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सूर्य-केतु सातवें भाव में: वैवाहिक जीवन, संतान और धन पर प्रभाव

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किसी भी घर में ग्रहों के अच्छे और बुरे प्रभाव इस प्रकार होते हैं:

  • सब कुछ होने के बावजूद, आप हमेशा दुखी रहते हैं और यह आपकी संतान (बच्चों) का मनोबल (हिम्मत) तोड़ देता है.
  • आपके बच्चों की संख्या आपके जीवनसाथी के भाई-बहनों जितनी हो सकती है; बच्चे बहुत बहादुर और निडर होते हैं.
  • 40 साल की उम्र तक पैसा अच्छी तरह बढ़ता है; शरीर के निजी अंग पर शहद के रंग का तिल हो सकता है.
  • आप एक अहंकारी (घमंडी) लेखक हो सकते हैं; पत्नी शर्मीली और शांत स्वभाव की होती है; शादी के बाद किस्मत चमकती है.
  • ससुराल वालों के लिए शुभ (अच्छा) होता है; व्यापारिक साझेदार (पार्टनर) लाभ (फायदा) देता है; झगड़ों में सुलह (समझौता) करवाता है.
  • व्यापार में धैर्य (सब्र) से काम लेना चाहिए.

बुरे प्रभाव:

  • शादी देर से होती है और आप जीवनसाथी के अधीन (कंट्रोल में) रहते हैं; जीवनसाथी को टी.बी., एड्स जैसी बीमारियां हो सकती हैं.
  • जीवनसाथी से दूरी या अलगाव (अलग होना); आंखों की समस्या, सफेद दाग हो सकते हैं; सरकार द्वारा परेशान किया जा सकता है.
  • व्यापार में गर्म दिमाग से काम लेना; बुराई दूर तक फैल सकती है.
  • पहली पत्नी से दुख मिलता है, दूसरी बीमार हो सकती है: आप व्यभिचारी (चरित्रहीन) हो सकते हैं; कड़वे शब्द निकलते हैं.
  • झूठे वादे बीमारियों का कारण बन सकते हैं; मां के मायके वालों की हालत 7 साल तक खराब रह सकती है.
  • पैसा बहुत बर्बाद होता है, तरक्की 34 साल के बाद शुरू होती है; दूसरा बेटा पूरी तरह मूर्ख हो सकता है.
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