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केतु · 115

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बृहस्पति-केतु तीसरे भाव में: ज्ञान, यात्रा और संतान

तीसरे भाव में बृहस्पति और केतु का मेल आपको बुद्धिमान बनाता है और यात्रा से लाभ देता है, पर संतान और परिवार से जुड़ी चुनौतियाँ भी आ सकती हैं।

शुक्र-केतु दूसरे भाव में: धन, कला और पारिवारिक जीवन

शुक्र और केतु की युति दूसरे भाव में आपको धनी, कलात्मक बना सकती है, लेकिन संतान और वैवाहिक जीवन में चुनौतियां दे सकती है।

सूर्य-केतु दूसरे भाव में: मान-सम्मान और स्वास्थ्य

सूर्य और केतु का दूसरे भाव में होना समाज में मान-सम्मान दिलाता है, लेकिन संतान और स्वास्थ्य संबंधी कुछ परेशानियां भी दे सकता है।

चंद्रमा-केतु दूसरे भाव में: पारिवारिक सुख और गूढ़ विद्याओं में रुचि

चंद्रमा और केतु की युति दूसरे भाव में आपको पारिवारिक सुख देती है और गूढ़ विद्याओं में आपकी रुचि बढ़ाती है।

बुध-केतु दूसरे भाव में: धन, ज्ञान और राजसी सुख

दूसरे भाव में बुध और केतु की युति आपको धनवान, बुद्धिमान और राजसी सुखों का भोगी बना सकती है, पर कुछ स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ भी संभव हैं।

मंगल-केतु दूसरे भाव में: परिवार, धन और संबंध

मंगल और केतु का दूसरे भाव में होना परिवार, धन और संबंधों को प्रभावित करता है। इसके अच्छे और बुरे दोनों तरह के प्रभाव हो सकते हैं।

बृहस्पति-केतु दूसरे भाव में: शुभ-अशुभ प्रभाव और उपाय

बृहस्पति और केतु का दूसरे भाव में होना शुभ और अशुभ दोनों तरह के प्रभाव दे सकता है, खासकर आठवें भाव की स्थिति पर निर्भर करता है।

सूर्य-केतु पहले भाव में: सरकारी संबंध और यात्रा से लाभ

सूर्य और केतु का पहले भाव में होना सरकारी अधिकारियों से अच्छे संबंध और यात्राओं से लाभ दिला सकता है, लेकिन स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में चुनौतियाँ आ सकती हैं।

चंद्रमा-केतु पहले भाव में: तरक्की, भाग्य और स्वास्थ्य

पहले भाव में चंद्रमा और केतु की युति आपको करियर में तरक्की और भाग्य का साथ दिला सकती है, लेकिन स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में चुनौतियां भी दे सकती है।

बुध-केतु पहले भाव में: शिक्षा, यात्रा और मिश्रित परिणाम

बुध और केतु की पहले भाव में युति आपको शिक्षित, उच्च पद वाला और यात्राओं से लाभ देने वाला बना सकती है, लेकिन कुछ स्वास्थ्य और पारिवारिक चुनौतियाँ भी दे सकती है।

मंगल-केतु पहले भाव में: करियर, धन और संतान पर प्रभाव

पहले भाव में मंगल और केतु की युति करियर में तरक्की, धन लाभ और संतान सुख पर असर डाल सकती है। जानिए इसके शुभ-अशुभ प्रभाव।

बृहस्पति-केतु पहले भाव में: साधु जैसा व्यक्तित्व और शिक्षा में बाधाएं

पहले भाव में बृहस्पति और केतु का योग आपको धार्मिक और चट्टान जैसा मज़बूत बनाता है, लेकिन शिक्षा में बाधाएं और confusing विचार दे सकता है।

शुक्र-शनि-केतु की युति: नशा, बदनामी और जीवन की असंतुष्टि

शुक्र, शनि और केतु की युति आपको नशे, पार्टियों और लापरवाह हरकतों की ओर ले जा सकती है, जिससे बदनामी और जीवन में असंतोष हो सकता है।