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संतान · 242

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बृहस्पति-मंगल आठवें भाव में: आराम, बदनामी और कर्ज़

बृहस्पति और मंगल की आठवें भाव में युति परिवार को आराम दे सकती है, लेकिन बदनामी, कर्ज़ और संतान संबंधी समस्याएँ भी ला सकती है।

शुक्र-केतु सातवें भाव में: वैवाहिक जीवन, संतान और धन पर प्रभाव

शुक्र और केतु के सातवें भाव में होने से वैवाहिक जीवन, संतान और धन पर क्या अच्छे-बुरे प्रभाव पड़ सकते हैं, जानें विस्तार से।

शनि-राहु सातवें भाव में: धन, संतान और स्वास्थ्य

सातवें भाव में शनि और राहु का मेल धन, संतान और स्वास्थ्य पर अलग-अलग प्रभाव डालता है। जानिए क्या हो सकते हैं शुभ और अशुभ परिणाम।

चंद्रमा-केतु सातवें भाव में: धन, पत्नी और बच्चों पर प्रभाव

चंद्रमा और केतु की युति सातवें भाव में धन, वैवाहिक जीवन और बच्चों पर मिले-जुले प्रभाव डालती है। जानें इसके अच्छे और बुरे असर।

बुध-केतु सातवें भाव में: व्यापार, विवाह और संतान पर प्रभाव

सातवें भाव में बुध और केतु की युति व्यापार में लाभ, विदेश में विवाह और परिवार के लिए भाग्यशाली हो सकती है, लेकिन गलत सोच और वैवाहिक जीवन में परेशानी भी दे सकती है।

बृहस्पति-बुध सातवें भाव में: मिले-जुले परिणाम और चुनौतियाँ

सातवें भाव में बृहस्पति और बुध का संयोजन मिले-जुले परिणाम देता है। इससे बच्चों से परेशानी, वित्तीय उतार-चढ़ाव और रिश्तों में चुनौती आ सकती है।

बृहस्पति-केतु सातवें भाव में: पुत्र और वैवाहिक जीवन से कष्ट

बृहस्पति और केतु की युति सातवें भाव में पुत्र और वैवाहिक जीवन से कष्ट दे सकती है। यह आर्थिक नुकसान और सरकारी अपमान का कारण बन सकती है।

शुक्र-शनि छठे भाव में: धन, संतान और कानूनी मामले

छठे भाव में शुक्र और शनि की युति धन, परिवार, सरकारी लाभ और शत्रुओं पर विजय दिला सकती है, लेकिन संतान, स्वास्थ्य और कानूनी मामलों में चुनौतियाँ आ सकती हैं।

शुक्र-राहु छठे भाव में: धन, शत्रु और संतान पर प्रभाव

जानें शुक्र और राहु के छठे भाव में होने से धन, शत्रु और संतान पर क्या शुभ-अशुभ प्रभाव पड़ते हैं, और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

शुक्र-बुध छठे भाव में: शाही योग और स्वास्थ्य चुनौतियाँ

छठे भाव में शुक्र और बुध का योग राजयोग बनाता है, लेकिन यह स्वास्थ्य, संतान और कानूनी मामलों में चुनौतियाँ ला सकता है।

शुक्र-मंगल छठे भाव में: धन, संतान और शत्रु पर विजय

छठे भाव में शुक्र और मंगल की युति से धन लाभ, संतान सुख और शत्रुओं पर विजय मिल सकती है, लेकिन कुछ स्वास्थ्य और पारिवारिक चुनौतियां भी आ सकती हैं।

शुक्र-केतु छठे भाव में: बच्चे, व्यापार और वैवाहिक जीवन

छठे भाव में शुक्र और केतु की युति बच्चों, व्यापार और वैवाहिक जीवन पर शुभ-अशुभ प्रभाव डालती है। जानें इसके परिणाम और उपाय।

सूर्य-शुक्र छठे भाव में: सरकारी लाभ, संतान और स्वास्थ्य

सूर्य और शुक्र के छठे भाव में होने से सरकारी कामों में जीत, संतान के बाद भाग्य में वृद्धि, और शत्रुओं पर विजय मिलती है। हालांकि, संतान संबंधी चिंताएं और स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं।

सूर्य-चंद्रमा छठे भाव में: दूर जन्म, सम्मान और बच्चों के बाद भाग्य

सूर्य और चंद्रमा की छठे भाव में युति से व्यक्ति का जन्म घर से दूर हो सकता है, समाज में सम्मान मिलता है और बच्चों के जन्म के बाद भाग्य चमकता है।