बृहस्पति-बुध की युति: धन, स्वास्थ्य और संतान पर प्रभाव
बृहस्पति + बुध
अगर बुध बृहस्पति के घरों में बैठा हो, या उसके साथ बैठा हो, तो यह ठीक होता है. लेकिन अगर बुध बृहस्पति को अपनी दृष्टि (1-7, 4-10 या 5-11) से देख रहा हो, तो बृहस्पति कैद हो जाता है. अगर बुध चंद्रमा से पहले 3, 5, 9-12 भावों (घरों) में बैठा हो, तो वह अपना ज़हर (विष) फैलाता रहेगा, जिसका असर 50 साल तक रह सकता है. अगर शनि या सूर्य में से कोई भी 2, 5, 1, 9-12 भावों (जो बृहस्पति के पक्के घर हैं) में बैठा हो, तो जब भी बृहस्पति 5, 10 या 11 भाव में आएगा, उसे कैद से छुटकारा मिल सकता है.
बृहस्पति और बुध के इकट्ठे समय में, पिता के लिए बुध का प्रभाव नीचे दिया गया हो सकता है:
- नंबर 2 - धन का नुकसान
- नंबर 3 - बुद्धिमान (समझदार) लेकिन गरीब (निर्धन) फ़कीर
- नंबर 4 - उदास (मायूस)
- नंबर 5 - रोज़गार (रिजक) में परेशानी
- नंबर 9 - धन का नुकसान
- नंबर 11 - बर्बादी हो सकती है
आठ साल की उम्र से 25 साल की उम्र तक माता-पिता दुखी रह सकते हैं, दृष्टि के कारण.
खास बात:
- जब बृहस्पति 1 से 6 भावों तक हो और बुध उसके बाद के भावों में हो, तो बृहस्पति 34 साल की उम्र तक अच्छा असर देगा.
- और जब इसका उल्टा हो, यानी बृहस्पति 7 से 12 भावों तक हो, तो बुध का बुरा असर 25 साल की उम्र से ही शुरू हो सकता है.
- जब बुध 1 से 6 भावों तक हो, तो बुध का अच्छा असर 34 साल की उम्र तक हो सकता है.
- जब बुध 7 से 12 भावों तक हो, तो 25वें साल से बुध का बुरा असर शुरू हो सकता है.
- अगर बुध अकेला या दोनों 2 और 4 भावों में हों, तो यह दुश्मनी (शत्रुता) की तुलना में हमेशा अच्छा असर देगा. आपकी आर्थिक स्थिति ठीक रह सकती है.
- नंबर 1 - आप एक चक्रवर्ती राजा की तरह (एक चक्र का असर) 12 सालों तक श्रेष्ठ (सबसे अच्छे) हो सकते हैं.
- नंबर 2 - आप ब्रह्म ज्ञानी (ईश्वर को जानने वाले), उपदेशक (ज्ञान देने वाले), धनी (अमीर) (तीन चक्र का असर) 36 सालों तक श्रेष्ठ हो सकते हैं.
- नंबर 3 - आप चतुर (चालाक), गंभीर, बहादुर हो सकते हैं, लेकिन शुक्र मंदा (कमज़ोर) हो सकता है.
- नंबर 4 - राजयोग बनाने वाला, बहुत अच्छा हो सकता है, लेकिन अगर आप कायर (डरपोक) हों या पाप करें, तो बहुत बुरा हो सकता है (2 चक्र का असर). 24 सालों तक श्रेष्ठ हो सकता है.
- नंबर 5 - अगर आपकी संतान गुरुवार को पैदा हो, तो आप खुशहाल (खुशहाल), भाग्यवान (किस्मत वाले) हो सकते हैं (5 चक्र का असर). 60 सालों तक श्रेष्ठ हो सकता है.
- नंबर 6 - आप पूजा-पाठ करने वाले हो सकते हैं.
- नंबर 7 - यह बेटियों (कन्याओं) के लिए ठीक हो सकता है, लेकिन बेटों के लिए निकम्मा (बेकार) हो सकता है. गोद लिया हुआ बेटा भी सुखी नहीं रह सकता है, धन का नुकसान हो सकता है.
- नंबर 8 - जब 2 नंबर का भाव खाली हो, तो बुध कभी बुरा असर नहीं देगा.
- नंबर 10 - आप खुशहाल और भाग्यवान हो सकते हैं.
- नंबर 11 - जब 3 नंबर का भाव मंदा हो, तो वर्षफल (सालाना फल) के अनुसार, जब दोनों 1 नंबर के भाव में आएं, तो 11, 23, 36 साल की उम्र में आपको धन मिल सकता है. आप शर्मीले, नेक नाम (अच्छी इज़्ज़त वाले), सुखी गृहस्थी (परिवार वाले) और गुणवान (गुणों से भरे) हो सकते हैं.
- नंबर 12 - आपकी उम्र लंबी (दीर्घायु) हो सकती है, लेकिन आप एक साधारण से व्यापारी हो सकते हैं.
खराब हालात (जब बृहस्पति 6, 7, 10, 11 भावों में हो; बुध 3, 8, 9, 10, 11, 12 भावों में हो)
अगर किसी वजह से ये दोनों ग्रह ऐसे भावों में बैठ जाएं जहाँ इन्हें नीच (कमज़ोर) माना गया है, और शत्रु ग्रह की दृष्टि में या टक्कर में आ जाएं, तो बृहस्पति (जो बाबा, पिता, ससुर को दर्शाता है) को सांस की बीमारी हो सकती है. आपकी बोलने की शक्ति कम हो सकती है, पैतृक (पुरखों से मिली) सुख की कमी हो सकती है. आप अपनी ही नाव डुबाने वाले नाविक (मल्लाह) हो सकते हैं, आपका परिवार आप पर भारी पड़ सकता है, और आपका जीवन अपमानित (बेइज़्ज़ती भरा) हो सकता है.
- नंबर 1 - आप गरीबी (निर्धनता) से परेशान एक मूर्ख (बेवकूफ) साधु हो सकते हैं.
- नंबर 2 - शुक्र का असर मंदा (खराब) हो सकता है.
- नंबर 4 - आप पाप वाले काम कर सकते हैं, कायर (डरपोक) हो सकते हैं, ईर्ष्यालु (जलन करने वाले) हो सकते हैं.
- नंबर 6 - आप अय्याश (ऐशो-आराम पसंद) तबीयत के हो सकते हैं.
- नंबर 7 - आप संतान से वंचित (बिना संतान के) हो सकते हैं, दुखी, गरीब हो सकते हैं. अगर आप अमीर भी हों, तो दूसरों के कष्टों (परेशानियों) से दुखी रह सकते हैं, कभी राजा और कभी फकीर हो सकते हैं.
खास बात: बेटियों (कन्याओं) की कुंडली में यह अच्छा असर देगा.
- नंबर 8 - आपको हमेशा बीमारी लगी रह सकती है.
उपाय:
- खांड (शक्कर) से भरा बर्तन मिट्टी में दबाएं.
- नाक छिदवाएं और उसमें चांदी का तार कम से कम 96 घंटे या 96 दिन तक डाले रखना अच्छा असर देगा. 16 से 19 साल की उम्र का समय कष्ट में हो सकता है.