बृहस्पति-शनि की युति: धन और लंबी आयु
बृहस्पति + शनि (एक ऐसे संन्यासी फकीर की माया जिसका भेद (राज) न खुल सके)
आपके भाग्य का फैसला 11वें घर (भाव) के ग्रहों से हो सकता है. अगर 11वां घर खाली हो, तो शनि की स्थिति के हिसाब से फैसला हो सकता है. आपकी 34 साल की उम्र तक पिता का साथ रह सकता है और 43 साल की उम्र तक धन-संपत्ति के लिए दोनों ग्रहों का असर बना रह सकता है.
खास बात: जब शनि खराब घरों में हो और बृहस्पति अच्छे घरों में हो, तो आप दूसरों के लिए पारस मणि (छूने से लोहा सोना बनाने वाली चीज़) का काम कर सकते हैं. आप उन्हें मालामाल (बहुत अमीर) कर सकते हैं, चाहे आप खुद कितने ही परेशान (तंग) क्यों न रहें.
इसके उलट (उल्टा), जब बृहस्पति खराब हो और शनि मजबूत (कायम) हो, तो सारे संसार की बुरी हवा (कष्ट) दूर हो सकती है.
जब दोनों ग्रह अच्छे हों, तो उनका असर बहुत अच्छा और नतीजे भी ठीक हो सकते हैं.
जब सूर्य पहले घर में हो और:
- शनि अच्छा + बृहस्पति नीच (कमजोर) हो, तो शरीर का कोई अंग और संपत्ति बर्बाद (नष्ट) हो सकती है.
- शनि नीच (कमजोर) + बृहस्पति श्रेष्ठ (अच्छा) हो, तो धन बेशक (भले ही) बर्बाद (नष्ट) हो जाए, शरीर ठीक रह सकता है.
- जो ग्रह इन दोनों को देख रहे होंगे, वे अपनी अवधि (समय) (सूर्य 22, चंद्र 24, मंगल 28) में इन दोनों ग्रहों को जगा सकते हैं, ताकि ये अपना असर दे सकें. यदि आप ईश्वर भक्त, संतुष्ट (खुश) और कृतज्ञ (आभारी) हों, तो नीच (कमजोर) घरों में बैठा ग्रह भी अपना बुरा असर नहीं डालता, बल्कि आप सोच-विचार वाले हो सकते हैं, आपका जीवन तरक्कीशील (उन्नतिशील) हो सकता है और आप स्वाभिमानी हो सकते हैं. आप ईर्ष्या (जलन) से दूर ही रह सकते हैं.
खास बात: यदि दोनों ग्रहों को शुक्र देख रहा हो, तो आपका धन केवल दिखावा ही हो सकता है (जैसे मिट्टी का पहाड़). पैतृक (पुरखों से मिला) धन आपकी पत्नी के घर में आने के बाद बढ़ने लग सकता है.
पहले घर में: आप साधु या गुरु जैसे हो सकते हैं.
दूसरे घर में: आप शिक्षित (पढ़े-लिखे) हो सकते हैं, स्वास्थ्य (सेहत) ठीक रह सकती है, उच्च (अच्छा) चंद्र का फल साथ मिल सकता है.
तीसरे घर में: आपका जीवन साधारण (सामान्य) हो सकता है, बुढ़ापे में आराम मिल सकता है.
चौथे घर में: आप प्रसिद्ध (मशहूर) हो सकते हैं, स्वास्थ्य (सेहत) ठीक रह सकती है.
पांचवें घर में: आपका भाग्य साधारण (सामान्य) हो सकता है, मान-सम्मान मिल सकता है, लेकिन कर्म, धर्म या बृहस्पति के कारोबार (व्यापार) झगड़े खड़े कर सकते हैं. हालांकि, फैसला आपके पक्ष (फेवर) में ही हो सकता है, बशर्ते (शर्त यह है कि) आप शनि के बुरे कामों जैसे शराब, मांस और पराई स्त्री से दूर रहें.
छठे घर में: आपको स्त्री सुख पूरा मिल सकता है, दूसरे घर में राहु-केतु हो.
सातवें घर में: यदि शुक्र और चंद्र मजबूत (कायम) हों, तो शनि के काम और रिश्तेदार अच्छे फल दे सकते हैं, धन बढ़ सकता है. मंगल मजबूत (कायम) हो, तो आप बड़े परिवार वाले हो सकते हैं, नौ भाई और दो बहनें, या सात भाई और तीन बहनें हो सकती हैं. उनके विवाह 16-25 साल की उम्र के बीच हो सकते हैं. उनकी संतानें भी जल्दी-जल्दी हो सकती हैं. पुरुषों की संख्या अच्छी हो सकती है. यदि वे कहीं बाहर गए हुए हों, तो खाना खाने के समय उतने ही पुरुष मेहमान के रूप में आ सकते हैं.
यदि बृहस्पति मजबूत (कायम) हो, तो माता की आयु (उम्र) लंबी हो सकती है. 25 साल के बाद संतान जल्दी नहीं हो सकती.
यदि मंगल मजबूत (कायम) हो, तो जब मंगल छठे या 12वें घर में हो, तो आप धनवान (अमीर) हो सकते हैं, लेकिन वह धन लूट-खसोट का ही हो सकता है. नौवें घर का दिया असर साथ मिल सकता है.
आठवें घर में: आपकी आयु लंबी (दीर्घायु) हो सकती है, लेकिन धन कम हो सकता है, परिवार बढ़ सकता है.
