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सूर्य सभी भावों में: व्यक्तित्व, व्यवसाय और संबंध

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सूर्य (भगवान विष्णु)

पक्का घर - पहला
श्रेष्ठ घर - पहला, दूसरा, तीसरा, चौथा, पांचवां, आठवां, नौवां, ग्यारहवां, बारहवां
मंदे घर - छठा, सातवां, दसवां
रंग - पीला (लंबा)
शत्रु ग्रह - राहु, केतु, शनि, शुक्र
मित्र ग्रह - चंद्र, बृहस्पति, मंगल
सम ग्रह - बुध
कार्य - सरकारी हिसाब-किताब, क्षत्रिय (योद्धा)
उच्च - पहला
नीच - सातवां
समय - सुबह 8 बजे से 10 बजे तक
दिन - रविवार
बीमारी - बुखार, आँखों की बीमारी, सिरदर्द
मसनूई (बनावटी) - बुध + शुक्र

सूर्य का पुरुष
जिस पुरुष का सूर्य प्रबल (मजबूत) होगा, उसका कोई अंग कटा हुआ या बेकार नहीं हो सकता है। उसका रंग गेहूं जैसा हो सकता है, आँखें शेर की तरह हो सकती हैं, लेकिन डरावनी नहीं। कद लंबा और शरीर पतला हो सकता है (कमजोर नहीं)। वह हर तरह के कष्ट को सहन करने की शक्ति वाला हो सकता है। चेहरा लंबा और चौड़ा हो सकता है। चलने में वह पहले दाहिना (दायां) पैर आगे करके चलने वाला हो सकता है। देखने में भोला-भाला, लेकिन अंदर से दबी हुई आग जैसा स्वभाव वाला हो सकता है। चाल-चलन का अच्छा, शराब से दूर रहने वाला हो सकता है। उसके साथ की गई शरारत का सही जवाब देने वाला, हर बात में आगे रहने वाला हो सकता है। उसका हाथ सपाट (चिकना), उंगलियों के बीच के जोड़ मोटे और सिरे गोल हो सकते हैं। ऐसा व्यक्ति मेहनती, विचारों का पक्का और जिद्दी स्वभाव का हो सकता है।

सूर्य के कारोबार
- पहला घर - राजदरबार (सरकार) से संबंधित कारोबार, सरकारी काम
- दूसरा घर - गेहूं, बाजरा, खाने-पीने की चीजों से संबंधित कारोबार
- तीसरा घर - भतीजों के साथ मिलकर किए गए काम
- चौथा घर - पानी, रेशम का काम, बुआ के लड़के के साथ मिलकर किए गए काम
- पांचवां घर - बंदरों के बच्चों से संबंधित काम
- छठा घर - नाती (बेटी के बेटे) के साथ मिलकर किए गए काम
- सातवां घर - चांदी/दूध का काम
- आठवां घर - रथ या गाड़ी से संबंधित काम
- नौवां घर - पशुओं से संबंधित काम
- दसवां घर - मकान, भैंसों का व्यापार, भैंस से संबंधित कार्य
- ग्यारहवां घर - तांबे के काम
- बारहवां घर - आटा पीसने की चक्की के काम

सूर्य के संबंधी
- पहला घर - आप स्वयं
- दूसरा घर - धर्मात्मा (धार्मिक), पेशवा (नेता), कानूनी तरीके से काम करने वाला
- तीसरा घर - डंडे के बल पर अपना दोस्त बनाने वाला
- चौथा घर - अपने मुंह से निकालकर बच्चों को पालने वाला पिता
- पांचवां घर - अपने घर का बुद्धिमान बुजुर्ग, गरीब
- छठा घर - बहुत क्रोधी, बिना लड़े रोटी हजम न करे (शांत न रहने वाला)
- सातवां घर - ईर्ष्यालु (जलन रखने वाला), गृहस्थी (परिवार वाला)
- आठवां घर - जिसकी आशा कभी शांत न हो, चाहे उसे सारा ब्रह्मांड मिल जाए
- नौवां घर - बिगड़ी को बनाने वाला सहायक दोस्त
- दसवां घर - विश्वसनीय (भरोसेमंद), यह मानने वाला कि 'हमारे जैसा कोई दूसरा नहीं'
- ग्यारहवां घर - न्यायप्रिय (न्याय पसंद), जालिम (क्रूर), बच्चे पैदा होने से पहले ही अंडे खाने वाला (संतान सुख में कमी)
- बारहवां घर - बच्चों को छोड़कर मरने वाला (संतान को अकेला छोड़ने वाला)

