कुंडली से खोजें

मंगल · 161

ग्रह और भाव चुनकर खोजें →

मंगल-शनि चौथे भाव में: संपत्ति, धन और पारिवारिक प्रगति

मंगल और शनि का चौथे भाव में होना धन, संपत्ति और पारिवारिक प्रगति ला सकता है। यह आपको सामाजिक कार्यों और उच्च सरकारी पद की ओर भी ले जा सकता है।

मंगल-राहु चौथे भाव में: पारिवारिक सुख और चुनौतियाँ

मंगल और राहु का चौथे भाव में होना पारिवारिक सुख और संपत्ति देता है, लेकिन शादीशुदा जिंदगी और मां के स्वास्थ्य को लेकर चुनौतियां भी ला सकता है।

मंगल-बुध चौथे भाव में: दूसरों पर अनजाने में बुरा असर

मंगल और बुध का चौथे भाव में होना आपके लिए कम हानिकारक है, लेकिन आपसे जुड़े लोगों को अनजाने में बुरे परिणाम मिल सकते हैं।

शुक्र-मंगल तीसरे भाव में: भाई-बहन को लाभ, चरित्र पर असर

तीसरे भाव में शुक्र और मंगल की युति भाई-बहनों के लिए शुभ हो सकती है, लेकिन व्यक्ति के चरित्र पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।

सूर्य-मंगल तीसरे भाव में: भाई-बहनों से लाभ और शत्रुओं पर विजय

जानें तीसरे भाव में सूर्य और मंगल की युति से भाई-बहनों से मिलने वाले लाभ, शत्रुओं पर विजय और अन्य शुभ-अशुभ प्रभावों के बारे में।

चंद्रमा-मंगल तीसरे भाव में: ज्ञान और क्रोध के प्रभाव

तीसरे भाव में चंद्रमा और मंगल का मेल आपको समझदार और सम्मानित बना सकता है, लेकिन अत्यधिक क्रोध और अहंकार से दुर्भाग्य और कर्ज का सामना करना पड़ सकता है।

मंगल-शनि तीसरे भाव में: संपत्ति और पारिवारिक चुनौतियाँ

मंगल और शनि की तीसरे भाव में युति संपत्ति दिला सकती है, लेकिन पारिवारिक विरोध और संतान संबंधी समस्याएँ भी दे सकती है।

मंगल-राहु तीसरे भाव में: अस्थिरता और व्यापार में बाधाएं

मंगल और राहु की तीसरे भाव में युति जीवन में अस्थिरता ला सकती है, जिससे व्यापार में बाधाएं और रिश्तों में धोखे का सामना करना पड़ सकता है।

मंगल-बुध तीसरे भाव में: बड़े भाई का साथ और माता-पिता का आशीर्वाद

मंगल और बुध का तीसरे भाव में होना बड़े भाई और माता-पिता के आशीर्वाद से जीवन में सुख और भाग्य लाता है, लेकिन चोरी से धन हानि भी हो सकती है।

मंगल-केतु तीसरे भाव में: यात्रा, संतान और स्वास्थ्य

मंगल और केतु के तीसरे भाव में होने से आपको यात्राओं से लाभ होता है, संतान का सुख मिलता है, लेकिन स्वास्थ्य और रिश्तों में चुनौतियां आ सकती हैं।

बृहस्पति-मंगल तीसरे भाव में: पैतृक संपत्ति की सुरक्षा और चुनौतियां

तीसरे भाव में बृहस्पति और मंगल की युति पैतृक संपत्ति की रक्षा करती है लेकिन उसे प्राप्त करने में बाधाएं ला सकती है। यह आपको धार्मिक बना सकता है, पर संतान और दोस्तों से परेशानी भी दे सकता है।

शुक्र-मंगल दूसरे भाव में: ससुराल से धन और संतान की बाधाएं

जब शुक्र और मंगल दूसरे भाव में होते हैं, तो ससुराल से धन लाभ हो सकता है, लेकिन संतान और शिक्षा में बाधाएं आ सकती हैं।

सूर्य-मंगल दूसरे भाव में: लंबी आयु और शत्रुओं पर विजय

सूर्य और मंगल का दूसरे भाव में होना लंबी आयु और शत्रुओं पर विजय दिलाता है। दिल साफ रखने से चारों ओर अच्छाई आती है।

चंद्रमा-मंगल दूसरे भाव में: परिवार, धन और संतान पर प्रभाव

दूसरे भाव में चंद्रमा और मंगल का एक साथ होना परिवार, धन, संतान और शिक्षा पर शुभ-अशुभ प्रभाव डालता है। जानें इसके परिणाम और उपाय।

मंगल-केतु दूसरे भाव में: परिवार, धन और संबंध

मंगल और केतु का दूसरे भाव में होना परिवार, धन और संबंधों को प्रभावित करता है। इसके अच्छे और बुरे दोनों तरह के प्रभाव हो सकते हैं।