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बृहस्पति-सूर्य-केतु की युति: शुभ-अशुभ फल

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जब सूर्य पांचवें भाव में होता है, तो यह अच्छी स्थिति मानी जाती है। बाकी भावों में सूर्य का प्रभाव जातक (आप) के लिए ज़्यादातर क्षेत्रों में बहुत परेशान करने वाला हो सकता है। कुछ हद तक, हर व्यक्ति पर अलग-अलग प्रभाव भी लागू होते हैं।

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