहे।
- शुद्ध सोना या केसर (बृहस्पति की चीज़ें) घर में रखें।