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संतान · 252

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चंद्रमा-शुक्र दसवें भाव में: विवाह के बाद लाभ और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं

विवाह के बाद 12 साल तक लगातार मुनाफा और धार्मिक प्रवृत्ति हो सकती है, लेकिन माँ और बच्चों के लिए चिंताएं और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी संभव हैं।

चंद्रमा-केतु दसवें भाव में: परिवार का कल्याण और पेशेवर बदलाव

चंद्रमा और केतु की दसवें भाव में युति परिवार के लिए कल्याणकारी होती है, पेशेवर बदलाव लाती है और सामाजिक सेवा की ओर झुकाव देती है।

बृहस्पति-मंगल दसवें भाव में: पिता से संबंध और बच्चों से सुख

बृहस्पति और मंगल का दसवें भाव में होना आपके भाग्य को प्रभावित करता है, खासकर पिता और बच्चों से संबंधित मामलों में।

शुक्र-शनि नौवें भाव में: आपसी सुख और धन की बढ़ोतरी

शादी के बाद महिला का रुतबा थोड़ा कम हो सकता है, लेकिन पति-पत्नी को बहुत अच्छे परिणाम मिल सकते हैं. आपसी सुख और धन की खूब बढ़ोतरी हो सकती है.

शुक्र-राहु नवम भाव में: पैतृक संपत्ति, प्रेम विवाह और दुर्भाग्य

नवम भाव में शुक्र और राहु का संयोग पैतृक संपत्ति में वृद्धि, प्रेम विवाह और धार्मिक यात्राएं देता है, लेकिन बच्चों की चिंताएं और दुर्भाग्य भी ला सकता है।

सूर्य-शुक्र नौवें भाव में: धन, भाग्य और सरकारी लाभ

सूर्य और शुक्र की नौवें भाव में युति पैतृक संपत्ति, सरकारी लाभ और धार्मिक यात्राओं का संकेत देती है, लेकिन बच्चों को लेकर चिंता और गरीबी का भी सामना करना पड़ सकता है।

सूर्य-शनि नौवें भाव में: धन, बच्चे और दुर्भाग्य

नौवें भाव में सूर्य और शनि की युति आपको अमीर बना सकती है, पर बच्चों और पिता के लिए अशुभ हो सकती है, साथ ही व्यापार में भी नुकसान दे सकती है।

सूर्य-बुध नौवें भाव में: सरकारी काम और शिक्षा में प्रगति

सूर्य और बुध की नौवें भाव में युति सरकारी काम और शिक्षा में प्रगति ला सकती है। बेटी से अच्छे परिणाम मिल सकते हैं, लेकिन बेटे के जन्म में देरी संभव है।

सूर्य-केतु नौवें भाव में: करियर में तरक्की और धार्मिक गतिविधियां

नौवें भाव में सूर्य और केतु की युति करियर में तरक्की, धार्मिक गतिविधियों में भागीदारी और लंबी उम्र देती है।

शनि-राहु नौवें भाव में: धन, प्रसिद्धि और संतान संबंधी चुनौतियाँ

शनि और राहु की नौवें भाव में युति आपको धन और प्रसिद्धि दिला सकती है, लेकिन संतान संबंधी और पारिवारिक चुनौतियाँ भी पैदा कर सकती है।

चंद्रमा-शुक्र नौवें भाव में: पैतृक संपत्ति, प्रेम विवाह और धार्मिक यात्रा

नौवें भाव में चंद्रमा और शुक्र की युति से पैतृक संपत्ति, प्रेम विवाह और धार्मिक यात्राओं का योग बनता है। हालांकि, संतान संबंधी चिंताएं और कुछ मामलों में दुर्भाग्य भी संभव है।

चंद्रमा-केतु नौवें भाव में: अच्छी तरक्की और विदेश यात्रा

नौवें भाव में चंद्रमा और केतु की युति करियर में अच्छी तरक्की देती है. आप विदेश यात्राएं कर सकते हैं और सामाजिक-धार्मिक कार्यों में रुचि रखते हैं.

बुध-राहु नवम भाव में: धर्म, यात्रा और संतान पर प्रभाव

बुध और राहु का नवम भाव में होना व्यक्ति को धार्मिक और यात्रा प्रेमी बना सकता है, लेकिन संतान और धन संबंधी चुनौतियां भी ला सकता है।

बुध-केतु नौवें भाव में: पिता की सेवा और धार्मिक यात्राएँ

बुध और केतु नौवें भाव में पिता की सेवा, धार्मिक रुचि और उच्च पद दिला सकते हैं, लेकिन अदालती मामलों और बच्चों से जुड़ी परेशानियाँ भी दे सकते हैं।