बृहस्पति-मंगल दसवें भाव में: पिता से संबंध और बच्चों से सुख
अच्छाई का रास्ता: इस कुंडली में भाग्य 4वें और 6वें भाव (घर) में ग्रहों की स्थिति (ऊँचे या वक्री) से तय होता है। अगर ये ग्रह शुभ (अच्छे) हैं, तो अच्छाई मिलेगी और अगर ये अशुभ (बुरे) हैं, तो आपको बुरे नतीजे मिल सकते हैं। इसलिए, आपको उसी हिसाब से उपाय सोचने और करने चाहिए।
- अगर ये भाव (4वां और 6वां) खाली हैं, तो यह आपके लिए बहुत बुरा हो सकता है। यह ऐसा होगा जैसे कोई बेकार खजाना हो, जिसका कोई फायदा न हो।
बुराई के रास्ते: बुराई उन दो ग्रहों के बुरे नतीजों के रूप में सामने आती है जो उस भाव में अकेले बैठे होते हैं। मुख्य रूप से, ये बातें हो सकती हैं:
- पिता से दूरी आपकी तरक्की और अच्छाई में रुकावट डालती है, भले ही आप अपने पिता के लिए अशुभ (बुरे) हों। आप जिससे भी संबंध रखते हैं, वह आपको नुकसान पहुंचा सकता है।
- दूसरों के साथ अच्छा करने पर भी आपको उनसे बुरे नतीजे मिल सकते हैं।
- आप हवाई किले बनाते हैं (बड़े-बड़े सपने देखते हैं)। लेकिन अगर आप ईमानदारी से भी जीते हैं, तब भी आपकी इच्छाएं पूरी नहीं होती हैं।
- आपका सोना गुम हो जाता है; बिना किसी गलती के आपको बदनामी मिलती है; अधिकारियों के साथ मतभेद होते हैं।
- बच्चों से आपको कम या देर से सुख मिल सकता है।