सूर्य की वस्तुएं
- पहला घर - दिन का समय, दाहिना भाग, आँखें, सफेद नमक
- दूसरा घर - गेहूं, बाजरा
- तीसरा घर - भतीजे, दिन में पैदा हुई संतान
- चौथा घर - दाहिनी आँख का डेला (पुतली), बुआ का लड़का (भाई)
- पांचवां घर - इकलौता बेटा, लाल मुंह का बंदर
- छठा घर - गेहूं जैसा रंग, पैरों में बिवाइयां (फटी एड़ियां)
- सातवां घर - आध्यात्मिक हानि (रूहानी नुकसान), लाल गाय, काली भूंडी (जिसके सींग न हों) गाय सहायक रहेगी
- आठवां घर - रथ गाड़ी, आग, स्वयं पैदा हुआ व्यक्ति
- नौवां घर - भूरा रीछ (भालू), ग्रहण के बाद का सूर्य
- दसवां घर - चूहा, नेवला, भूरी भैंस, शिलाजीत
- ग्यारहवां घर - लाल तांबा
- बारहवां घर - भीतर की खराबियां, भूरी चींटी

इस पूरे ब्रह्मांड का कर्ता (बनाने वाला) सूर्य है। हमारे धर्म ग्रंथों में इसकी पूजा की गई है - गायत्री मंत्र भी इसी की पूजा में लिखा गया है। जिसका सूर्य शुभ राशि (पहला, चौथा, पांचवां, आठवां, नौवां, बारहवां) में होगा, वह व्यक्ति तेजस्वी (चमकदार), प्रतापी (शक्तिशाली) और शत्रुओं का नाश करने वाला हो सकता है। और यदि अशुभ राशि में हो, तो वह क्रोधी, दूसरों का बुरा चाहने वाला और नीच प्रकृति का हो सकता है।

सूर्य से आत्मसिद्धि (आत्मज्ञान), पिता, जंगल में घूमना, रेगिस्तान में रहना, मानसिक चिंता और सम्मान देखा जाता है। चौथा और आठवां घर में सूर्य हानि कर सकता है। राज दरबार (सरकार), आप स्वयं, सरकारी हिसाब-किताब, सभी प्रकार की शिक्षा, शरीर की हड्डियों के रोग, दिल की धड़कन - यह सब सूर्य से ही देखा जाता है।

पहला, पांचवां, ग्यारहवां घर में बैठा सूर्य श्रेष्ठ (उत्तम) माना गया है। मंगल छठे और केतु पहले घर में होने पर भी सूर्य उच्च (बलवान) हो सकता है। यदि शत्रु ग्रह सूर्य के साथ हों, तो भी वे सूर्य की सहायता ही कर सकते हैं। इसका प्रभाव 22वें वर्ष से शुरू हो सकता है।
विशेष - सूर्य स्वयं में कभी नीच (कमजोर) नहीं होता, बल्कि अपने नीचपन का प्रभाव साथी ग्रह पर डाल सकता है।

सूर्य उच्च वाला व्यक्ति का कद लंबा हो सकता है और रंग गेहुंआ। आँखें शेर (नर) की तरह की हो सकती हैं, लेकिन डरावनी नहीं। शरीर इकहरा (पतला) और हर प्रकार का कष्ट सहन करने में समर्थ हो सकता है, लेकिन अंदर से आग का गोला (तेज स्वभाव का) और चाल-चलन का नेक (अच्छा) हो सकता है। यदि वह बदचलन (बुरे चरित्र का) होगा, तो उसके उच्च सूर्य का प्रभाव नीच हो सकता है। वह शराब से दूर रहने वाला, हर बात में पहल करने वाला, हमला करने वाले का मुंह तोड़ने वाला, मेहनती और विचारों का पक्का हो सकता है। उसके मकान का दरवाजा पूर्व दिशा की ओर हो सकता है और आंगन मकान के बीच में हो सकता है। रसोई आंगन में हो सकती है और पानी रखने का स्थान मकान से निकलते ही दाहिने हाथ पर आंगन में ही हो सकता है।

