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बृहस्पति-केतु की युति: धन, संतान और भाग्य पर प्रभाव

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बृहस्पति + केतु (पीला नींबू, गुरु की गद्दी)

जब बृहस्पति और केतु मिलते हैं, तो दोनों का असर अच्छा हो सकता है. केतु अब गुरु की गद्दी का मालिक हो सकता है. आपके परिवार, धन और दौलत में बढ़ोतरी हो सकती है. बृहस्पति किसी का भला या बुरा नहीं करता, लेकिन केतु अपना छल (धोखा) नहीं छोड़ेगा. अब केतु (जो पुत्र का कारक है) अच्छे फल दे सकता है.

उपाय:
- 400 ग्राम पीले नींबू पानी में बहाना मददगार हो सकता है.

पहला भाव (नंबर 1):
- आप एक धर्मी (धार्मिक) राजा या योगी की तरह हो सकते हैं. आप जहां भी कदम रखेंगे, उस जगह को खुशहाल कर सकते हैं और हमेशा आराम पा सकते हैं.

दूसरा भाव (नंबर 2):
- अगर आठवां भाव (नंबर 8) खाली हो, तो यह बहुत अच्छा है. आपको गुरु (शिक्षक) या दरवेश (फकीर) की तरह उच्च पद (बड़ा ओहदा) मिल सकता है. लेकिन अगर आठवें, छठे या बारहवें भाव में शत्रु ग्रह (दुश्मन ग्रह) हों, तो आप निकम्मे (बेकार) हो सकते हैं.

चौथा भाव (नंबर 4):
- हालांकि यहां केतु मंदा (कमजोर) है, लेकिन बृहस्पति उच्च (मजबूत) है. इसलिए, संतान पर बुरा असर नहीं हो सकता है. आपको बहुत धन-संपत्ति मिल सकती है. आप अपनी माता या पिता के सेवक (सेवा करने वाले) या भक्त हो सकते हैं.

छठा भाव (नंबर 6):
- अगर दूसरा भाव (नंबर 2) खाली हो, तो आपके भाग्य का हाल मंदा (कमजोर) हो सकता है. वैसे, आप खुशी से जीवन बिता सकते हैं.

विशेष:
- आपको अपनी मृत्यु का पता पहले ही चल सकता है.

सातवां भाव (नंबर 7):
- आप निर्धन (गरीब) तपस्वी (साधु) हो सकते हैं, जो पेट से भूखा रहता है.

आठवां भाव (नंबर 8):
- आप दरिद्री (बहुत गरीब) हो सकते हैं.

बारहवां भाव (नंबर 12):
- आप बहुत अमीर हो सकते हैं.

मंदी हालात (जब बृहस्पति छठे, सातवें, दसवें, ग्यारहवें भाव में हो और केतु चौथे, छठे भाव में हो):
- जब दोनों ग्रहों की जड़ों (मूल भावों) पर उनके शत्रु ग्रह बैठे हों, तो 40 साल की उम्र तक शत्रु आपको परेशान करते रह सकते हैं.
- केतु की जड़: छठे भाव में चंद्र और मंगल.
- बृहस्पति की जड़: नौवें-बारहवें भाव में शुक्र, बुध या राहु-केतु. साथ ही, बृहस्पति से जुड़ी चीजें जैसे संतान, पिता, दादा का हाल मंदा (बुरा) रह सकता है.

उपाय:
- पीले नींबू धर्म स्थान (मंदिर) पर देना मददगार हो सकता है.

केतु और बृहस्पति की चीजें, जैसे संतान, पिता, दादा का हाल मंदा (बुरा) रह सकता है.

दूसरा भाव (नंबर 2):
- अगर आठवें भाव (नंबर 8) में शत्रु ग्रह हों, तो आप स्वार्थी (मतलबी) हो सकते हैं.

चौथा भाव (नंबर 4):
- नर संतान (लड़के) के जन्म में देरी हो सकती है.

छठा भाव (नंबर 6):
- अगर दूसरे भाव (नंबर 2) से केतु मंदा (कमजोर) हो और बृहस्पति कायम (मजबूत) हो, तो पहली संतान (लड़का या लड़की) शायद ही बचे.

छठा भाव (नंबर 6):
- अगर दूसरे भाव (नंबर 2) के मेल से केतु कायम (मजबूत) हो और बृहस्पति मंदा (कमजोर) हो, तो जीवन गुलामी (किसी के अधीन) में कट सकता है.

सातवां भाव (नंबर 7):
- आप तपस्वी (साधु) हो सकते हैं, लेकिन निर्धन (गरीब) हो सकते हैं. सातवें भाव में बृहस्पति का फल बहुत मजबूत हो सकता है.

आठवां भाव (नंबर 8):
- आप दरिद्री (बहुत गरीब) और निर्धन (गरीब) हो सकते हैं, जैसे कोई मृत आत्मा.

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