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उपाय · 233

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शुक्र-केतु ग्यारहवें भाव में: संपत्ति, प्रसिद्धि और विलंब से संतान

शुक्र और केतु की युति ग्यारहवें भाव में संपत्ति, सरकारी महकमों में प्रसिद्धि और लंबी यात्राओं से लाभ दे सकती है, लेकिन संतान और धन के खर्च को लेकर चिंताएं भी हो सकती हैं।

चंद्रमा-राहु ग्यारहवें भाव में: माँ का सुख, धन लाभ और संतान की चिंता

ग्यारहवें भाव में चंद्रमा और राहु का मेल माँ और बच्चों से सुख, धन लाभ और कानूनी जीत दिला सकता है, लेकिन संतान प्राप्ति में देरी और आर्थिक समस्याएँ भी दे सकता है।

बुध-राहु ग्यारहवें भाव में: तलाक, विधवा योग और आर्थिक नुकसान

बुध और राहु के ग्यारहवें भाव में होने से बेटी या बहन का तलाक या विधवा होने का खतरा रहता है। आर्थिक नुकसान, आंखों की समस्या और बच्चों की चिंता भी हो सकती है।

बृहस्पति-शुक्र ग्यारहवें भाव में: धन, प्रसिद्धि और वैवाहिक जीवन

जानें बृहस्पति और शुक्र के ग्यारहवें भाव में होने से धन, प्रसिद्धि और वैवाहिक जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है।

बृहस्पति-चंद्रमा ग्यारहवें भाव में: रिश्तेदार और उपाय

जानें ग्यारहवें भाव में बृहस्पति और चंद्रमा का प्रभाव आपके रिश्तेदारों पर और इससे जुड़ी समस्याओं के उपाय।

बृहस्पति-केतु ग्यारहवें भाव में: संपत्ति, सम्मान और संतान

बृहस्पति और केतु का ग्यारहवें भाव में होना आपको संपत्ति, सरकारी सम्मान और यात्रा से लाभ दिला सकता है। संतान देर से हो सकती है।

मंगल-शनि दसवें भाव में: धन, प्रसिद्धि और पारिवारिक सुख

मंगल और शनि का दसवें भाव में होना आपको खूब धन और नाम-शोहरत दिलाता है, लेकिन 42 साल के बाद ही शुभ समय शुरू होता है। नशे से बचें और सांपों का सम्मान करें।

बृहस्पति-शनि दसवें भाव में: बुद्धिमान, पर पिता और परिवार के लिए बुरा

बृहस्पति और शनि का दसवें भाव में होना आपको बुद्धिमान बना सकता है, लेकिन यह आपके पिता और परिवार के लिए शुभ नहीं हो सकता है।

शुक्र-मंगल नौवें भाव में: धन, भाग्य और प्रेम विवाह

नौवें भाव में शुक्र और मंगल की युति धन वृद्धि, सरकारी नौकरी, प्रेम विवाह और पत्नी के अच्छे स्वास्थ्य से जुड़ी है। उपाय के लिए चांदी की चूड़ी पहनें।

सूर्य-बुध नौवें भाव में: सरकारी काम और शिक्षा में प्रगति

सूर्य और बुध की नौवें भाव में युति सरकारी काम और शिक्षा में प्रगति ला सकती है। बेटी से अच्छे परिणाम मिल सकते हैं, लेकिन बेटे के जन्म में देरी संभव है।

सूर्य-केतु नौवें भाव में: करियर में तरक्की और धार्मिक गतिविधियां

नौवें भाव में सूर्य और केतु की युति करियर में तरक्की, धार्मिक गतिविधियों में भागीदारी और लंबी उम्र देती है।

बुध-राहु नवम भाव में: धर्म, यात्रा और संतान पर प्रभाव

बुध और राहु का नवम भाव में होना व्यक्ति को धार्मिक और यात्रा प्रेमी बना सकता है, लेकिन संतान और धन संबंधी चुनौतियां भी ला सकता है।

बुध-केतु नौवें भाव में: पिता की सेवा और धार्मिक यात्राएँ

बुध और केतु नौवें भाव में पिता की सेवा, धार्मिक रुचि और उच्च पद दिला सकते हैं, लेकिन अदालती मामलों और बच्चों से जुड़ी परेशानियाँ भी दे सकते हैं।