मंगल के साथ होने पर सूर्य (प्रकाश) और मंगल (किरणें) - सूर्य की किरणों का प्रभाव चारों ओर हो सकता है। राहु और केतु से मिलने पर सूर्य को ग्रहण लग सकता है।
सूर्य और शनि दोनों एक साथ बैठे कभी झगड़ते नहीं, बल्कि शुक्र को नीच कर सकते हैं।
सूर्य + बुध = सूर्य पांचवें घर का माना गया है। ऐसे व्यक्ति की वृद्धावस्था (बुढ़ापा) अच्छी बीत सकती है, लेकिन मृत्यु अचानक हो सकती है।
जिस व्यक्ति का सूर्य श्रेष्ठ होता है, वह स्वयं कमाकर धनी बनता है। उसे दूसरों से सहायता की आशा नहीं करनी चाहिए। वह जितनी चोटें खाएगा, उतना ही अधिक चमकेगा। जो उसे सताएगा, वह स्वयं नष्ट हो सकता है, लेकिन व्यक्ति का सूर्य स्वयं बढ़ता जाएगा।
श्रेष्ठ सूर्य वाले व्यक्ति के सभी ग्रह अपनी-अपनी अवधि (समय) में उत्तम प्रभाव दे सकते हैं। जैसे - बृहस्पति 16-21 वर्ष, सूर्य 22-23 वर्ष, चंद्र 24 वर्ष, शुक्र 25-27 वर्ष, मंगल 28-33 वर्ष, बुध 34-35 वर्ष, शनि 36-41 वर्ष, राहु 42-47 वर्ष, केतु 48 वर्ष। लेकिन बुध सूर्य के समय (आधा समय) 17 वर्ष तक चुप रह सकता है और शनि 18 वर्ष की आयु तक पिता की आय पर और बाद में अपनी कमाई पर प्रभाव डाल सकता है।

जब सूर्य नीच हो रहा हो तो
- मुंह से थूक आता रहे।
- शरीर के अंग बेकार हो जाएं।
- लाल/भूरी भैंस मर जाए या खो जाए।
उपाय - गुड़ खाकर पानी पीकर काम शुरू करें।

यदि सूर्य के साथ मित्र ग्रह हों, तो व्यक्ति अपने पिता से अच्छे भाग्य वाला हो सकता है और यदि शत्रु ग्रह हों, तो संतान का हाल नीच हो सकता है। राहु से मिलने पर विचारों में गंदगी, केतु से मिलने पर पैरों में खराबियां, शनि से मिलने पर हमेशा सिर पर इश्क सवार रह सकता है।

जब शत्रु ग्रह सूर्य से पहले घरों में हों, तो अपना नीच प्रभाव सूर्य पर डाल सकते हैं। व्यक्ति पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन जब सूर्य से बाद के घरों में होंगे, तो सूर्य की वस्तुओं पर अपना नीच प्रभाव डाल सकते हैं।
इसलिए, समय से पहले ही नीच ग्रहों को उपाय द्वारा ठीक कर लेना चाहिए। सूर्य के शत्रु ग्रह शनि, राहु, केतु, शुक्र हैं।
सूर्य जिस राशि (घर) में बैठा हो, उस घर के स्वामी ग्रह के प्रभाव को नीच कर सकता है। इसलिए (राशि फल) के ग्रह को उपाय द्वारा मजबूत कर देना आवश्यक है।
सूर्य + शनि के टकराव में स्त्री को कष्ट हो सकता है।

उपाय - जब सूर्य का प्रभाव बुरा हो रहा हो, तो सूर्य के शत्रु ग्रहों को अच्छा कर लेना चाहिए। यह स्थिति केवल सूर्य छठे और सूर्य सातवें घर में होने पर ही हो सकती है। इन घरों में सूर्य होने पर बुध को उपाय द्वारा ठीक कर लेना चाहिए।
यदि सातवें घर में सूर्य को शनि का टकराव आ जाए, तो चंद्र को नष्ट करने से (आग को दूध से बुझाने से) सूर्य को सहायता मिल सकती है।
- गुड़ खाकर पानी पीकर काम शुरू करें।
- बहते पानी में गुड़ बहाएं।
- रात को सोते समय दूध से आग बुझाएं।
- तांबे में माणिक्य (रत्न) सूर्योदय के समय पहनें।

भाव पहला घर (उच्च)
सतयुगी प्राणी (सत्ययुग जैसा व्यक्ति), लंबी आयु वाला, संतान गिनती की हो सकती है। बुध, मंगल, बहन, भाई की चोटें खाकर भी आगे बढ़ता रह सकता है। परोपकार (दूसरों की भलाई), सेवा के बिना सूर्य का प्रभाव निष्फल (बेकार) हो सकता है। इश्कबाजी (प्रेम संबंधों) से दूर रहने वाला। यदि सातवां घर खाली हो, तो जल्दी विवाह करना शुभ रह सकता है, ताकि सूर्य अपना प्रभाव दे सके।
यदि आप अपनी कमाई का चौथा हिस्सा धर्म-कर्म और परोपकार में लगाएं, तो और उन्नति कर सकते हैं। विद्या (ज्ञान) की वृद्धि का साथ रह सकता है, संतान और स्त्री सुख पूर्ण हो सकता है, आयु पूरी हो सकती है, पहली संतान लड़का हो सकता है। जिसका जन्मदिन आधी रात के बाद होगा, वह अच्छे कामों में आगे रहने वाला, गरीबों का सहायक, अधिक क्रोधी, सुनने की बजाय देखकर विश्वास करने वाला हो सकता है।
माता और स्त्री को कष्ट, नाक और माथा ऊंचा, शरीर कमजोर, स्वाभिमानी, राजा या शासक, राजदरबार से संबंध में अच्छा फल दे सकता है। इस घर के कार्य सरकारी नौकरी या ठेकेदारी हो सकते हैं।

