बृहस्पति विभिन्न भावों में: प्रेम, न्याय और आध्यात्मिकता
बृहस्पति (गुरु) संतान पैदा करने का स्वामी (मालिक) है।
- अगर बृहस्पति शुक्र के साथ दूसरे भाव में हो, तो इसे गुरु घंटाल योग कहते हैं। आप इश्क़ (प्यार) में डूबे रह सकते हैं।
- अगर बृहस्पति मंगल के साथ तीसरे भाव में हो, तो आप न्यायप्रिय (न्याय पसंद करने वाले) हो सकते हैं।
- अगर बृहस्पति चंद्र के साथ चौथे भाव में हो, तो आप हमदर्द (दूसरों का दर्द समझने वाले) हो सकते हैं।
- अगर बृहस्पति सूर्य के साथ पांचवें भाव में हो, तो यह पत्थर में मोती जैसा योग है।
- अगर बृहस्पति बुध के साथ छठे भाव में हो, तो आपको फोकी उम्मीदें (झूठी आशाएं) हो सकती हैं और तबाही (बर्बादी) हो सकती है।
- अगर बृहस्पति अपने घर यानी नौवें भाव में हो, तो आप आध्यात्मिक शक्ति वाले (धार्मिक और शक्तिशाली) हो सकते हैं।
- अगर बृहस्पति चंद्र के साथ ग्यारहवें भाव में हो, तो आपको अतीत की स्मृति (पुरानी बातें याद) रह सकती हैं।
- अगर बृहस्पति राहु के साथ बारहवें भाव में हो, तो आप राजदार (राज जानने वाले) और विश्वस्त (भरोसेमंद) हो सकते हैं।