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सूर्य-बुध की युति: धन, संतान और सरकारी संबंध

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सूर्य + बुध (बृहस्पति) (मंगल नेक)

आप अपने पैरों पर खड़े व्यक्ति होंगे.

शुक्र की महादशा में आपको धन और संतान मिल सकती है. आप दुकानदारी से तरक्की कर सकते हैं. 40 साल की उम्र में जब हालात खराब हों, तो संतान को परेशानी हो सकती है. अगर बुध अच्छा हो, तो सूर्य का तेज और बढ़ सकता है. अगर यह नीच (कमजोर) स्थान पर हो, तो कांच के सफेद जार (बर्तन) में लाल फिटकरी डालकर पानी में बहा दें.

पहले, दूसरे, सातवें और दसवें भाव (घर) में इन दोनों ग्रहों का फल बहुत अच्छा होता है. ये दोनों ग्रह 39 साल की उम्र तक साथ रहते हैं. जिन भावों में सूर्य नीच और कमजोर होता है, वहां बुध का असर भी कमजोर होगा, लेकिन जहां बुध नीच और कमजोर होता है, वहां सूर्य का असर कमजोर नहीं होता. इसका मतलब है कि बुध से जुड़ी चीजें सूर्य की मदद करती हैं.

विशेष (खास बात): जब शनि इन दोनों ग्रहों को देखता हो, तो शनि से जुड़े कारोबार से आपको 27-33 और 36-39 साल की उम्र में फायदा हो सकता है, लेकिन सरकारी ठेकेदारी या नौकरी के नतीजे अच्छे नहीं होंगे.

अगर सूर्य मनुष्य की आत्मा है, तो बुध विधाता (भगवान) की कलम है. अगर सूर्य बंदर है, तो बुध उसकी पूंछ है. इसलिए बुध हमेशा सूर्य की पूरी मदद करता रहेगा.

इन दोनों ग्रहों के मिलने का मतलब है (जब मंगल नेक हो) कि आप दूसरों की कमाई की ओर न देखकर अपनी कमाई पर संतोष (खुशी) करने वाले होंगे.

आपका संबंध सरकार से ठेकेदारी या नौकरी के कारण जरूर होगा और यह फायदेमंद भी होगा. आपकी उम्र लंबी होगी, लेकिन मृत्यु अचानक हो सकती है. लिखने का काम या कारोबार रात की रोशनी में (रात में काम करना) बहुत अच्छे नतीजे देगा.

आपकी किस्मत युवावस्था (जवानी) में जागेगी. आपकी पत्नी का चेहरा चौड़ा होगा. चेहरे की हड्डी पर चोट का निशान हो सकता है.

आप अपने पैरों पर खड़े व्यक्ति होंगे. आपकी सेहत अच्छी होगी.

अगर शनि तीसरे, चौथे या पांचवें भाव में हो, तो पिता और पुत्र के बीच कोई झगड़ा नहीं होगा.

पहला भाव: आप एक मंत्री की तरह सलाह देने वाले होंगे. आपकी किस्मत हरे-भरे पर्वत (पहाड़) जैसी होगी. सरकार से आपके अच्छे संबंध होंगे. सरकारी झगड़ों में फैसले आपके पक्ष में होंगे (जब तक शनि का बुरा असर साथ न हो).

दूसरा भाव: आपके शरीर और दिमाग पर अच्छा असर होगा. पहले भाव का असर भी साथ में होगा.

तीसरा भाव: राहु का बुरा असर अब आपकी कुंडली पर नहीं होगा. जब शुक्र नेक होता है, तो राहु बुरा असर डालता है.

चौथा भाव: आप सरकारी व्यापारी होंगे और बृहस्पति से जुड़ी चीजों के व्यापार से खूब धन-संपत्ति कमा सकते हैं. इन दोनों ग्रहों का अपना-अपना बहुत अच्छा असर होता है और शनि का कमजोर प्रभाव यहां जरूर साथ रहता है.

पांचवां भाव: बुध की अवधि (17 और 34 साल की उम्र) में संतान और पूर्वजों (पुरखों) पर कोई बुरा असर नहीं होगा.

छठा भाव: जब दूसरा भाव खाली हो, तो आप संतान से सुखी होंगे, राज्यसभा में सम्मानित होंगे और आपकी लेखनी (लिखने की शक्ति) में बल होगा.

सातवां भाव: यहां शुक्र का असर कमजोर होगा. संतान को भी कष्ट हो सकता है. शुक्र का अच्छा या बुरा असर शुक्र की अपनी स्थिति के अनुसार होगा. आपकी पत्नी सुंदर और धनी परिवार से होगी. भाग्य के लिए बहुत अच्छा होगा और धन मिलता रहेगा. आपकी कमाई से जंगल में मंगल (खुशी) हो सकती है. आप कष्टों (परेशानियों) की परवाह न करने वाले होंगे. बेशक आपकी जवानी इतनी अच्छी न कटे, लेकिन बुढ़ापा और बचपन अच्छा बीतेगा. शिक्षा, ज्योतिष का अभ्यास (प्रैक्टिस) अच्छे फल देंगे. केतु और बुध का असर 34 साल की उम्र के बाद ठीक होगा और बुध के असर से 34 साल की उम्र के बाद ही धन टिकेगा.

आठवां भाव: जब दूसरा भाव खाली हो, तो बुध का प्रभाव ठीक नहीं होगा.

उपाय (इलाज): शीशे के बर्तन में गुड़ भरकर श्मशान (कब्रिस्तान) में दबाना मददगार होगा. अब दोनों ग्रहों का वही प्रभाव होगा जो आठवें भाव में दिया गया है.

