शुक्र-बुध-केतु की युति: वैवाहिक जीवन और संतान पर प्रभाव
सातवें भाव में ग्रहों का होना जीवनसाथी, शादी और बच्चों को लेकर चिंताएं और नकारात्मक (नुकसानदायक) प्रभाव दे सकता है। ग्रहों का असर आपके जीवन पर उसी के हिसाब से हो सकता है।
सातवें भाव में ग्रहों का होना जीवनसाथी, शादी और बच्चों को लेकर चिंताएं और नकारात्मक (नुकसानदायक) प्रभाव दे सकता है। ग्रहों का असर आपके जीवन पर उसी के हिसाब से हो सकता है।
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यदि सूर्य के साथ शनि, शुक्र, केतु और चंद्रमा एक साथ हों तो पत्नी, संतान और मां को समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
लाल किताब के अनुसार विभिन्न ग्रहों के योग से धन, नौकरी, परिवार और रिश्तों पर क्या प्रभाव पड़ते हैं, जानिए इस लेख में।
सातवें भाव में बुध और केतु की युति व्यापार में लाभ, विदेश में विवाह और परिवार के लिए भाग्यशाली हो सकती है, लेकिन गलत सोच और वैवाहिक जीवन में परेशानी भी दे सकती है।
चंद्रमा, शुक्र और बुध की युति लंबी उम्र दे सकती है, लेकिन शादी और बच्चों को लेकर चुनौतियाँ आ सकती हैं। 34 साल के बाद शादी शुभ हो सकती है।
सूर्य, शुक्र और बुध की युति का वैवाहिक जीवन, संतान प्राप्ति और परिवार पर क्या असर होता है, और इसके उपाय क्या हैं, जानें।
शुक्र, बुध और राहु की युति से कई विवाह हो सकते हैं, लेकिन संतान सुख की कमी रहेगी।
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