बृहस्पति-शुक्र की युति: प्रेम, संतान और धन पर असर
बृहस्पति + शुक्र (केतु स्वभाव) (दिखावे का धन)
इन दोनों ग्रहों का अच्छा या बुरा असर (जो भी कुंडली के हिसाब से हो) पहले बृहस्पति का होगा और बाद में शुक्र का होगा। इन दोनों का मिला-जुला असर 32 साल तक रहेगा। आप प्यार में बहुत सफल हो सकते हैं। आप हमेशा दुख और बीमारियों से बचे रहेंगे। आपको हमेशा स्त्रियों से मदद मिलती रहेगी।
पहला भाव (खाना नंबर 1) - आपका जीवन जंगल में मंगल (खुशी) जैसा हो सकता है। अगर आपके परिवार (गृहस्थ) में पत्नी या पिता में से कोई एक ही जीवित हो, तो इसका अच्छा असर होगा।
दूसरा भाव (खाना नंबर 2) - आपको मिट्टी से जुड़े कामों से धन (सोना) मिल सकता है।
तीसरा भाव (खाना नंबर 3) - आप भाग्यवान (किस्मत वाले) हो सकते हैं। आप अपने भाइयों के लिए भी अच्छे हो सकते हैं। आपकी पत्नी एक मददगार साथी की तरह आपका साथ देगी।
चौथा भाव (खाना नंबर 4) - आपका कई स्त्रियों से संबंध हो सकता है। जिस स्त्री से आपको संतान हो, वह मर सकती है या आपसे अलग हो सकती है (यानी तलाक हो सकता है)।
पांचवां भाव (खाना नंबर 5) - आप पढ़ाई (विद्या) से बहुत धन कमा सकते हैं। आप शिक्षा और संतान के कारण आगे बढ़ सकते हैं।
छठा भाव (खाना नंबर 6) - अगर आपकी पत्नी अपने सिर के बालों में शुद्ध सोने का 'क्लिप' लगाए रखे, तो इससे संतान, धन और मान-सम्मान में बढ़ोतरी होगी।
सातवां भाव (खाना नंबर 7) - अगर बुध भी साथ हो, तो धन की कमी होने पर भी आप परेशान नहीं होंगे। बल्कि समय के साथ आप फिर से खुशहाल हो सकते हैं।
आठवां भाव (खाना नंबर 8) - धन-संपत्ति को छोड़कर बाकी संबंधों में असर ठीक ही हो सकता है। बृहस्पति का असर तीसरे भाव के बृहस्पति जैसा होगा और शुक्र का असर आठवें भाव के सूर्य जैसा होगा।
नवां भाव (खाना नंबर 9) - आपको दुनिया के सभी सुख मिल सकते हैं। दोनों ग्रहों का नौवें भाव के अनुसार अपना-अपना असर होगा। 20वें साल में तीर्थ यात्रा करना बहुत अच्छा हो सकता है।
दसवां भाव (खाना नंबर 10) - आपका चाल-चलन और स्वास्थ्य (सेहत) ठीक नहीं रह सकता है। लेकिन धन के मामले में बुरा नहीं होगा, बशर्ते वह आपका खुद का कमाया हुआ धन हो। पैतृक (पुरखों का) धन नष्ट हो सकता है। जब आप धर्म के खिलाफ काम करते हैं, तो धन हवा की तरह उड़ सकता है।
ग्यारहवां भाव (खाना नंबर 11) - दोनों ग्रहों का अपना असर होगा। दूसरे भाव का बृहस्पति अब मिट्टी जैसा हो सकता है।
बारहवां भाव (खाना नंबर 12) - आपको सभी तरह का पारिवारिक (गृहस्थी) सुख और आराम मिल सकता है। आप आध्यात्मिक (धार्मिक) हो सकते हैं।
खराब हालत (बृहस्पति 6, 7, 10, 11; शुक्र 1, 6, 9)
