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बृहस्पति-राहु सातवें भाव में: पिता या ससुर में से एक का जीवित रहना

बृहस्पति और राहु के सातवें भाव में होने से पिता या ससुर में से केवल एक के जीवित रहने की संभावना हो सकती है।

बृहस्पति-चंद्रमा सातवें भाव में: व्यापार में लाभ और बचपन की मुश्किलें

सातवें भाव में बृहस्पति और चंद्रमा का मेल व्यापार में लाभ कराता है, लेकिन बचपन मुश्किल भरा हो सकता है और माता-पिता को परेशानी हो सकती है।

बृहस्पति-बुध सातवें भाव में: मिले-जुले परिणाम और चुनौतियाँ

सातवें भाव में बृहस्पति और बुध का संयोजन मिले-जुले परिणाम देता है। इससे बच्चों से परेशानी, वित्तीय उतार-चढ़ाव और रिश्तों में चुनौती आ सकती है।

शुक्र-बुध छठे भाव में: शाही योग और स्वास्थ्य चुनौतियाँ

छठे भाव में शुक्र और बुध का योग राजयोग बनाता है, लेकिन यह स्वास्थ्य, संतान और कानूनी मामलों में चुनौतियाँ ला सकता है।

शुक्र-मंगल छठे भाव में: धन, संतान और शत्रु पर विजय

छठे भाव में शुक्र और मंगल की युति से धन लाभ, संतान सुख और शत्रुओं पर विजय मिल सकती है, लेकिन कुछ स्वास्थ्य और पारिवारिक चुनौतियां भी आ सकती हैं।

सूर्य-शुक्र छठे भाव में: सरकारी लाभ, संतान और स्वास्थ्य

सूर्य और शुक्र के छठे भाव में होने से सरकारी कामों में जीत, संतान के बाद भाग्य में वृद्धि, और शत्रुओं पर विजय मिलती है। हालांकि, संतान संबंधी चिंताएं और स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं।

शनि-राहु छठे भाव में: धन, शत्रु पर विजय और स्वास्थ्य

छठे भाव में शनि और राहु धनवान बनाते हैं और दुश्मनों पर विजय दिलाते हैं, लेकिन स्वास्थ्य और परिवार के लिए कुछ चुनौतियाँ ला सकते हैं।

चंद्रमा-शनि छठे भाव में: धन और रिश्तों पर प्रभाव

चंद्रमा और शनि के छठे भाव में होने से अपनी मेहनत का धन शुभ होता है, पर कुछ रिश्तेदार और चंद्रमा-शनि से जुड़ी चीजें अशुभ हो सकती हैं।

चंद्रमा-राहु छठे भाव में: तरक्की, धन और शत्रु पर विजय

चंद्रमा और राहु का छठे भाव में होना व्यक्ति को तरक्की, धन और दुश्मनों पर जीत दिलाता है, लेकिन कुछ स्वास्थ्य और पारिवारिक चुनौतियां भी हो सकती हैं।

चंद्रमा-बुध छठे भाव में: माता-पिता का प्यार और व्यापार में सफलता

छठे भाव में चंद्रमा और बुध का योग माता-पिता के गहरे प्यार और कपड़ों के व्यापार में सफलता दिला सकता है। हालांकि, कुछ नकारात्मक प्रभाव भी संभव हैं।

चंद्रमा-केतु छठे भाव में: निडर बच्चे, शत्रु पर विजय

चंद्रमा और केतु की छठे भाव में युति से बच्चे निडर और धनवान होते हैं, दुश्मनों पर जीत मिलती है, लेकिन स्वास्थ्य और परिवार में कुछ चुनौतियाँ आ सकती हैं।

बृहस्पति-शुक्र छठे भाव में: सौभाग्य और संतान सुख

बृहस्पति और शुक्र का छठे भाव में होना आपको और आपकी संतान को सौभाग्य दे सकता है। पत्नी की सेवा और सोने की क्लिप पहनने से लाभ होगा।

बृहस्पति-सूर्य छठे भाव में: सरकारी लाभ और स्वास्थ्य पर प्रभाव

बृहस्पति और सूर्य के छठे भाव में होने से सरकारी कामों में सफलता मिल सकती है, लेकिन स्वास्थ्य और परिवार पर नकारात्मक असर भी हो सकता है।

शुक्र-बुध पांचवें भाव में: रोमांस और मित्रता पर प्रभाव

पांचवें भाव में शुक्र और बुध की युति जीवनसाथी के लिए अच्छी होती है, लेकिन यह आपके प्रेम संबंधों और दोस्ती को प्रभावित कर सकती है।

शुक्र-मंगल पांचवें भाव में: संतान, व्यापार और नैतिकता पर प्रभाव

पांचवें भाव में शुक्र और मंगल की युति संतान, व्यापार और नैतिक मूल्यों पर शुभ और अशुभ दोनों तरह के प्रभाव डालती है।

शुक्र-केतु पांचवें भाव में: प्रेम, संतान और नैतिकता

पांचवें भाव में शुक्र और केतु की युति आपको प्रेम, संतान और धन के मामलों में शुभ-अशुभ फल दे सकती है। जानें इसके प्रभाव और उपाय।

सूर्य-शुक्र पांचवें भाव में: संतान, धन और सम्मान

सूर्य और शुक्र के पांचवें भाव में होने से जातक को संतान, धन और समाज में सम्मान मिलता है। हालांकि, कुछ मामलों में यह संबंध चुनौतियां भी ला सकता है।