चंद्रमा-राहु-केतु की युति: प्रभाव और उपाय
इन दोनों योगों (ग्रहों के मेल) में, अलग-अलग ग्रहों का असर अलग-अलग भावों (घरों) में होता है और उसी के हिसाब से सलाह दी जाती है।
इन दोनों योगों (ग्रहों के मेल) में, अलग-अलग ग्रहों का असर अलग-अलग भावों (घरों) में होता है और उसी के हिसाब से सलाह दी जाती है।
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पहले भाव में चंद्रमा और राहु की युति मानसिक बेचैनी और संतान संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती है, लेकिन सरकारी क्षेत्र से लाभ और पारिवारिक सुख भी देती है।
चंद्रमा और केतु की युति दूसरे भाव में आपको पारिवारिक सुख देती है और गूढ़ विद्याओं में आपकी रुचि बढ़ाती है।
यह युति माता-पिता की सेवा, पैतृक संपत्ति, और वैवाहिक जीवन पर असर डालती है। कुछ मामलों में दो शादियां और बच्चों से संबंधित मुद्दे भी हो सकते हैं।
चंद्रमा और राहु के आठवें भाव में होने से जीवन पर कई तरह के मिले-जुले असर देखने को मिलते हैं।
बृहस्पति और चंद्रमा के छठे भाव में होने पर, बुध और केतु की स्थिति आपके जीवन पर अच्छे और बुरे प्रभाव डालती है। पानी के दान से बचें, लेकिन श्मशान घाट में पानी उपलब्ध कराना शुभ फल देगा।
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