सूर्य-चंद्रमा नवें भाव में: बुरे प्रभाव
जब दोनों ग्रह एक ही भाव (घर) में हों, तो उनके बुरे प्रभाव इस प्रकार हो सकते हैं:
जब दोनों ग्रह एक ही भाव (घर) में हों, तो उनके बुरे प्रभाव इस प्रकार हो सकते हैं:
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सूर्य, चंद्रमा, बुध और केतु की युति पिता के लिए बहुत मुश्किल भरी हो सकती है, जिससे उन्हें दुख या डूबने का खतरा हो सकता है.
यह युति माता-पिता को नेक विचारों वाला बनाती है और आप भाग्यशाली होते हैं।
बृहस्पति और राहु की नवें भाव में युति व्यक्ति को धार्मिक, भाग्यशाली और संतान सुख प्रदान करती है, लेकिन कुछ नकारात्मक प्रभाव भी हो सकते हैं।
बृहस्पति और सूर्य का नौवें भाव में होना धन, खुशी और सम्मान लाता है। आप परोपकारी होते हैं और मेहनत से अपना भाग्य चमकाते हैं।
मंगल और राहु की नौवें भाव में युति आपके भाइयों से संबंध, लंबी उम्र और धन-दौलत पर असर डालती है, लेकिन पिता को कष्ट और बदनामी भी दे सकती है।
लाल किताब के अनुसार कुछ ग्रहों की स्थिति में मंदिर जाना या कुछ खास चीज़ों का दान करना आपके लिए बुरा हो सकता है। जानें कब बचें।
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