शनि-राहु पहले भाव में: सरकारी अधिकारी और पालन-पोषण
शनि और राहु पहले भाव में होने से व्यक्ति सरकारी अधिकारी बन सकता है और अपने से जुड़े लोगों का पालन-पोषण करता है।
शनि और राहु पहले भाव में होने से व्यक्ति सरकारी अधिकारी बन सकता है और अपने से जुड़े लोगों का पालन-पोषण करता है।
पहले भाव में चंद्रमा और राहु की युति मानसिक बेचैनी और संतान संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती है, लेकिन सरकारी क्षेत्र से लाभ और पारिवारिक सुख भी देती है।
पहले भाव में बुध और राहु का योग व्यक्ति के जीवन में कई तरह की चुनौतियां ला सकता है। जानें इसके खराब परिणाम।
पहले भाव में मंगल और राहु की युति आपको निडर और साहसी बनाती है। आपको सरकारी संस्थाओं से लाभ मिल सकता है और 28 साल के बाद धन लाभ के योग हैं।
बृहस्पति और राहु की युति पहले भाव में आपको नेक और दानी बनाती है, पर भ्रम, स्वास्थ्य समस्याएँ और शिक्षा में बाधाएँ दे सकती है।
शुक्र, शनि और राहु की युति नशे, बदनामी और कानून तोड़ने जैसी बुरी आदतों की ओर धकेल सकती है। इससे बचने के उपाय जानें।
शुक्र, बुध और राहु की युति से कई विवाह हो सकते हैं, लेकिन संतान सुख की कमी रहेगी।
सूर्य, शुक्र और राहु की युति का वैवाहिक जीवन और धन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। जीवनसाथी को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
सूर्य, चंद्रमा और राहु की युति धन हानि और संतान संबंधी चिंताएं दे सकती है, हालांकि कुछ मामलों में सूर्य अच्छे परिणाम भी देता है।
सूर्य, बुध और राहु की युति से एक से अधिक विवाह हो सकते हैं और संतान गलत मार्ग पर जा सकती है।
सूर्य, मंगल और राहु की युति का विभिन्न भावों में क्या प्रभाव होता है, यहाँ जानें।
सूर्य, मंगल और राहु की युति के विभिन्न प्रभावों और उनसे जुड़े उपायों के बारे में जानें।
अगर शनि, राहु और केतु कुंडली में एक साथ हों और शुभ ग्रहों की दृष्टि न हो तो बहरापन या कान की समस्या हो सकती है।
चंद्रमा, शनि और राहु की युति के कारण आपको 33 से 39 साल की उम्र में बुरे नतीजे मिल सकते हैं। पत्नी और माँ से कम सुख मिलने की संभावना है।
चंद्रमा, राहु और केतु की युति का जीवन पर गहरा असर होता है। इस युति के प्रभावों को जानें और समाधान पाएं।
चंद्रमा, बुध और राहु की युति से पिता की मृत्यु और मां के संघर्ष का योग बनता है। जानें इसके प्रभाव।
अगर आपका जन्म पैर पहले हुआ है, तो आप पिता के धन पर बोझ बन सकते हैं या पिता की मृत्यु के बाद जन्म हो सकता है। जानें उपाय।
मंगल, राहु और केतु की युति से जीवन में कई तरह की कठिनाइयाँ आ सकती हैं, जिसमें संतानहीनता और दुर्भाग्य शामिल हैं।
बृहस्पति, शुक्र और राहु की युति से भाग्यहीनता, स्वास्थ्य समस्याएं और संतान से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं।
बृहस्पति, सूर्य और राहु की युति आमतौर पर बुरे प्रभाव देती है, जिससे बदनामी और धोखाधड़ी की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।