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सूर्य-चंद्रमा की युति: धन, आयु और पारिवारिक सुख

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सूर्य + चंद्र (बड़ के पेड़ का शुद्ध दूध, अलीची का फल)

आपकी आयु का स्वामी सूर्य है और माया (धन) का स्वामी चंद्र (चमकते मोती जैसा) है. इन दोनों का एक साथ प्रभाव 40 साल की उम्र तक अच्छा होगा. आपकी बुढ़ापे की ज़िंदगी खास तौर पर अच्छी बीतेगी. आपको पुश्तैनी जायदाद (पुरानी संपत्ति) का अच्छा फल मिलेगा. आपकी गृहस्थी (पारिवारिक जीवन) में आराम शनि ग्रह से मिलेगा. अच्छी नौकरी मिल सकती है, खासकर तब जब बुध और बृहस्पति पहले घरों में हों और अपनी दृष्टि (नज़र) से चंद्र को देख रहे हों (जैसे 1-7, 4-10, 5-11 भावों से). ऐसे में सूखे कुएं भी पानी देने लगते हैं (मतलब धन में बढ़ोतरी होती है).

उपाय:
- 400 ग्राम अलीची को बहते पानी में बहा दें. लेकिन अगर 10वां घर खाली है, तो दूसरे घर (धर्मस्थान) पर देना ज़्यादा मददगार होगा.

नंबर 1 (पहला घर):
- आप राजा के समान होंगे जो दूसरों से कर (टैक्स) वसूल कर सकता है.

नंबर 2 (दूसरा घर):
- दोनों ग्रहों का फल अच्छा होगा. आपको राज्य (सरकार) से तरक्की मिलेगी और मान-सम्मान भी पूरा मिलेगा, बशर्ते (शर्त यह है कि) मुकाबले में स्त्रियां न हों.

नंबर 3 (तीसरा घर):
- आप अपने लिए अच्छे होंगे, लेकिन दूसरों के लिए स्वार्थी (मतलबी) हो सकते हैं.

नंबर 4 (चौथा घर):
- आप राजा-महाराजा जैसे हो सकते हैं. आपको सीप में मोती जैसा सुख मिलेगा. दुनिया और सवारी (वाहन) का पूरा सुख मिलेगा, खासकर जब 10वां घर खाली हो.

नंबर 6 (छठा घर):
- अगर पापी ग्रहों (शनि, राहु, केतु) का साथ नहीं है, तो दोनों ग्रहों का अपना-अपना फल होगा. अगर दूसरा घर खाली है, तो माता या पिता के लिए बुरा हो सकता है. मंगल के उपाय करने से सूर्य उच्च (बलवान) हो सकता है.

नंबर 9 (नौवां घर):
- आपकी मातृ पक्ष (मां का परिवार) बलवान होगा. माता की सेवा करने से बहुत अच्छा फल मिलेगा. 20वें साल में तीर्थ यात्रा शुभ हो सकती है.

नंबर 12 (बारहवां घर):
- अगर दूसरे घर में शत्रु ग्रह बैठे हैं, तो वे ज़्यादा बुरा कर सकते हैं. वैसे दोनों ग्रहों का अपना-अपना प्रभाव होगा.

खराब हालत (मंदी हालत):
- अगर दोनों ग्रहों की जड़ों (मूल) पर चौथे या पांचवें घर में उनके शत्रु ग्रह या शनि, राहु, केतु, शुक्र हों, तो आप हर समय दुखी रह सकते हैं. आपको दिन-रात कष्ट (परेशानी) पर कष्ट मिल सकता है. बेशक आप धनी (अमीर) हों, लेकिन रात की नींद हराम हो सकती है. आपके खर्चे व्यर्थ (बेकार) के हो सकते हैं और यात्राएं भी व्यर्थ की हो सकती हैं.

नंबर 1 (पहला घर) में:
- आपकी मृत्यु अचानक हो सकती है.

नंबर 2 (दूसरा घर) में:
- स्त्रियों से झगड़ा और हानि (नुकसान) का डर हो सकता है.

नंबर 4 (चौथा घर) में:
- अगर 10वें घर में शनि हो, तो मृत्यु अचानक और पानी में डूबकर हो सकती है.

नंबर 6 (छठा घर) में:
- अगर दूसरे घर में राहु-केतु हों, तो आपकी आयु बहुत लंबी नहीं होगी, पर बहुत कम भी नहीं होगी.

नंबर 11 (ग्यारहवां घर) में:
- अगर आप शराब और मांस से दूर रहें, तो आपकी आयु लंबी हो सकती है.

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