सूर्य पहले घर में, जब उसके मित्र ग्रह मंगल, चंद्र साथ हों तो - धन स्वयं कमाएं, पैतृक संपत्ति का चाहवान (इच्छुक) नहीं होगा।
सूर्य पहले घर में, शुक्र सातवें घर में - पिता की मृत्यु बचपन में हो सकती है।
सूर्य पहले घर में, बुध सातवें घर में - कामवासना (यौन इच्छाओं) से परे रहने वाला।
सूर्य पहले घर में, चंद्र दूसरे घर में, शनि ग्यारहवें घर में - मान-सम्मान, धन-संपत्ति वाला।

उपाय - यदि किसी कारण से मंदा (कमजोर) हो (सातवां घर खाली हो), तो जल्दी विवाह करना सूर्य को उत्तम रख सकता है। पानी का नल लगवाना अच्छा फल दे सकता है।

भाव दूसरा घर
यहां शुक्र पितृ ऋण (पूर्वजों का कर्ज) का ग्रह बन गया है। स्त्री के कारण संबंधियों से झगड़ा शुभ फल देने वाला। अपनी भुजाओं का स्वामी (अपनी शक्ति पर निर्भर), तीनों लोकों के सुख का सागर, स्वयं चमके और दूसरों को भी चमकाए। यदि व्यक्ति शुक्र (स्त्री) के झगड़ों से दूर रहे, तो हर समय आगे बढ़ता जाए। सवारी का सुख अवश्य प्राप्त हो सकता है। धार्मिक मुखिया (नेता) भी हो सकता है, मंदिर और धर्मशालाएं बनवा सकता है, पुरानी परंपरा से प्यार करने वाला, सेनापति, ससुराल और गृहस्थ सुख प्राप्त हो सकता है। अपने माता-पिता और संबंधियों के भाग्य को भी चमकाने वाला। स्त्रियों पर भारी, अर्थात उसके वंश में स्त्रियां मरती जा सकती हैं। इस घर के कार्य अनाज की आढ़त (थोक व्यापार) हो सकते हैं।
सूर्य दूसरे घर में, मंगल पहले घर में, चंद्र तीसरे घर में - दरिद्री (गरीब), आलसी, निर्धन (धनहीन)।

उपाय - गेहूं, बाजरा मुफ्त में लेना बुरा हो सकता है। शनि का उपाय नारियल, बादाम, तेल धर्म स्थान में देते रहना शुभ रह सकता है। स्त्री का कष्ट दूर हो सकता है।

भाव तीसरा घर
छोटे भाइयों वाला, तीर्थ प्रेमी (तीर्थयात्रा पसंद करने वाला), स्वयं कमाकर खाने वाला, संपत्ति का स्वामी, शुभ फल देने वाला। यदि बुध मंदा (नीच) होगा, तो मामा के लिए भी बुरा असर हो सकता है। राहु, केतु भी मंदे हो सकते हैं। माता की आयु लंबी हो सकती है, बशर्ते कि चंद्र स्वयं नष्ट न हो रहा हो। पड़ोसी मर जाए। बाप/दादा चाहे गरीब हों, लेकिन व्यक्ति स्वयं में गरीब नहीं हो सकता है। यदि होगा, तो कारण व्यक्ति की बदचलनी (बुरे चरित्र) हो सकती है। बेटों से मिलकर कार्य करना उपयुक्त (सही) रह सकता है।

उपाय - राज्य से लाभ, दिन में पैदा हुई संतान। यदि चाल-चलन बुरा हो, तो सूर्य का प्रभाव बुरा फल दे सकता है। भतीजों की सहायता करते रहें।

भाव चौथा घर
माता और बहन के सुख को हानि दे सकता है। घर छोड़कर विदेश में रहना पड़ सकता है। इस घर में सूर्य हो, तो दसवें घर के बृहस्पति के प्रभाव को भी श्रेष्ठ कर सकता है। यहां सूर्य उत्तम और प्रबल हो सकता है। चंद्र का प्रभाव भी उत्तम हो सकता है। राजदरबार में अच्छा स्थान प्राप्त कर सकता है। व्यक्ति वह काम करता है, जो उसके पूर्वजों ने नहीं किया हो। यदि मंगल खराब हो, तो 15 वर्ष तंगी (कठिनाई) की हालत में काट सकता है। वैसे मंगल नेक (अच्छा) का साथ हो, तो सूर्य को बलवान बना सकता है, लेकिन आँख में हानि पैदा कर सकता है। पानी या रेशम के कार्य उत्तम रह सकते हैं।

