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सूर्य-चंद्रमा-केतु की युति: नींद और मन की शांति का अभाव

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जब केतु का उलटा (वक्री) असर आता है, तो न नींद आती है और न मन को शांति मिलती है।

  • पैसा शायद काफी हो या उससे ज़्यादा भी हो, लेकिन दुख खत्म नहीं होता। अच्छी से अच्छी समझदारी (बुद्धिमत्ता) भी काम नहीं आती। आपकी उम्र लंबी हो सकती है, लेकिन आप हमेशा एक शक वाली सोच में रहते हैं।

अच्छा उपाय: देवी की पूजा करें या कुंवारी कन्याओं को अच्छे से भोजन कराएं।

तीसरे भाव में केतु होने से यह फल मिलते हैं: ऊँचे (उच्च) सूर्य का अच्छा फल मिलता है; चंद्रमा (माँ) और केतु (बेटा) की स्थिति अच्छी नहीं होती; बच्चों के लिए यह अच्छा नहीं होता, हालांकि वंश (परिवार) चलता रहता है।

क्या करना चाहिए: परिवार की भलाई के लिए, बुध के उपाय करें।

अलग-अलग ग्रहों के असर वैसे ही लागू होते हैं जैसे वे संबंधित होते हैं।

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