कुंडली से खोजें

संतान · 242

ग्रह और भाव चुनकर खोजें →

सूर्य-मंगल छठे भाव में: निडरता, लंबी आयु और संघर्ष में जीत

सूर्य और मंगल का छठे भाव में होना आपको निडर बनाता है, लंबी आयु देता है और सरकारी मामलों व झगड़ों में जीत दिलाता है।

सूर्य-केतु छठे भाव में: सरकारी लाभ और शत्रुओं पर विजय

सूर्य और केतु का छठे भाव में होना आपको सरकारी महकमों में सफलता और शत्रुओं पर विजय दिला सकता है। यह आपके बच्चों और पिता के लिए भी शुभ हो सकता है।

शनि-राहु छठे भाव में: धन, शत्रु पर विजय और स्वास्थ्य

छठे भाव में शनि और राहु धनवान बनाते हैं और दुश्मनों पर विजय दिलाते हैं, लेकिन स्वास्थ्य और परिवार के लिए कुछ चुनौतियाँ ला सकते हैं।

चंद्रमा-शुक्र छठे भाव में: संतान, स्वास्थ्य और शत्रु पर प्रभाव

छठे भाव में चंद्रमा और शुक्र की युति संतान, स्वास्थ्य और शत्रुओं पर शुभ-अशुभ प्रभाव डाल सकती है। जानें इसके परिणाम।

चंद्रमा-मंगल छठे भाव में: शादी के बाद तरक्की और बच्चों से जुड़ी चुनौतियाँ

शादी के बाद तरक्की मिलती है लेकिन बच्चों से जुड़ी चुनौतियाँ हो सकती हैं। समाज में मान-सम्मान मिलता है और लंबी उम्र होती है।

चंद्रमा-केतु छठे भाव में: निडर बच्चे, शत्रु पर विजय

चंद्रमा और केतु की छठे भाव में युति से बच्चे निडर और धनवान होते हैं, दुश्मनों पर जीत मिलती है, लेकिन स्वास्थ्य और परिवार में कुछ चुनौतियाँ आ सकती हैं।

बुध-केतु छठे भाव में: बच्चे, धन और शिक्षा

बुध और केतु छठे भाव में मिलकर आपके बच्चों को मजबूत बनाते हैं, धन लाते हैं और आपको उच्च शिक्षा देते हैं। जानें इसके अच्छे और बुरे प्रभाव।

बृहस्पति-शुक्र छठे भाव में: सौभाग्य और संतान सुख

बृहस्पति और शुक्र का छठे भाव में होना आपको और आपकी संतान को सौभाग्य दे सकता है। पत्नी की सेवा और सोने की क्लिप पहनने से लाभ होगा।

बृहस्पति-राहु छठे भाव में: धन, शत्रु पर विजय और लंबी आयु

बृहस्पति और राहु का छठे भाव में होना धन, शत्रुओं पर विजय और लंबी आयु दे सकता है, लेकिन कुछ नकारात्मक प्रभाव भी हो सकते हैं।

शुक्र-मंगल पांचवें भाव में: संतान, व्यापार और नैतिकता पर प्रभाव

पांचवें भाव में शुक्र और मंगल की युति संतान, व्यापार और नैतिक मूल्यों पर शुभ और अशुभ दोनों तरह के प्रभाव डालती है।

शुक्र-केतु पांचवें भाव में: प्रेम, संतान और नैतिकता

पांचवें भाव में शुक्र और केतु की युति आपको प्रेम, संतान और धन के मामलों में शुभ-अशुभ फल दे सकती है। जानें इसके प्रभाव और उपाय।

सूर्य-शुक्र पांचवें भाव में: संतान, धन और सम्मान

सूर्य और शुक्र के पांचवें भाव में होने से जातक को संतान, धन और समाज में सम्मान मिलता है। हालांकि, कुछ मामलों में यह संबंध चुनौतियां भी ला सकता है।

सूर्य-राहु पाँचवें भाव में: संतान सुख और सरकारी कृपा

सूर्य और राहु की यह युति संतान सुख और सरकारी मामलों में अच्छे परिणाम देती है। यह आपको छोटे कर्मचारी बनने से बचाती है।