सूर्य-चंद्रमा के साथ शुक्र-बुध या पापी ग्रह: स्वास्थ्य पर प्रभाव
रोग (बीमारी)
बीमारी से जुड़ी जानकारी जानने के लिए तीसरे, नौवें और पांचवें भाव (घर) का अध्ययन (जांच) करना बहुत ज़रूरी है. क्योंकि तीसरा भाव बर्बादी देता है, पांचवां भाव शरीर में आत्मा डालता है और इनकी नींव (आधार) नौवें भाव में होती है.
जब तीसरा और नौवां भाव नीच (खराब) होते हैं, तो पांचवां भाव भी नीच हो सकता है. लेकिन जब नौवें भाव में सूर्य या चंद्र हों, तो पांचवां भाव नीच नहीं होता.
दसवें भाव के लिए पांचवें और छठे भाव के ग्रह ज़्यादा बुरे हो सकते हैं. बुरी आदत की निशानी नीच ग्रह की चीज़ों से हो सकती है.
खास बात: जब नीच ग्रहों की चीज़ों से संपर्क (तालमेल) बना लिया जाए, तो हालत खराब हो सकती है.
जन्म कुंडली के अनुसार, जब सूर्य या चंद्र के साथ शुक्र, बुध या कोई पापी ग्रह (खराब ग्रह) बैठा हो और जिस समय वर्षफल (सालाना कुंडली) में वे पहले, छठे, सातवें, आठवें या दसवें भाव में आ जाएं, तो सेहत खराब हो सकती है.
तीसरे भाव के लिए:
- पहला भाव अचानक चोट दे सकता है.
- छठा भाव धोखा दे सकता है.
- आठवां भाव नीच (खराब) करवा सकता है.
- दूसरा भाव साझी दीवार का काम दे सकता है.
- सातवां भाव बुनियादी (मूल) सहायक हो सकता है.
- ग्यारहवां भाव आपसी सहायता दे सकता है.
पांचवें भाव के लिए:
- पहला भाव आपसी सहायता दे सकता है.
- सातवां भाव अचानक चोट दे सकता है.
- नौवां भाव बुनियादी (मूल) सहायक हो सकता है.
- चौथा भाव साझी दीवार का काम दे सकता है.
- आठवां भाव धोखा दे सकता है.
- दसवां भाव मंदा (खराब) टकराव दे सकता है.