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बृहस्पति-राहु की युति: राजा से फकीर और फकीर से राजा

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जब बृहस्पति और राहु का मेल होता है (जिसे लाल किताब में बुध के साथ शेर और हाथी की लड़ाई कहा गया है):

आप अपने वचन (कही हुई बात) के पक्के होते हैं और अगर कोई सामना हो जाए तो आप झुकते नहीं, भले ही आपके शरीर पर चोटें लगें. आपकी जिंदगी में दो रंग दिखते हैं - कभी आप राजा जैसे होते हैं, कभी फकीर जैसे. कभी आप उम्मीद से भरे होते हैं, कभी निराश. 12 साल के एक चक्र (समय) के बाद का समय थोड़ा मुश्किल हो सकता है, चारों ओर गरीबी जैसा माहौल हो सकता है. जब शेर और हाथी सोए हुए हों, तो वे अपनी नींद में ही चलते हुए ग्रहों की चाल के हिसाब से आपके रिश्तेदारों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं.

आपकी 17 से 24 साल की उम्र का समय अच्छा बीत सकता है. 25वें साल में आपकी शादी भी अच्छे फल दे सकती है. 28वें साल से कुछ ग्रहों (बुध 17, सूर्य 20, चंद्रमा 22, मंगल 24, बृहस्पति 28) का समय बृहस्पति को मदद पहुंचाना शुरू कर सकता है. 36 साल की उम्र में शनि के समय में धन-संपत्ति ज्यादा इकट्ठी होनी शुरू हो सकती है. 48 साल की उम्र तक आपको संतान का सुख मिल सकता है और उसके बाद का समय ठीक ही बीत सकता है.

इसका मतलब यह है कि अगर आपका जन्म किसी राजा के घर हो, तो आप साधु-फकीर बन सकते हैं, और अगर आपका जन्म किसी गरीब के घर हो, तो आप राजा के समान यानी अमीर बन सकते हैं. यह पूरा बदलाव आपके बेटे के जन्म के बाद शुरू हो सकता है.

जब ये दोनों ग्रह मिलते हैं, तो एक दिखावटी (नकली) बुध बनता है, जो सिर्फ खोखली (बेकार की) प्रसिद्धि (शोहरत) देता है.

  • जब दोनों ग्रह 7वें या 12वें भाव में हों, तो आप सिर्फ दुनियावी व्यक्ति होते हैं, आपको कोई ईश्वरीय शक्ति (भगवान की ताकत) नहीं मिलती.
  • जब दोनों ग्रह 1 से 6 भाव में होंगे, तो आपको ईश्वरीय शक्ति मिलती रह सकती है.

आप आराम से या गलत तरीके से कमाई करने के आदी हो सकते हैं, यानी आपको कभी मेहनत का काम करना ही नहीं पड़ सकता है. अगर करना भी पड़ जाए, तो भी आप कुछ करेंगे या करवाएंगे नहीं, बल्कि आपको मुफ्त में ही खाने के लिए अन्न मिल सकता है (इसे आप आराम की कमाई कहें या हराम की).

विभिन्न भावों (घरों) में बृहस्पति और राहु का फल:

  • पहला भाव: आपको कभी भी खाने-पीने की कमी नहीं हो सकती है. भले ही आपका जन्म किसी नीच (चांडाल) घर में हुआ हो, पेट भरने के लिए आपको सरकारी खजाने से धन मिलता रह सकता है.
  • दूसरा भाव: आप गरीबों की मदद करने वाले और अच्छे काम करने वाले हो सकते हैं. अगर किसी वजह से आप गरीब भी हो जाएं, तो भी आप हाथियों वाले साधु की तरह हो सकते हैं (यानी आपके पास कुछ न कुछ साधन रह सकते हैं).
  • तीसरा भाव: आप ज्यादा होशियार दुश्मनों से अपना बचाव करते रह सकते हैं. आप खुद भी शूरवीर (बहादुर) हो सकते हैं. राहु की आयु (10-21, 42 साल) के बाद इसका असर दिख सकता है.
  • चौथा भाव: आपको उत्तम (बहुत अच्छे) चंद्रमा के प्रभाव का पूरा लाभ मिल सकता है, लेकिन बृहस्पति अपने लिए चुप ही रहेगा (यानी खुद को ज्यादा फायदा नहीं पहुंचाएगा).
  • पांचवां भाव: आप हाकिम (अधिकारी) या सरदार (मुखिया) हो सकते हैं.
  • सातवां भाव: आपके ससुर या पिता में से केवल एक ही जीवित बच सकता है. जो बचेगा, उसे भी दमा (सांस की बीमारी) हो सकती है. आपकी जवानी आराम से बीत सकती है.
  • बारहवां भाव: यहां दोनों ग्रहों के होने पर सिर्फ बुध का खाली असर होता है. आप गुणवान (गुणी), बुद्धिमान हो सकते हैं. दस्तकारी (हाथ के काम) से आपको कोई खास लाभ नहीं हो सकता है. बाकी के भावों 6, 9, 10, 11 में अपना-अपना फल मिलेगा.

खराब हालात (जब बृहस्पति 6, 7, 10, 11 में हो और राहु 1, 2, 5, 7, 9, 10, 11 में हो):

आपके पिता की आयु और धन-संपत्ति के मामले में वही खराब असर हो सकता है, जो राहु के 11वें भाव में लिखा है. 8-12 और 16-21 साल की उम्र में आपके पिता को लकवा (अधरंग) हो सकता है. 42 साल की उम्र में सोने का नुकसान हो सकता है. राहु से जुड़े कारोबार और रिश्तेदारों का हाल खराब हो सकता है.

उपाय:
- बुरे समय में मंगल और केतु के उपाय मदद कर सकते हैं.
- शरीर पर सोना पहनना शुभ हो सकता है.
- यदि केतु (पुत्र, नालायक) खराब हो, तो चंद्रमा (गाता) के द्वारा (चंद्रमा का उपाय) मदद मिल सकती है.
- हौलेदारी (एक तरह का गहना) धारण करें. उसे गाय के झूठे पानी में 43 दिन तक धोएं. मंगल का दान करें.
- जौ को दूध से धोकर 43 दिन लगातार पानी में बहाएं.
- माता से आशीर्वाद के साथ चांदी लेकर अपने पास रखें.

विशेष स्थितियां और उपाय:

  • दूसरा भाव: यदि 8वें भाव में बृहस्पति और राहु के दुश्मन ग्रह हों, तो ऐसे खराब ग्रह संतान के जन्म में बाधा डाल सकते हैं.
  • तीसरा भाव: 34 साल की उम्र तक बुध और केतु दोनों का असर खराब हो सकता है.
  • पांचवां भाव: संतान के संबंध में वही असर हो सकता है, जो राहु के 5वें भाव में लिखा है.
  • सातवां भाव: आपके पिता और ससुर दोनों में से केवल एक ही जीवित बच सकता है. यदि दोनों जीवित हों, तो एक को दमा हो सकता है.
  • आठवां भाव: आपका जीवन केवल खानापूर्ति (समय काटना) हो सकता है, चारों ओर निराशा का माहौल बना रह सकता है.

उपाय:
- बृहस्पति के 8वें भाव में दिए गए उपाय मदद कर सकते हैं.

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