नवां भाव: सरकार के लिए दोनों ग्रहों का प्रभाव 24 साल की उम्र से शुरू होगा और अच्छे फल देगा. 34 साल की उम्र से और भी तरक्की करेगा. आपकी बेटी अपनी आय (कमाने) के 2, 3, 4, 5, 6 साल में आपको तरक्की देगी.

दसवां भाव: यहां बुध, शनि और सूर्य का अपना-अपना फल होगा और यह बहुत अच्छा होगा. पहले और दूसरे भाव के ग्रहों की मित्रता या दुश्मनी का असर भाग्य के फल में शामिल होगा. यदि पहला और दूसरा भाव खाली हो, तो सूर्य और बुध का फल बहुत अच्छा होगा. शनि का प्रभाव कुंडली में उसकी स्थिति के अनुसार होगा.

ग्यारहवां भाव: यदि आपके पुश्तैनी (पुरखों के) घर में अच्छे लोग रह रहे हों, जो धर्म-पूजा करने वाले हों, तो आपकी किस्मत हमेशा बढ़ेगी. यदि इसके उलट हो, तो किस्मत खराब होगी.

बारहवां भाव: दोनों ग्रहों का अपना-अपना फल होगा. जब तक आप सोना पहने रहेंगे, बुध का बुरा असर आप पर नहीं होगा. बुध के ग्यारहवें भाव का दिया फल उपाय मददगार होगा.

कमजोर हालात (सूर्य छठे, सातवें, दसवें भाव में; बुध तीसरे, आठवें, नौवें, दसवें, ग्यारहवें, बारहवें भाव में)

शुक्र का प्रभाव 25 साल की उम्र तक बेकार रह सकता है. बचपन में जायदाद (संपत्ति) के झगड़ों में फैसले आपके पक्ष में होंगे, यदि शनि न देखता हो तो.

विशेष (खास बात): जब सूर्य नीच या कमजोर भावों में हो, तो बुध का प्रभाव कमजोर होगा और व्यापार में हानि हो सकती है.

जब चंद्रमा खराब हो, तो दिमागी परेशानियां हो सकती हैं.

जब दोनों की जड़ें (मूल स्थिति) तीसरे, छठे भाव में हों, बुध की जड़ पांचवें भाव में हो, और सूर्य की जड़ चंद्रमा या बृहस्पति हो, तो नतीजे कमजोर ही होंगे.

पहला भाव: सरकार में जब भी झगड़ा होगा, वह आपसे बड़े लोगों के साथ होगा. यदि उस समय साल के फल के अनुसार शनि का साथ मिल जाए, तो नतीजे उलट होंगे.

दूसरा भाव: भाग्य के लिए धन-संपत्ति का सुख हल्का ही होगा.

तीसरा भाव: यदि कमजोर प्रेमी हो, तो राहु और शुक्र दोनों का असर बुरा होगा. 17 और 34 साल की उम्र में नुकसान जरूर होगा.

पांचवां भाव: मृत्यु अचानक होगी.

छठा भाव: यदि सूर्य की दृष्टि से दूसरा भाव कमजोर हो, तो दोनों ग्रहों का अच्छा प्रभाव कम हो जाएगा. आपको मनहूस (बदकिस्मत) और अपमानित जीवन काटना पड़ सकता है. उम्र का भी कोई भरोसा नहीं होगा.

सातवां भाव: शुक्र (पत्नी) को सुख नहीं मिलेगा. संतान (केतु) कमजोर होगी. ससुराल बर्बाद हो सकता है. 34 साल की उम्र तक बुध सूर्य के प्रभाव को कम करता रहेगा या नौवें भाव के ग्रह की अवधि तक लोगों में अविश्वास और नफरत पैदा करवा देगा, जबकि नौवें भाव में बुध के शत्रु ग्रह चंद्रमा, मंगल, बृहस्पति हों.

आठवां भाव: दूसरे भाव के ग्रह बर्बाद होंगे, चाहे कोई भी हो. बुध से जुड़ी चीजें, कारोबार और रिश्तेदारों पर बुरा असर होगा. यदि मंगल खराब हो, तो आप बेरहम (निर्दयी) होंगे, लड़ाई-झगड़े होते रहेंगे. मृत्यु शायद लड़ाई में ही हो जाए.

नवां भाव: जब बुध कमजोर हो, तो 17-27 साल की उम्र तक बुरा असर देता रहेगा. कोई न कोई मुसीबत खड़ी रहेगी. बेटा 34 साल की उम्र से पहले शायद ही पैदा हो. पत्नी की कुंडली में 22 साल की उम्र से पहले शायद ही संतान हो.

उपाय (इलाज): सूर्य या मंगल को अच्छा कर लेना चाहिए. यदि मंगल या रविवार को बेटी जन्म ले, तो किसी उपाय की जरूरत नहीं है.

दसवां भाव: शनि का कमजोर असर साथ जरूर होगा. आप बदनामी से मशहूर होंगे. आप अपने काम खुद ही बिगाड़ लेंगे.

ग्यारहवां भाव: जब आपके पुश्तैनी घर में बुरे लोग रहेंगे, तो आप पर बुरा असर अपने आप पड़ना शुरू हो जाएगा.

बारहवां भाव: गृहस्थी (पारिवारिक) हालात में बुध से जुड़ी चीजें (रिश्तेदार) फिजूलखर्ची (बेकार खर्च) का बहाना बनेंगे. शरीर की नसों में खराबी और मिर्गी तक हो सकती है. बुध अब छठे भाव के ग्रहों को बर्बाद कर देगा.

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