सूर्य चौथे घर में, शनि सातवें घर में - व्यक्ति नपुंसक (संतान पैदा करने में असमर्थ) हो सकता है।
सूर्य चौथे घर में, शुक्र सातवें घर में, चंद्र पहले घर में - बुजदिल (कायर) हो सकता है।
सूर्य चौथे घर में, बृहस्पति दसवें घर में (चंद्र श्रेष्ठ) - सीप में मोती के समान भाग्य वाला।
सूर्य चौथे घर में, बृहस्पति पहले घर में - अग्निकांड (आग लगने की घटनाएं) होते रहें।
सूर्य चौथे घर में, मंगल नीच - 22 वर्ष के बाद 15 वर्ष का समय तंगी की हालत का रह सकता है।

चंद्र, सूर्य, बृहस्पति तीनों ग्रहों का मेल वर्षफल के अनुसार हो रहा हो, तो बृहस्पति (सोना), चंद्र (चांदी, कपड़ा) के कार्य में लाभ प्राप्त हो सकता है। शनि के काम-कारोबार हानि दे सकते हैं।

उपाय - पैतृक मकान में अंधों को भिक्षा (खाना) देना शुभ फल दे सकता है। बुआ की सेवा करें।

भाव पांचवां घर
पढ़ाई में अच्छा, पेट की खराबी, क्रोधी परिवार की उन्नति का स्वामी, राज्य में विशेष फल पाने वाला, माता-पिता सुखी, अपने घर का ग्रह फल का भाग्य को जगाने वाला इकलौता बेटा, भादों का महीना, सिंह राशि। यह घर सूर्य का पक्का घर है। परोपकारी राजा, लंबी आयु वाला, सबको मिलाकर एक जगह रखने वाला, शूरवीर बेटों वाला, वृद्धावस्था अच्छी बीते। यदि दसवें घर में बृहस्पति हो, तो स्त्री की मृत्यु, और यदि शनि तीसरे घर में हो, तो दुखी। इस घर में सूर्य के समय, सूर्य और बृहस्पति दोनों का प्रभाव उत्तम हो सकता है। राजदरबार से संबंध अच्छा हो सकता है। यदि राजा सहायक न हो, तो साधु ही उसका बेड़ा पार लगा सकता है। संतान सुख पूर्ण हो सकता है। यदि बृहस्पति का साथ हो रहा हो, तो मान-सम्मान का स्वामी हो सकता है।

सूर्य पांचवें घर में, शनि नौवें या ग्यारहवें घर में - दूसरों से हमदर्दी, पिता के लिए शुभ।
सूर्य पांचवें घर में, चंद्र चौथे घर में, बृहस्पति नौवें घर में - राजयोग।
सूर्य पांचवें घर में, बृहस्पति दसवें घर में - विवाह एक से अधिक।
सूर्य पांचवें घर में, शनि तीसरे घर में - दुखों का पहाड़, संतान नष्ट, आर्थिक संकट।
सूर्य पांचवें घर में, मंगल तीसरे घर में, बृहस्पति नौवें या बारहवें घर में - उत्तम फल प्राप्त।

उपाय - लाल मुंह के बंदर की सेवा अच्छा फल दे सकती है।

भाव छठा घर
नाना-नानी की ओर से दुखी, मुकदमों पर अधिक धन खर्च, मित्र और शत्रु दोनों दबकर रह सकते हैं। भाग्य पर भरोसा रखने वाला, बेफिक्र। सूर्य छठे घर में बलहीन (कमजोर) हो सकता है। ऐसे समय यदि पहले घर (लग्न) में शुक्र, शनि, राहु, केतु हों, तो राजदरबार से चिंता, सेहत खराब। यदि बुध बारहवें घर में हो, और यदि शनि बारहवें घर में हो, तो स्त्रियां मरती जाएं, पांव की खराबी। व्यक्ति का जन्म अपने ननिहाल (नाना-नानी का घर) में हो सकता है। पैतृक सुख अच्छा, लेकिन पापी ग्रहों के मिलन से बुरा समय शुरू हो सकता है। एक बार तो पतन (गिरावट) अवश्य हो सकता है। व्यक्ति की हठधर्मिता (जिद्द) के कारण काम बार-बार बदलने पड़ सकते हैं।
पुत्र पैदा होने के बाद पहले वाला अच्छा समय फिर लौट आ सकता है। अपना या पिता का एक का राजदरबार अवश्य नीच (खराब) हो सकता है। मामाओं का हाल खराब हो सकता है। स्त्री सुख कम, संतान सुख भी कम, परंतु निसंतान (बिना संतान के) नहीं हो सकता है।