नौवें घर में: परिवार बड़ा हो सकता है, आप खुद तर सकते हैं और दूसरों को भी तार सकते हैं, धनी (अमीर) हो सकते हैं. धन केवल आँखों की होशियारी से कमा सकते हैं, केवल पैसे से प्यार करने वाले हो सकते हैं, चाहे वह ठगी (धोखे) से मिले या फरेब (बेईमानी) से. मगरमच्छ की तरह छोटों को खाकर खुद बढ़ने वाले हो सकते हैं.
दसवें घर में: अपने लिए बहुत अच्छा हो सकता है.
ग्यारहवें घर में: इस घर में दोनों ग्रह बुध से चलते हैं. यदि बुध कमजोर (मंदा) हो, तो दोनों का असर कमजोर (मंदा) हो सकता है. भाग्य का फैसला चौथे या तीसरे घर के ग्रहों से हो सकता है. यदि तीसरा घर खाली हो, तो शनि का ही 11वें घर का फल मिल सकता है.
खास बात: ऐसे आपकी दोस्ती से दूसरों को ज़्यादा फायदा हो सकता है.
बारहवें घर में: 28वें साल से तरक्की हो सकती है, परिवार बढ़ सकता है. जब छठे घर का शत्रु पहले घर में आएगा, तो धन की हानि हो सकती है. विवाह के बाद धन बढ़ सकता है. यदि चंद्र, शुक्र, मंगल अच्छे हों, तो अच्छा असर मिल सकता है, यदि नीच (कमजोर) हों, तो निकम्मा (खराब) असर मिल सकता है, वैसे ही जैसे नौवें घर में करते हैं.
उपाय: चंद्र (शिव पूजा) से सहायता मिल सकती है.
खराब हालात (बृहस्पति 6, 7, 10, 11: शनि 1, 4, 5, 6):
- शराब, मांस और पराई स्त्री के संपर्क से शनि का असर खराब हो सकता है. मुफ्त में लेकर खाना-पहनना बुढ़ापे में कष्ट दे सकता है. बुरी इच्छाएं शरीर को कमजोर कर सकती हैं. जब दोनों ग्रहों को केतु देखता हो, तो संतान कष्ट में हो सकती है, उन पर बुरी हवा, जिन्न-भूत का साया छाया रह सकता है.
पहले घर में: खराब (मंदा) हाल हो सकता है.
दूसरे घर में: बीमारी हो सकती है. वर्षफल (सालाना कुंडली) में जब दोबारा दूसरे घर में आए, तो बृहस्पति की चीजें आपकी सेहत और पिता की आयु (उम्र) (साल 9, 21, 33, 45, 57, 65, 74, 96) को कष्ट पहुंचा सकती हैं.
उपाय: यहाँ शनि का उपाय मददगार हो सकता है.
तीसरे घर में: शनि गरीबी दे सकता है.
खास बात: 9, 18, 36 साल की उम्र में पिता और धन पर बुरा असर पड़ सकता है.
छठे घर में: शनि मजबूत (कायम) और बृहस्पति बर्बाद (नष्ट) हो, तो स्त्री सुख मिल सकता है. और अगर बृहस्पति मजबूत (कायम) और शनि बर्बाद (नष्ट) हो, तो आप स्त्री से नाराज हो सकते हैं, स्त्री गरीब घर से हो सकती है.
सातवें घर में: पुत्र के जन्म से और बुध के कारोबार (व्यापार) से धन-संपत्ति पर बुरा असर पड़ सकता है. वर्षफल (सालाना कुंडली) में (शुक्र, चंद्र, मंगल) जब भी पहले घर में आएं, तो धन में कमी हो सकती है और पत्नी या माता या भाई, ताया, मामा पर बुरा असर पड़ सकता है.
खास बात: जब मंगल नीच (कमजोर) या बर्बाद (नष्ट) हो, तो लड़ाई-झगड़े, जुदाई (अलगाव), और दुश्मनी (बैर) से बर्बादी खड़ी हो सकती है. आप नामी अय्याश (विलासी) हो सकते हैं, आपको जुबान का चस्का (बुरी आदत) बर्बाद कर सकता है. विवाह होते ही माता का देहांत हो सकता है, और 34 साल की उम्र में पिता की मृत्यु हो सकती है. जब सूर्य पहले घर में हो, तो 9, 48, 36 साल की उम्र में धन बर्बाद हो सकता है, और कष्टों का ढेर लग सकता है.
दसवें घर में: यदि सूर्य चौथे घर में हो, तो शनि अपने घर में बैठे बृहस्पति और सूर्य दोनों को बर्बाद कर सकता है, लेकिन सूर्य का चौथे घर में इतना बुरा असर नहीं हो सकता, बल्कि बृहस्पति बर्बाद हो सकता है. आपका धन दूसरों को कष्ट पहुंचाने वाला हो सकता है.
यदि बुध का साथ मिल रहा हो, तो दोनों का फल खराब हो सकता है. ठगी (धोखे) से कमाया धन काम आ सकता है और 12 साल तक साथ रह सकता है. पैतृक (पुरखों का) धन न के बराबर हो सकता है. वैसे बृहस्पति की चीजें, मान-सम्मान आदि बढ़ सकते हैं.
ग्यारहवें घर में: यदि बुध निकम्मा (खराब) हो, तो भाग्य का कोई भरोसा नहीं, आपको धन-दौलत के लिए तरसना पड़ सकता है. और यदि बुध अच्छा हो, तो बहुत अच्छा असर हो सकता है.