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भाव · 85

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बृहस्पति-मंगल दसवें भाव में: पिता से संबंध और बच्चों से सुख

बृहस्पति और मंगल का दसवें भाव में होना आपके भाग्य को प्रभावित करता है, खासकर पिता और बच्चों से संबंधित मामलों में।

बृहस्पति-केतु दसवें भाव में: धन लाभ और पारिवारिक अशांति

बृहस्पति और केतु दसवें भाव में होने से आपको कहीं से भी बड़ा लाभ हो सकता है, लेकिन परिवारिक जीवन में अशांति और पिता के लिए समस्याएँ आ सकती हैं।

चंद्रमा-शुक्र नौवें भाव में: पैतृक संपत्ति, प्रेम विवाह और धार्मिक यात्रा

नौवें भाव में चंद्रमा और शुक्र की युति से पैतृक संपत्ति, प्रेम विवाह और धार्मिक यात्राओं का योग बनता है। हालांकि, संतान संबंधी चिंताएं और कुछ मामलों में दुर्भाग्य भी संभव है।

बुध-केतु नौवें भाव में: पिता की सेवा और धार्मिक यात्राएँ

बुध और केतु नौवें भाव में पिता की सेवा, धार्मिक रुचि और उच्च पद दिला सकते हैं, लेकिन अदालती मामलों और बच्चों से जुड़ी परेशानियाँ भी दे सकते हैं।

बृहस्पति-शुक्र नौवें भाव में: धन, प्रेम विवाह और संतान सुख

बृहस्पति और शुक्र की नौवें भाव में युति से धन में वृद्धि, प्रेम विवाह और संतान संबंधी मामलों में शुभ फल मिलते हैं।

बृहस्पति-बुध नौवें भाव में: परिवार, आध्यात्मिकता और भाग्य

बृहस्पति और बुध नौवें भाव में परिवार के प्रति समर्पण, आध्यात्मिक झुकाव और यात्राओं से लाभ दे सकते हैं। हालांकि, विवाह और बच्चों से खुशी में कमी आ सकती है।

चंद्रमा-शनि आठवें भाव में: लंबी उम्र और अचानक धन लाभ

आठवें भाव में चंद्रमा और शनि की युति व्यापार और नौकरी दोनों में लाभ दे सकती है। यह आपको लंबी उम्र और पैतृक संपत्ति दिला सकती है।

मंगल-राहु आठवें भाव में: भाग्य में उतार-चढ़ाव और ससुराल से लाभ

मंगल और राहु के आठवें भाव में होने से भाग्य में उतार-चढ़ाव आ सकते हैं, लेकिन ससुराल पक्ष से लाभ मिल सकता है और व्यक्ति मेहनती होता है।

सूर्य-शनि सातवें भाव में: वैवाहिक जीवन और धन लाभ

सूर्य और शनि की युति सातवें भाव में आपके वैवाहिक जीवन, व्यापार और धन पर गहरा असर डाल सकती है। जानिए इसके अच्छे और बुरे प्रभाव।

चंद्रमा-बुध सातवें भाव में: धन, सुंदर पत्नी और सरकारी नौकरी

सातवें भाव में चंद्रमा और बुध की युति से धन, सुंदर और शिक्षित पत्नी मिलती है, साथ ही सरकारी नौकरी के भी योग बनते हैं।

बृहस्पति-राहु सातवें भाव में: पिता या ससुर में से एक का जीवित रहना

बृहस्पति और राहु के सातवें भाव में होने से पिता या ससुर में से केवल एक के जीवित रहने की संभावना हो सकती है।

बृहस्पति-बुध सातवें भाव में: मिले-जुले परिणाम और चुनौतियाँ

सातवें भाव में बृहस्पति और बुध का संयोजन मिले-जुले परिणाम देता है। इससे बच्चों से परेशानी, वित्तीय उतार-चढ़ाव और रिश्तों में चुनौती आ सकती है।

सूर्य-केतु छठे भाव में: सरकारी लाभ और शत्रुओं पर विजय

सूर्य और केतु का छठे भाव में होना आपको सरकारी महकमों में सफलता और शत्रुओं पर विजय दिला सकता है। यह आपके बच्चों और पिता के लिए भी शुभ हो सकता है।

बुध-शनि छठे भाव में: स्वास्थ्य और शत्रु पर प्रभाव

छठे भाव में बुध और शनि की युति स्वास्थ्य, शत्रुओं और कानूनी मामलों पर गहरा प्रभाव डालती है। जानें इसके शुभ-अशुभ फल और उपाय।

बुध-राहु छठे भाव में: धन, लंबी आयु और शत्रु पर विजय

बुध और राहु के छठे भाव में होने से धन लाभ, लंबी आयु और शत्रुओं पर विजय मिलती है। हालांकि, कुछ नकारात्मक प्रभाव भी हो सकते हैं।

चंद्रमा-राहु पांचवें भाव में: धन, संतान और शिक्षा पर प्रभाव

पांचवें भाव में चंद्रमा और राहु की युति धन संबंधी अच्छे निर्णय, सम्मान और संतान सुख दे सकती है। हालांकि, यह शिक्षा में बाधा, व्यापार में नुकसान और संतान संबंधी चिंताएं भी ला सकती है।