सूर्य छठे घर में, बुध बारहवें घर में - राजदरबार नष्ट, हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप)।
सूर्य छठे घर में, शनि बारहवें घर में - स्त्रियां मरती जाएंगी।
सूर्य छठे घर में, मंगल दसवें घर में - लड़के मरते जाएंगे।

उपाय - राशि फल के उपाय से ठीक किया जा सकता है। बुध का उपाय करें।
नाना-नानी (मामा) की सहायता के लिए बंदर को गुड़ देना, मित्रों को दावत देता रहे।
चांदी या दरिया (नदी) का पानी घर में कायम (रखें) करें।
मंदिर में दान देता रहे।
रात को सिरहाने पानी रखकर सोने से पिता की आयु बढ़ सकती है। बकरी का दान करें।

भाव सातवां घर (नीच) मसनूई (बनावटी) = बुध + शुक्र
यहां शुक्र ऋण का ग्रह बन गया है। राशि फल का व्यक्ति गृहस्थी से तंग आकर भागा हुआ साधु। 25 वर्ष तक स्त्री सुख हल्का, पहली स्त्री रोगी, व्यापार में हानि, राज्य से दुखी, क्रोधी स्वभाव। मित्र ग्रहों की सहायता से लाभ। शनि का टकराव आने पर दूध से आग बुझाने से लाभ। लाल गाय की सेवा आध्यात्मिक हानि पैदा कर सकती है। व्यक्ति के जन्म से पहले, चाहे लाखों-हजारों हों, परंतु यदि बुध का साथ हो जाए, तो सब कुछ नष्ट-भ्रष्ट हो सकता है। यदि पहले घर (लग्न) में कोई ग्रह न हो, तो सूर्य सोया रह सकता है। वह तब चमकेगा, जब आठवें घर के ग्रह दूसरे घर में जाएंगे। पराई ममता साथ रह सकती है, ससुराल सुख खराब रह सकता है।
यदि शनि का टकराव आ जाए (हर घर के ग्रह अपने से आठवें घर के ग्रहों को टक्कर मारते हैं), तो चंद्र को नष्ट करने से (आग को दूध से बुझाने से) सहायता मिल सकती है। चांदी या दूध का कारोबार ठीक रह सकता है।

सूर्य सातवें घर में, शुक्र पहले घर में - स्त्री का स्वास्थ्य खराब, दिमाग/मस्तिष्क की कमजोरी।
सूर्य सातवें घर में, शुक्र पापी ग्रह पहले घर में - भाग्य का मारा हुआ।
सूर्य सातवें घर में, बुध नौवें घर में - बृहस्पति और बुध शत्रु होंगे, संतान नष्ट हो सकती है।
सूर्य दसवें घर में, शनि बारहवें घर में होने पर - दूध से आग बुझाएं।

उपाय - सफेद गाय की सेवा कष्ट पर काली भूंडी गाय की सेवा अच्छा फल दे सकती है। जमीन में तांबे के चौकोर पत्तरे (चादर) गाड़ना सहायक रह सकता है। पानी के घूंट पीकर काम करें।

भाव आठवां घर
क्रोधी, धैर्यहीन (अधैर्य), स्त्रियों के लिए लालायित (इच्छुक) रहने वाला, असंतुष्ट व्यक्ति, तपस्वी राजा, गुप्त इंद्रिय रोगी (यौन अंगों का रोगी), 'सांच को आंच नहीं' (सत्य को खतरा नहीं)। राजदरबारी उलझनें बनी रह सकती हैं और बीमारी लगी रह सकती है। यह घर मृत्यु का घर है, लेकिन अब मृत्यु शांत रह सकती है। यदि व्यक्ति बड़े भाई और गाय की सेवा करने वाला होगा, तो लंबी आयु वाला हो सकता है। आर्थिक स्थिति खराब रह सकती है और आँखों की रोशनी कम हो सकती है। यदि बहन के घर या ससुराल में न रह रहा हो, चोरी करने वाला न हो, तो अच्छा फल प्राप्त हो सकता है। यद्यपि यह घर मंगल खराब और शनि का मुख्य घर है। फिर भी वह यहां सूर्य व्यक्ति की रक्षा करता है। उसे लंबी आयु वाला बनाता है।

