सूर्य-मंगल-बृहस्पति: तांबे का छेद वाला सिक्का गले में पहनने के फायदे
तांबे के सिक्के में छेद करके गले में पहनना
गले में छेद वाला तांबे का सिक्का पहनने का उपाय: लाल किताब का यह उपाय कैसे बदल सकता है आपकी किस्मत?
लाल किताब में धातुओं का शरीर और ग्रहों से सीधा संबंध बताया गया है। तांबा एक ऐसी पवित्र और ऊर्जावान (एनर्जी वाली) धातु है जिसका उपयोग पुराने समय से ही ग्रहों को संतुलित (बैलेंस) करने के लिए किया जाता रहा है। लाल किताब का एक बहुत मशहूर और पक्का उपाय है—तांबे के एक गोल सिक्के में बीच में छेद करवाकर उसे लाल या खाकी धागे में गले में पहनना।
यह उपाय उन लोगों के लिए खास तौर पर असरदार है जिनका सूर्य या मंगल ग्रह कमजोर होता है या जिन्हें समाज में मान-सम्मान की कमी महसूस होती है।
इस उपाय के पीछे का ज्योतिषीय रहस्य
- तांबा (Copper): तांबा धातु सूर्य ग्रह (Sun) का प्रतीक है। सूर्य आत्मा, पिता, मान-सम्मान, सरकारी नौकरी और लीडरशिप (नेतृत्व) का कारक (प्रतिनिधि) है।
- गोल आकार व छेद: गोल आकार और बीच का छेद मंगल (शुभ) और सुरक्षा चक्र को दिखाते हैं।
- लाल धागा: लाल रंग मंगल ग्रह की ऊर्जा को जोड़ता है।
जब आप इसे गले (जो कि बृहस्पति और कंठ का स्थान है) में पहनते हैं, तो सूर्य, मंगल और गुरु तीनों का अच्छा असर एक साथ मिलने लगता है।
इस उपाय के मुख्य 5 फायदे
- मान-सम्मान और प्रतिष्ठा (इज़्ज़त) में बढ़ोतरी: यदि आपको अपनी मेहनत का श्रेय (क्रेडिट) नहीं मिलता या समाज/कार्यस्थल पर आपको अनदेखा किया जाता है, तो यह उपाय सूर्य को मजबूत कर आपको समाज में पद और इज़्ज़त दिला सकता है।
- सरकारी नौकरी और प्रशासनिक (एडमिनिस्ट्रेटिव) कामों में सफलता: जो लोग सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं या सरकारी दफ्तरों में जिनके काम अटके हुए हैं, उनके लिए यह उपाय बहुत फायदेमंद है।
- आत्मविश्वास (Self-confidence) और इच्छाशक्ति (विल पावर) में बढ़ोतरी: यदि आपमें फैसले लेने की क्षमता कम है या डर और हिचकिचाहट रहती है, तो तांबा पहनने से मन में निडरता और ऊर्जा का संचार (बहाव) हो सकता है।
- स्वास्थ्य लाभ और हृदय/आंखों की सुरक्षा: सूर्य स्वास्थ्य का कारक है। इसे गले में पहनने से हृदय, हड्डियों और आंखों से जुड़ी समस्याओं में आराम मिल सकता है।
- नज़र दोष और ऊपरी बाधाओं (रुकावटों) से सुरक्षा: तांबे का सिक्का एक सुरक्षा कवच (ताबीज) की तरह काम करता है जो पहनने वाले को बुरी नज़र और नकारात्मक (नेगेटिव) ऊर्जा से बचा सकता है।
पहनने की सही विधि
- सामग्री: तांबे का एक गोल सिक्का लें और उसके केंद्र (बीच) में एक छेद करवा लें। इसे पिरोने के लिए लाल रंग का रेशमी या सूती धागा लें।
- दिन व समय: इसे रविवार (Sunday) की सुबह सूर्योदय (सूरज उगने) के समय पहनना चाहिए।
- विधि:
- शनिवार की रात सिक्के को कच्चे दूध और गंगाजल में भिगोकर रख दें।
- रविवार की सुबह नहाने के बाद सिक्के को साफ पानी से धो लें।
- लाल धागे में सिक्के को पिरोएं और सूर्य देव के सामने खड़े होकर 'ॐ सूर्याय नमः' का जप करें।
- इसके बाद इसे अपने गले में पहन लें, ताकि सिक्का आपकी छाती को छूता रहे।
ध्यान रखने योग्य बातें
- सिक्का शुद्ध तांबे का ही होना चाहिए, उसमें कोई और धातु मिली हुई न हो।
- धागा केवल लाल या खाकी (Khaki) रंग का ही उपयोग करें, काले धागे का उपयोग न करें।