अगर आप हर समय प्यार (इश्क़) में डूबे रहते हैं, तो आपका भाग्य बर्बाद हो सकता है, सेहत खराब हो सकती है, संतान पैदा करने की शक्ति खत्म हो सकती है, और संतान के जन्म लेते ही दुख आने शुरू हो सकते हैं।
पहला भाव (नंबर 1) - आप खराब हालत वाले साधु की तरह गरीब (निर्धन) हो सकते हैं, आपका परिवार (गृहस्थ) बर्बाद हो सकता है।
दूसरा भाव (नंबर 2) - पुरुष की ओर से संतान पैदा करने में रुकावट (विघ्न) आ सकती है। दूसरे झगड़े हो सकते हैं, सोना राख बन सकता है।
तीसरा भाव (नंबर 3) - जब आपका भाग्य बहुत अच्छा होगा, तब साधारण लोग आपकी चापलूसी (खुशामद) करेंगे। यही चापलूसी आपकी बर्बादी का कारण बन सकती है।
चौथा भाव (नंबर 4) - संतान की हालत खराब हो सकती है। आपकी पत्नी एक बच्चा पैदा करने के बाद मर सकती है।
पांचवां भाव (नंबर 5) - अगर आप किसी पराई शादीशुदा स्त्री से संबंध रखते हैं, तो धन की चोरी, धन का नुकसान आदि कई घटनाएं हो सकती हैं।
छठा भाव (नंबर 6) - अगर आपके रिश्तेदार जीवित बचते हैं, तो वे आपके भाग्य को खराब कर सकते हैं। अगर आप अपनी पत्नी से दूर रहते हैं या उसका अपमान करते हैं, तो आपके परिवार की बढ़ोतरी (वृद्धि) में भी रुकावट आ सकती है।
सातवां भाव (नंबर 7) - घर के दूसरे सदस्य भले ही ऐश करें, लेकिन आप खुद बेचैन (बेआराम) रह सकते हैं। सातवें भाव के बृहस्पति का फल आपको मिलता रह सकता है। प्यार (इश्क़) बर्बादी का कारण बन सकता है। संतान की हालत भी खराब हो सकती है।
अगर मंगल चौथे भाव में हो, तो - बृहस्पति खराब हो सकता है। आपकी हालत सांड जैसी हो सकती है (यानी आप अकेले और बिना सहारे के हो सकते हैं), आपको संतान नहीं हो सकती है। गोद लिया हुआ बेटा भी आपको सुख नहीं दे पाएगा। आपके धन को भाई या कोई और खर्च कर सकता है।
नवां भाव (नंबर 9) - आपकी हालत खराब हो सकती है। आपकी पत्नी दुखी रह सकती है।
दसवां भाव (नंबर 10) - 13-15 साल की उम्र साधारण रह सकती है। गंदी से गंदी स्त्री भी आपके सोने को मिट्टी कर सकती है। आपका चाल-चलन खराब हो सकता है (पराई स्त्री आपको बर्बाद कर सकती है)। भाइयों से झगड़ा रह सकता है। संतान का दुख और पिता का दुख आम रह सकता है।
ग्यारहवां भाव (नंबर 11) - आपके भाग्य में सोने की जगह पीली मिट्टी हो सकती है। वही असर होगा जो शुक्र के ग्यारहवें भाव में होने पर होता है। अगर दूसरा भाव खाली हो, तो वीर्यपात (वीर्य का अनावश्यक निकलना), हस्तमैथुन (मास्टरबेशन) के कारण या स्त्रियों के ख्यालों में डूबे रहने के कारण आपको नपुंसकता (नामर्दी) की नौबत आ सकती है।
उपाय - ग्यारहवें भाव के शुक्र का उपाय सहायक हो सकता है।
बारहवां भाव (नंबर 12) - सट्टे का व्यापार बुरा असर दे सकता है।