विशेष - सूर्य आठवें घर वाले के सामने किसी की मृत्यु नहीं हो सकती है। यदि कोई बहुत बीमार पड़े, तो सूर्य आठवें घर वाला उसके पास मत बैठे, ताकि वह मुक्त हो सके। मकान का मुख्य द्वार दक्षिण दिशा में नहीं होना चाहिए।

उपाय - ध्यान रहे, सफेद गाय की सेवा से हानि हो सकती है। काली/लाल गाय की सेवा श्रेष्ठ फल दे सकती है। गुड़ खाकर पानी पीकर काम पर जाएं। गेहूं 800 ग्राम और गुड़ 800 ग्राम रविवार से शुरू करके लगातार 8 दिन तक मंदिर में चढ़ाएं। कभी-कभी जलती चिता में तांबे का पैसा डाल दें।

भाव नौवां घर
भाग्यशाली, वाहन-सवारी का सुख, स्वभाव दुष्ट, भाई से दुखी। सूर्य ग्रहण के बाद का सूर्य लंबी आयु वाला, बड़े परिवार वाला, हर प्रकार से अच्छा। यहां बैठा सूर्य व्यक्ति को लंबी आयु वाला बनाता है। व्यक्ति परोपकारी (दूसरों की भलाई करने वाला) हो सकता है। परिवार बड़ा हो सकता है। अपनी सात पीढ़ियों को तारने वाला हो सकता है। परंतु घर में खाली पड़े बर्तन जो रसोई से अलग पड़े हों, अच्छे नहीं होते। व्यक्ति अपने वंश के लिए अपना जीवन तक लुटा देने वाला हो सकता है। 22वें वर्ष से सूर्य का श्रेष्ठ प्रभाव शुरू हो सकता है। राजदरबार भी श्रेष्ठ हो सकता है - माध्यम बनेंगे माता-पिता। (शुक्र) स्त्री पक्ष कमजोर, माता (चंद्र) पक्ष प्रबल (मजबूत)। तीर्थयात्रा का उत्तम प्रभाव। पशु संबंधी कार्य लाभदायक हो सकते हैं।

विशेष - व्यक्ति का कुल (खानदान) लंबे समय से ठेकेदारी का धंधा करता हो सकता है। अपने से पूर्व तीन और अपने बाद की तीन पीढ़ियों का सहायक हो सकता है। बाप-दादा लंबी आयु वाले हो सकते हैं।
स्वभाव अति उग्र (बहुत गुस्सैल) या अति नग्न (बहुत शांत) - दोनों में यदि अति है, तो नष्ट हो सकता है।
यदि बुध साथ न हो और बृहस्पति आठवें या दसवें घर में हो, तो लंबी आयु वाला, आजीविका (रोजगार) से डॉक्टर या हकीम हो सकता है।

उपाय - चांदी, चावल या दूध का दान सूर्य की शक्ति को बढ़ा सकता है। परंतु चांदी, चावल, दूध का दान लेना व्यक्ति की तबाही का कारण बन सकता है। भूरे रंग के रीछ (भालू) को सूर्य की चीजें खिलाएं।

भाव दसवां घर
राज्य से लाभ, नौकर-चाकर का सुख प्राप्त, राजनीति में निपुण (कुशल), सवारी का सुख, माता की मृत्यु जल्दी, सेहत और संपत्ति का स्वामी, परंतु वहमी (शक्की)। वैसे राजदरबारी उलझनें सदा बनी रह सकती हैं। इस घर में सूर्य के समय यदि शुक्र चौथे घर में हो, तो पिता को और शुक्र पांचवें घर में हो, तो माता को अधिक कष्ट। सूर्य और बृहस्पति दसवें घर में होने पर, पांचवें घर में बेशक (भले ही) इनके मित्र ग्रह ही क्यों न बैठे हों, वे शत्रुता ही कर सकते हैं। उन्हें वहां से हटा दें। नर ग्रहों (बृहस्पति, मंगल) की सहायता के बिना राम दरबार का फल खराब। सूर्य दसवें घर में होने पर संतान पक्ष कमजोर हो सकता है। 34 वर्ष की आयु तक का समय भी कष्टों में ही कट सकता है।
यदि राजदरबार से लाभ मिले, तो शनि का प्रभाव नीच हो सकता है, जिस कारण धन हानि हो सकती है। 19 वर्ष तक पिता से अलग (ससुराल में) ही रहना पड़ सकता है।

सूर्य दसवें घर में, शुक्र चौथे घर में - पिता की मृत्यु बचपन में ही।
सूर्य दसवें घर में, चंद्र पांचवें घर में - केवल 12 दिन की आयु यानी अल्पायु (कम उम्र)।

उपाय - सफेद या शर्बती रंग की पगड़ी या टोपी से हमेशा सिर ढक कर रखें।
काले-नीले कपड़े मत पहनें।
नदी या दरिया में तांबे का पैसा डालना शुभ फल दे सकता है।
शिलाजीत का विसर्जन (पानी में बहाना) लाभ दे सकता है।
भूरी भैंस की सेवा करें।

भाव ग्यारहवां घर
राज्य से धन लाभ, पूरा धर्मी (धार्मिक), न्यायप्रिय (न्याय पसंद), परंतु अपनी ऐशो-आराम वाला। यदि शराब, मांस, अंडा से दूर रहे, तो अति उत्तम (बहुत अच्छा)। तीन बेटों का सुख दे सकता है। सूर्य के प्रकाश को इस घर में शनि काला कर सकता है। यदि ऐसे समय चंद्र पांचवें घर में हो, तो मृत्यु 12वें वर्ष में लिखी गई है। तीसरे घर में बैठा बुध भी नीच प्रभाव डाल सकता है। भाग्य को चमकने नहीं देता, परंतु आयु की रक्षा करता है। तांबे की वस्तुओं का कार्य अति उत्तम रह सकता है।

विशेष - यदि व्यक्ति शराब पिए, मांस खाए या झूठ बोले, तो उसके जीवन में चारों ओर अंधेरा ही अंधेरा हो सकता है, क्योंकि ये काम शनि के बुरे काम हैं। शनि इन कार्यों के कारण से सूर्य को नष्ट कर सकता है और संतान नष्ट हो सकती है, जिसे 42-48 वर्ष की आयु तक रोक पाना मनुष्य की शक्ति से बाहर हो सकता है।

भाव यह है कि पूरा घर धार्मिक होगा, तो सूर्य शुभ फल दे सकता है। यदि चाल-चलन खराब होगा और शनि के मंदे काम (शराब, मांस, अंडा का प्रयोग) करेगा, झूठ बोलेगा, तो सूर्य यहां बर्बादी का कारण बन सकता है।

उपाय - शनि को मंदा (कमजोर) न करें।
रात को 5 मूली सिरहाने रखकर सुबह मंदिर में दें।
जो पाप आज तक किए हैं, उनसे उद्धार (मुक्ति) होने के लिए अपने भार के समान दूध देने वाली बकरियों की संख्या के बराबर बकरे जंगल में छोड़ने पर ही उद्धार हो सकता है।
तांबा दान करें।

भाव बारहवां घर
उदासी, नेत्र रोगी (आँखों का रोगी), दिमागी खराबी, पराई आग में जलने वाला (दूसरों की समस्याओं में फंसने वाला)। धर्म की पालना करने से हर समय सहायता मिल सकती है। किसी की झूठी गवाही देना, अमानत मार लेना (धोखा देना), चोरी, गबन करना, सूर्य के फल को खराब कर सकते हैं। पराई आग में जलने वाला। यहां सूर्य को यदि राहु कोई हानि न पहुंचा रहा हो, तो धन और परिवार बढ़ सकता है। हाथ की कारीगरी से कमाई (हुनरमंदी) में सूर्य को ग्रहण हो सकता है। बुध के काम से व्यापार में उन्नति हो सकती है। हाथ के कामों से असफलता मिल सकती है। अशुभ (नीच) सूर्य आँखों पर बुरा प्रभाव डाल सकता है। ऐसा व्यक्ति यदि शनि और राहु के कामों में पड़ जाए, तो रोटी तक के लाले पड़ सकते हैं। जैसे मकान बनवाने का काम, या लोहे-तेल का काम, रोगन (पेंट), बिजली का काम, कच्चे कोयले का काम, आटा पीसने की मशीन लाभ दे सकती है।

विशेष - यदि व्यक्ति के मकान में आंगन न हो, तो सूर्य का अच्छा फल नष्ट हो सकता है, अर्थात घर में अंधेरा अच्छा नहीं होता। यदि अंधेरा होगा, तो व्यक्ति निसंतान (बिना संतान के) हो सकता है। घर से बाहर वह कभी साधु नहीं हो सकता। यदि साधु बन जाए, तो जागीरदार (जमींदार) हो सकता है।
चाहे घर-बार बिक जाए - धर्महीन (धर्म से दूर) नहीं हो सकता है।

सूर्य बारहवें घर में, शनि छठे घर में - अब दोनों ग्रहों की शत्रुता का प्रभाव शुक्र (स्त्री) पर नहीं हो सकता है।

उपाय - बंदरों को गुड़ डालना चाहिए।
धर्म की पालना करें, किसी की झूठी गवाही न दें।
साले या चाचा-ताऊ के साथ मिलकर किया काम भी हानिकारक हो सकता है।
भूरी चींटियों को आटा डालें।

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